इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट थीम के तहत मिलनी है जबलपुर को राशि, केन्द्र सरकार से 135 करोड़ रुपए जबलपुर स्मार्ट सिटी को मिलने हैं.
Source : DB News Update
BY – DB News Update | Edited By- Supriya
Smart City Jabalpur MP : जबलपुर शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए केन्द्र सरकार से 135 करोड़ रुपए जबलपुर स्मार्ट सिटी को मिलने हैं, क्योंकि इंटीग्रेटेड सालिड वेस्ट मैनेजमेंट (आईएसवीएम) थीम के तहत जबलपुर और उज्जैन का सिलेक्शन हुआ है, लेकिन स्मार्ट सिटी के अिधकारी इस प्रोजेक्ट के तहत डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) ही नहीं बना पा रहे हैं।
जब तक जबलपुर स्मार्ट सिटी के अिधकारी डीपीआर नहीं बनाएँगे और उस रिपोर्ट को केन्द्र में बैठे अिधकारी अप्रूव्ड नहीं करेंगे, तब तक यह राशि जबलपुर को नहीं मिलेगी, क्योंकि डीपीआर बनाने के बाद जबलपुर शहर का सर्वे होना है, प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।केन्द्र सरकार में बैठे अिधकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाना है।इसमें लंबा समय लगने वाला है।
इसके बाद भी स्मार्ट सिटी के अिधकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। इंटीग्रेटेड साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत क्या-क्या काम होने हैं, अभी कौन से कार्य कराए जा सकते हैं, इसकी कोई जानकारी उन्हें खुद को नहीं है।
हर घर से कचरे का किया जाना है विभाजन
नगर निगम ठोस कचरे को बायोडिग्रेडेबल, रिसाइकिलेबल और खतरनाक घरेलू कचरे में विभाजन करेगा। बायोडिग्रेडेबल कचरे में सड़ा हुआ खाना, सब्जी के छिलके और ज्यादातर गीला रसोई का कचरा एकत्रित नहीं किया जाएगा।
रिसाइकिलेबल कचरे से प्लास्टिक और खतरनाक कचरे में बल्ब, बैटरी आदि को अलग-अलग किया जाना है। इसी प्रकार हर मोहल्ले से लैण्डफिल ठोस कचरा निपटान के लिए नगर निगम के पास ऐसी कोई जगह नहीं है, जहाँ इसका संधारण किया जा सके।
चिकित्सकीय अपशिष्ट के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं
रासायनिक कारखानों से निकलने वाला औद्योगिक अपशिष्ट, अस्पतालों से निकलने वाला चिकित्सकीय अपशिष्ट सबसे ज्यादा खतरनाक ठोस अपशिष्ट माना जाता है और इनके निपटान के लिए विशेष व्यवस्था की जाना चाहिए। नगर निगम के पास कचरा चिकित्सकीय अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। अभी भी निजी एजेंसी के माध्यम से इसका प्रबंधन कराया जा रहा है। निजी एजेंसी चिकित्सीय कचरे का सही ढंग से निपटान कर भी रही है कि नहीं, इसे देखने वाला कोई नहीं है।
80 फीसद राशि केन्द्र से मिलेगी
पर्यावरण के अनुकूल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए स्मार्ट सिटी को 135 करोड़ रुपए की राशि मिलनी है। यह राशि सिटीज 2.0 चैलेंज अभियान के तहत मिलेगी। इस प्रोजेक्ट के तहत 80 फीसदी राशि केंद्र सरकार और 20 फीसदी राशि नगर निगम को वहन करनी है। इसके तहत गीले कचरे के निपटान के लिए बायो सीएनजी प्लांट की स्थापना, नए ऑटोमेटेड ट्रांसफर स्टेशन, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का उन्नयन जैसे कार्य किए जाने हैं, लेकिन स्मार्ट सिटी के अिधकारी अभी डीपीआर बनवाने के लिए मशक्कत करते नजर आ रहे हैं।
ठोस अपशिष्ट के स्रोत
- > ठोस घरेलू कचरा।
- > विभिन्न उद्योगों से निकले ठोस अपशिष्ट पदार्थ।
- > ठोस कृषि अपशिष्ट।
- > प्लास्टिक, काँच, धातु, ई-कचरा, आदि।
- > चिकित्सकीय अपशिष्ट।
- > निर्माण अपशिष्ट, सीवेज कीचड़।
अभी डीपीआर बनना है
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत जबलपुर शहर अभी सिलेक्ट हुआ है। इसके लिए स्मार्ट सिटी को अभी डीपीआर बनाकर केन्द्र में भेजना है, उसके बाद शहर का सर्वे होगा, निरीक्षण, प्रशिक्षण होगा, उसके बाद सरकार से किस्त में राशि मिलेगी।
वापिस जा चुकी है मिली हुई राशि
सूत्रों से पता चला है कि स्मार्ट सिटी को 135 करोड़ रुपये मिलने थे, जिसमें से करीब 35 करोड़ रुपये मिल चुके हैं. इसका उपयोग कहां किया जा रहा है और क्या काम हो रहे हैं? यह सब जानकारी देने से स्मार्ट सिटी और नगर निगम के अधिकारी बचते नजर आ रहे हैं। जबकि शासन का पैसा जहां भी खर्च किया जा रहा है, उसे एक बोर्ड में सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद स्मार्ट सिटी और नगर निगम के अधिकारी केन्द्र से मिले पैसों का हिसाब बताने को तैयार नहीं हैं।
काम के प्रति गंभीर भी नहीं हैं जिम्मेदार
जैसा कि सरकार प्रोजेक्टों को अमल में लाने के लिए करोड़ों रुपये का फंड मुहैया कराती है। जिससे शहर की जरूरतें पूरी हो सकें और शहर का विकास हो सके। लेकिन स्मार्ट सिटी और नगर निगम के अधिकारी उन प्रोजेक्टों पर गंभीरता पूर्वक काम ही नहीं कर रहे हैं। बल्कि ऐसे प्रोजेक्टों को शुरू करने में हीलाहवाली करते दिखाई पड़ते हैं।

