शहर में 3 थाने बनाने के बाद भी ट्रैफिक व्यवस्था में नहीं हो पाया सुधार, पुलिस कर्मियों की पदस्थापना को लेकर उठाए जा रहे सवाल
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
jabalpur traffic News: मध्य प्रदेश जबलपुर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है. शहर की हर सड़क पर जाम के हालात निर्मित हो रहे हैं. ई-आटो, डीजल-सीएनजी आटो वालों की भरमार है, जिसके कारण हर दिन लगने वाला जाम तो अब आम हो चुका है. वाहन चालक कब और किस समय ट्रैफिक जाम में फंस जाए कहा नहीं जा सकता है. यदि किसी दिन तिराहे-चौराहे पर लगे ट्रैफिक सिग्नल बंद हो जाएं तो व्यवस्था ठप्प हो जाती है. इस वजह से आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं. 24 लाख से अधिक की आबादी वाले इस शहर में 1000 से अधिक ट्रैफिक बल की आवश्यकता है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस के पास कुल 349 पद स्वीकृत हैं और धरातल पर मात्र 176 पुलिसकर्मी ही मोर्चा संभाले हुए हैं. यानी 173 पपद खाली पड़े हैं. ट्रैफिक पुलिस के पास जितना बल है, उसमें से भी अधिकतर वीआईपी ड्यूटी, थानों और कार्यालय के काम में उलझा रहता है. इस कारण शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है. ट्रैफिक पुलिस व्यवस्था बनाने के बजाय चेकिंग पॉइंट बनाकर हेलमेट और सीट बेल्ट चेक करते दिखाई देती है. ऐसे में कई चौराहे, तिराहों से लेकर प्रमुख मार्ग पर ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ी रहती है.
अवकाश के चलते कम हो जाती है संख्या
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. कुल उपलब्ध बल में से एक बड़ा हिस्सा वीआईपी ड्यूटी, थानों और कार्यालयों के काम में उलझा रहता है. वीआईपी मूवमेंट के लिए होने वाली पायलट ड्यूटी में और इंटरसेप्टर वाहन पर जवान तैनात रहते हैं. इसके अलावा 10 से अिधक जवान समय-समय पर बीमारी के चलते या विभिन्न कार्य के लिए अवकाश पर रहते हैं, जिससे सड़कों पर वास्तविक बल और भी कम हो जाता है.
तीन ट्रैफिक थाने बनाए फिर भी अराजक ट्रैफिक
पहले शहर में मालवीय चौक पर ही ट्रैफिक थाना हुआ करता था, लेकिन कुछ साल पहले इस थाने के अलावा दो अन्य ट्रैफिक थाने बनाए गए. घमापुर और गढ़ा में भी ट्रैफिक थाना बना. बावजूद इसके ट्रैफिक पूरी तरह से अराजक ही दिखाई पड़ रहा है.
कहां क्या है ट्रैफिक थानों की स्थिति
घमापुर ट्रैफिक थाना
यहां पर एक डीएसपी, एक टीआई सहित अन्य पुलिसकर्मी तैनात हैं. बावजूद इसके रांझी के बाजार हों या फिर चुंगी कांचघर का ट्रैफिक या फिर घमापुर से लेकर रद्दी चौकी और तहसील कार्यालय तक ट्रैफिक सुबह शाम इतना अराजक होता है कि वाहन चालक निकल ही नहीं पाते हैं. जाम इस कदर लगता है कि लोग कई-कई घंटों तक फंसे रहते हैं. ऐसे हालात हर दिन बन रहे हैं.
गढ़ा ट्रैफिक थाना
यहां पर एक डीएसपी, एक टीअाई की तैनाती हुई है, लेकिन गढ़ा बाजार, गोरखपुर, गौरीघाट जैसे इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था दम तोड़ रही है. सड़कों पर अतिक्रमण से लेकर वाहनों की पार्किंग के कारण जाम लग रहा है. कहने को ट्रैफिक पुलिस अपने दल बल के साथ घूमती है, लेकिन नतीजा सिफर ही है.
मालवीय चौक
यहां पर भी एक डीएसपी, एक टीआई सहित कई पुलिसकर्मी और सबूंदार की पोस्टिंग है. यहां शहर का सबसे व्यस्ततम कमानिया फुहारा बाजार है. यहां का ट्रैफिक आज तक सुधर नहीं पाया. बाजार में हर दो पल में जाम के हालात बन जाते हैं. पुलिस ने कई बार कवायद की फिर भी जाम से निजात नहीं मिल पाई है. कई जगहों पर नो एंट्री में भी वाहनों की एंट्री होती है.
वन-वे रूट तक नहीं करा पा रहे पालन
विडंबना यह है कि ट्रैफिक पुलिस ने मुख्य बाजार की ओर जाने वाली सड़कों के लिए वन-वे रूट बनाया हुआ है. जिससे केवल एक ओर से वाहनों का आवागमन हो सकता है. लेकिन ट्रैफिक की वन-व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमरराई हुई है. ट्रैफिक थाने की पुलिस की ड्यूटी कब कहां लग जाए, कुछ पता ही नहीं चलता है. लिहाजा पुलिस की गैरमौजदगी के कारण न केवल वन-वे, बल्कि चौराहे-तिराहे में भी ट्रैफिक रूल का पालन नहीं हो पा रहा है.
स्वीकृत और पदस्त संख्या बल
स्वीकृत बल संख्या
आरक्षक 252
प्रधान आरक्षक 63
एसआई 11
एएसआई 23
पदस्थ बल
आरक्षक 108
हवलदार 42
एसआई 02
एएसआई 24

