तेज रफ्तार चालकों को अलर्ट करेगी सुरक्षा परत, ब्लैक स्पॉट के रूप में तब्दील हो रही गांव और कस्बों की क्रॉसिंग
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
India’s First Red Roads: नेशनल हाईवे (NH) में हादसों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है. इन बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए एनएचएआई ने सेफ प्लान तैयार किया है. वाहन चालकों पर अब मनोवैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से जागरूक करने का प्लान तैयार किया है, क्योंकि NH -30 में प्रयागराज कुंभ मेला 2025 के दौरान सबसे ज्यादा हादसे हुए थे, जिस पर मंथन किया गया और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों ने उन सभी ब्लैक स्पॉट को खत्म करने का प्लान तैयार कर लिया. यानी जिस प्रकार से जबलपुर-भोपाल नेशनल हाइवे के नौरादेही अभ्यारण्य के डेंजर जोन पर प्रयोग किया गया है और इस मार्ग को सुरक्षित करने के लिए करीब 12 किलोमीटर लंबे मार्ग में नई डिजाइन के साथ रेड रोड बनाया गया है. उसी प्रकार का प्रयोग अब एनएच-30 के गांव-कस्बे की क्रॉसिंग पर होने जा रहा है, जिसकी तैयारी एनएचएआई के अधिकारियों ने कर ली है. क्योंकि जबलपुर से गुजरने वाली रीवा से लखनादौन रोड के बीच कई ऐसे ब्लैक स्पॉट तैयार हो चुके हैं, जिन पर आए दिन हादसे हो रहे हैं. लिहाजा इन ब्लैक स्पॉटों पर नौरादेही अभ्यारण्य की तर्ज पर डिजाइन के साथ सड़क बनाने का प्लान बनाया गया है.
जबलपुर-रीवा रोड पर सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट
एनएचएआई के अधिकारियों की मानें तो जबलपुर-रीवा के बीच सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट तैयार हो गए हैं, जहां पर ओवरब्रिज बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है, क्योंकि जब भी किसी गांव-कस्बे की क्रॉसिंग से 30 हजार चार पहिया वाहन हर माह गुजरने लगते हैं, उस रोड की क्रॉसिंग ब्लैक स्पॉट में तब्दील हो जाती है और वहां ओवर ब्रिज बनाने की जरूरत पड़ती है. लिहाजा जबलपुर से रीवा और लखनादौन के हिस्से में जितने भी ब्लैक स्पॉट हैं, उन सभी जगह रेड मार्किंग कराई जाएगी.
नौरादेही अभ्यारण का प्लॉन होगा लागू
जबलपुर-भोपाल रोड के 2 किलोमीटर हिस्से पर कई टर्निंग प्वॉइंट हैं, उस हिस्से में रेड मार्किंग और मोटी लेयर बिछाई गई है. इसके अलावा वन्य जीवों की आवाजाही को देखते हुए 25 अंडरपास भी बनाए गए हैं, ताकि जानवर सड़क पर आए बिना सुरक्षित तरीके से रास्ता पार कर सकें. 12 किमी फोर लाइन सड़क में 2 किमी की सड़क में रेड बॉक्स बनाए गए हैं. इसमें 5 एमएम मोटी रेड कलर टेबल टॉप मार्किंग की गई है.
झटके लगने से सतर्क हो जाएंगे ड्राइवर
इस सड़क पर लाल रंग की 5 एमएम मोटी स्टॉप मार्किंग की गई है, जैसे ही गाड़ी के चक्के इसके ऊपर से निकलते हैं, गाड़ी चालक को हल्के झटके महसूस होने लगते हैं. इससे ड्राइवर गाड़ी की स्पीड को तो नियंत्रित करते ही हैं, साथ में दुर्घटना की संभावना को देखते हुए सचेत भी हो जाता है. इसके अलावा हाईवे पर लाल रंग की मार्किंग किए जाने से खतरे का अंदाजा अपने आप हो जाएगा. इस पद्धति को हर उस सड़क पर आजमाने की तैयारी एनएचएआई के अधिकारी कर रहे हैं, जहां ब्लैक स्पॉट बन रहे हैं.
ये हैं एनएच-30 के ब्लैक स्पॉट
लखनादौन-जबलपुर होते हुए रीवा तक बनी एनएच-30 का सिहोरा जंक्शन ब्लैक स्पॉट बन गया है, इसके अलावा बरनू एरिया व तिराहा, बरौदा तिराहा, खजरी खिरिया और गोटेगांव जंक्शन के अंतर्गत धूमा ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं. इन सभी जंक्शन पर ओवर ब्रिज बनाने की चर्चा है, लेकिन इससे पहले रेड मार्किंग करके हादसा रोकने का प्रयास किया जाएगा.
ऐसे नियंत्रित किए जाएंगे हादसे
- तेज रफ्तार वाहन चालक को अपने आप झटके महसूस होने लगेंगे.
- सड़क पर लाल मार्किंग का मतलब मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है, जिससे गाड़ी के ड्राइवर मनोवैज्ञानिक तरीके से अलर्ट हो जाएंगे.
- सड़क के दोनों ओर सफेद पेवर शोल्डर लाइन भी बनाई जाएगी, जिससे ड्राइवर को नींद आने पर जैसे ही गाड़ी सड़क के किनारे की ओर खिसकने लगेगी, ड्राइवर को झटके महसूस होंगे.
- टेक्निकली रूप से गाड़ी का टायर, लाइन के संपर्क में आने के बाद ड्राइवर को जैसे ही झटके महसूस होंगे, ड्राइवर अलर्ट हो जाएगा.

