शास्त्रों में गुप्त दान को अक्षय पुण्य की प्राप्त का मार्ग बताया गया है. हालांकि आजकल लोग इसकी महत्ता को भूलते जा रहे हैं.
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Gupt Daan Benefits: हिंदू धर्म ग्रंथों में दान का विशेष महत्व बताया गया है. दान देने की वस्तु और प्रक्रिया अलग अलग हो सकती है. लेकिन इनमें सबसे बड़ा दान गुप्त दान माना गया है. इसे महादान भी कहा गया है. लेकिन अब इसका मान (सम्मान) नहीं बचा है. ज्योतिष शास्त्र में तो गुप्त दान को पुण्य प्राप्त करने का मार्ग बताया गया है. यहां तक कि धन प्राप्ति के अचूक उपायों में भी गुप्त दान शामिल है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर व्यक्ति इन चीजों का गुप्त दान करे तो उसकी आर्थिक स्थिति में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं. गरीब व्यक्ति के भी तरक्की के द्वार खुलते हैं. काम में सफलता और आर्थिक स्थिति में सुधार से व्यक्ति अमीर बनता है. आइए जानते हैं क्या है गुप्त दान, कोन सी चीजें गुप्त दान करने से पुण्यों की प्राप्ति होती है.
भागवत पुराण, अग्नि पुराण, महाभारत और मनुस्मृति समेत लगभग सभी धर्म शास्त्रों में गुप्त दान का महत्व बताया गया है. गुप्त दान का अर्थ होता है, ऐसा दान जोकि दाएं हाथ से किसी को दिया जाए तो बाएं हाथ को भी पता न चले. इसलिए गुप्त दान पुण्य फल देने वाला होता है. शास्त्रों में तो गुप्त दान को अक्षय पुण्य के समान माना गया है.
हिंदू धर्म में दान को पुण्य, करुणा और आत्मशुद्धि का सबसे बड़ा साधन माना जाता है. आइए जानते हैं जिस गुप्त दान को शास्त्र में श्रेष्ठ और सर्वोच्च बताया गया है, आज के डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में कितने लोग फॉलो कर रहे हैं?
आज के आधुनिक समय में गुप्त दान का महत्व लोग समझ रहे हैं या नहीं
दान का साधारण अर्थ है कि, जिस वस्तु का आप दान कर रहे हैं उस वस्तु पर से आपका अधिकार अब समाप्त हो चुका है. धर्म शास्त्रों और पौराणिक कथाओं में हमने कई दानवीरों के किस्से-कहानियों को सुना है. लेकिन सवाल यह है कि, क्या सच में आज के आधुनिक समय में गुप्त दान का महत्व लोग समझ रहे हैं और इसे निभा रहे हैं. इसका जवाब हां भी है और नहीं भी. आज भी कई लोग हैं जो मंदिर आदि जैसे धार्मिक स्थलों पर गुप्त दान करते हैं, गरीबों को भोजन दान करते है, लेकिन सभी नहीं..
भगवद गीता के अनुसार- जो दान कर्तव्य समझकर बिना किसी फल या इच्छा के, उचित समय, उचित स्थान और योग्य पात्र को दिया जाए, वही सात्त्विक दान है.
सबसे शुद्ध रूप से गुप्त दान माना गया है
भगवत गीता में बताए इसी सात्त्विक दान का सबसे शुद्ध रूप से गुप्त दान माना गया है. जिसमें दान देने वाले में अहंकार नहीं सिर्फ करुणा हो. लेकिन धीरे-धीरे इसे भुलाया जा रहा है. आज स्थिति यह है कि पशु हो या गरीब हो या कोई जरूरतमंद, लोग उनकी मदद करने से पहले कैमरा ऑन करना नहीं भूलते. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि, आज के आधुनिक समय में गाय और गरीब को लोग दिखावे की रोटी दे रहे हैं.
जबकि शास्त्रों के लिए अनुसार गुप्त दान का अर्थ ऐसा दान है जिसे, सार्वजनिक न किया जाए, न ही दान पाने वाला अपमानित हो और न ही समाज में उसका प्रचार हो. गरुड़ पुराण और मनु स्मृति जैसे धर्म ग्रथों के अनुसार, जो दान दिखावा, प्रसिद्धि या स्वार्थ से किया जाता है, उसका पुण्यफल क्षीण हो जाता है.
बदलते दौर में बदलती दान की रूपरेखा
सोशल मीडिया के समय में भले ही गुप्त दान का महत्व बदलता या यूं कहें कि लुप्त होता रहा है. लेकिन दान के प्रति लोगों को प्रेरित भी किया जा रहा है, जिससे कई लोग बढ़ चढ़क मदद करने के लिए आगे भी आते हैं. सोशल मीडिया एक रोटी गाय के नाम या गरीब को भोजन जैसे मुहीम की शुरुआत कर वीडियो वायरल होते हैं, जिसमें लोग मदद करने के लिए आगे भी आते हैं. लेकिन इसे गुप्त दान नहीं कहा जा सकता है. हालांकि दान का पुण्यफल किसी न किसी रूप में जरूर मिलता है.
Source : DB News Update
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