झारखंड में मानस सप्त शिखर रामकथा के दौरान मोरारीबापू ने विश्व के नेताओं से एकजुट होकर वैश्विक शांति की अपील की
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
झारखंड.भगवान राम और रामचरितमानस की शिक्षाओं के प्रसार के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत पूज्य मोरारीबापू ने विश्व के नेताओं से वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करने की अपील की है। रविवार को झारखंड में मानस सप्त शिखर रामकथा के दौरान मोरारीबापू ने यह भावपूर्ण अपील की। यूक्रेन और रूस तथा इजरायल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे युद्धों का उल्लेख करते हुए आदरणीय मोरारी बापू ने कहा कि इन युद्धों में बहुत से लोगों की जान जा चुकी है और अब समय आ गया है कि युद्धों को समाप्त कर दिया जाए।
दिल दहला देने वाले दृश्य देखने को मिल रहे
युद्धों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान करते हुए मोरारीबापू ने कहा कि, “छोटे-छोटे बच्चों को टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन मांगते देखना दिल दहला देने वाला है। सब कुछ नष्ट हो गया है। उनकी दुनिया उजड़ गई है। जरा सोचिए कि वे किस तरह का जीवन जी रहे हैं।” मोरारीबापू ने कहा कि विश्व नेता जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली में एकत्र हुए हैं और वह प्रार्थना करते हैं कि वे युद्ध को समाप्त करने के लिए सर्वसम्मति से कोई निर्णय लेंगे।
शांति के लिए यूक्रेन-रूस सीमा पर कथा करूंगा
मोरारीबापू ने कहा कि मुझे नहीं पता कि मेरी आवाज़ वैश्विक नेताओं तक पहुँचेगी या नहीं, लेकिन यह भगवान महादेव तक पहुँचेगी। जो लोग अहिंसा और शांति में विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से मेरी अपील सुनेंगे। मोरारीबापू ने कहा कि अगर मेरा बस चले तो मैं शांति के लिए यूक्रेन-रूस सीमा पर कथा करूंगा। बापू ने कहा कि विनोबाजी ने हाथ ऊंचा करके कहा था कि तलवार बनाने वाले रुक जाओ, तलवार बनाने की बजाय तम्बूरा बनाओ। एकसूत्र में, एक धागे में सबको पिरोओ।
इजरायल और यूक्रेन जैसे युद्ध को खत्म करने का किया आह्वान
मोरारी बापू ने यह प्रतिज्ञा करके प्रतिक्रिया दी कि उनकी “व्यासपीठ हमेशा विश्व शांति, विश्व प्रगति और विश्व खुशी के लिए संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम के साथ रहेगी।” उन्होंने विश्व के नेताओं से संकीर्ण हितों से ऊपर उठने और इजरायल और यूक्रेन जैसी जगहों पर संघर्षों को समाप्त करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान, मोरारी बापू ने राम चरित मानस के विषयों को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ा, खास तौर पर शांति, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए। उन्होंने आदर्श राजा भगवान राम के शासन, राम राज्य का उदाहरण देते हुए जीवन के आदर्श नियमों को दर्शाया जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए सिद्धांतों के अनुरूप हैं।
व्यासपीठ सदैव ही विश्व शांति, विश्व प्रगति और विश्व सुख के लिए
इससे पहले भी मोरारी बापू ने भी इस हार्दिक भावना का उत्तर देते हुए कहा कि उनकी “व्यासपीठ सदैव ही विश्व शांति, विश्व प्रगति और विश्व सुख के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रम के साथ रहेगी।” कई साल पहले बापू ने पवित्र नाम का जाप करते हुए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की परिक्रमा की थी। इस बार उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि, विश्व के लीडर्स को छोटे-मोटे एवं अल्प स्वार्थों से ऊपर उठकर इजरायल और यूक्रेन में चल रहे युद्धों को समाप्त करने के लिए पूरा प्रयास करना चाहिए। इससे पहले 30 जुलाई को कई अग्रणी और जानी-मानी हस्तियों ने इस प्रवचन में भाग लिया। जिनसमें अंतर्राष्ट्रीय मामलों के आयुक्त एडवर्ड मर्मेलस्टीन, अंतर्राष्ट्रीय मामलों के लिए न्यूयॉर्क सिटी मेयर के कार्यालय से अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उपायुक्त दिलीप चौहान और उपायुक्त और चीफ ऑफ स्टाफ आइसाटा कैमारा शामिल थे। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर कार्यालय ने भी मोरारी बापू की व्यासपीठ को सर्वोच्च सम्मान दिया। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत बिनया श्रीकांत प्रधान और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर और चांसरी प्रमुख सुरेंद्र के. अधाना भी सम्मानित अतिथि थे। आध्यात्मिक गुरु के उपदेश संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) विशेष रूप से शांति, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के अनुरूप थे। उन्होंने राम चरित मानस से उदाहरण देते हुए बताया कि, किस प्रकार इस पवित्र ग्रंथ में सतत विकास लक्ष्यों के विषयों को विस्तार से समझाया गया है तथा उनकी हिमायत की गई है।

