प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ आध्यात्मिकता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. जानिए दक्षिण भारत के ऐसे रहस्यमय मंदिर की पवित्रता और दर्शनीय परंपरा के बारे में.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Famous Temples of South India: भारत के दक्षिणी भाग में बने मठ-मंदिरों की पूजा पद्धति, देव आगमन और दर्शनीय परंपराएं उत्तर भारत की पूजा-पद्धति में अंतर देखने को मिलता है. उत्तर भारत के मठ-मंदिरों की पूजा और परंपराएं सामान्यत: आपस में मेल नहीं खाती हैं. यहां के साधु-संतों की दिनचर्या और पूजा वअनुष्ठान करने की पद्धति भी बिल्कुल विपरीत देखने को मिलती है. लेकिल देवी-देवताओं के प्रति आस्था रखने वालों में श्रद्धा के भाव एक जैसे हैं. इसी कारण ठंड के दिनों में दक्षिण भारत के मठ-मंदिरों का दर्शन करने वालों की संख्या में हर दिन बढ़ोत्तरी होती जा रही है. दक्षिण भारत के मंदिर धार्मिक पर्यटन केन्द्र बनते जा रहे हैं. क्योंकि यहां का समुद्री तट हर किसी को आकर्षक लगता है. लिहाजा ठंडी के दिनों में अधिकांश लोग दक्षिण भारत की यात्रा पर निकल जाते हैं. मध्य प्रदेश जबलपुर से कई श्रद्धालु-भक्त दक्षिण भारत की यात्रा में हैं. वे अपनी यात्रा का अनुभव साझा करते हुए बताया कि यहां की परिवहन सुविधा, होटल-रेस्टॉरेंट और मंदिरों में दर्शन करने की पद्धति सबसे अलग है. नव वर्ष में दक्षिण भारत के मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच चुके हैं. जिससे कई लोगों को ईष्टदेव के दर्शन करने के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ रहा है. आप यदि दक्षिण भारत की यात्रा पर निकल रहे हैं तो ज्यादा वक्त निकालकर पूरी तैयारी के साथ जाएं. जिससे उन सभी प्रमुख मंदिरों में विराजमान आराध्य के दर्शन हो सकें. जिसके लिए आप लंबी दूरी की यात्रा पर निकले हैं.
ये हैं प्रमुख धर्म स्थल

लक्ष्मी नारायणी स्वर्ण मंदिर-
तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के थिरुमलैकोडी पहाड़ी की तलहटी में स्थित श्री लक्ष्मी नारायणी स्वर्ण मंदिर है. यह तिरुपति से 120 किमी, चेन्नई से 145 किमी, पांडिचेरी से 160 किमी और बेंगलुरु से 200 किमी दूर है. मंदिर की मुख्य देवी, धन, शक्ति और समृद्धि की देवी श्री लक्ष्मी नारायणी या महा लक्ष्मी है.
लक्ष्मी नारायणी मंदिर का विमानम और अर्ध मंडपम शुद्ध सोने से ढका हुआ है और जिसमें देवी लक्ष्मी नारायणी ( विष्णु नारायण की पत्नी ) विराजमान हैं. यह मंदिर 40 हेक्टेयर (100 एकड़) भूमि पर स्थित है और इसका निर्माण वेल्लोर स्थित धर्मार्थ संस्था श्री नारायणी पीठम द्वारा किया गया है, जिसकी प्रमुख आध्यात्मिक गुरु श्री शक्ति अम्मा हैं, जिन्हें नारायणी अम्मा के नाम से भी जाना जाता है.
मीनाक्षी अम्मन मंदिर-
दक्षिण भारत के सबसे रंगीन मंदिरों में शामिल मीनाक्षी अम्मन मंदिर जहां देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर विराजते हैं. यह मंदिर अपने ऊंचे, रंगीन गोपुरम (मंदिर का शिखर) और जटिल नक्काशी के लिए सुप्रसिद्ध है.
पद्मनाभस्वामी मंदिर-
पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम द्रविड़ और केरल वास्तुकला स्टाइल का मिश्रण है, जो लेटे हुए भगवान विष्णु को समर्पित है. यह मंदिर अपने छिपे हुए खजानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है.
रामेश्वरम-
तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित रामनाथस्वामी मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. यह बारह पूजनीय ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इसे एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है, जहां भगवान राम ने पूजा की थी. रामेश्वरम द्वीपपर स्थित यह मंदिर अपने विशाल गलियारों, 22 पवित्र कुओं (कुंडों)और रामायण महाकाव्यसे जुड़ाव के लिए प्रसिद्ध है, जिसे एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थस्थल के रूप में देखा जा रहा है. यहां भगवान रामनाथस्वामी (शिव) और देवी पार्वती (पर्वतवर्धिनी) विराजमान हैं.
कन्या कुमारी-
देवी कन्या कुमारी भगवती महादेवी की कन्या रूप हैं. उन्हें हिन्दू लोग पार्वती का रूप मानते हैं. वहीं शक्ति के उपासक शाक्त लोग उन्हें भद्रकाली का अवतार मानते हैं. उन्हें श्री बालभद्रा, श्री बाल, कन्या देवी और देवी कुमारी के नाम से भी जानते हैं.
जो यात्रा जितनी कठिन वही लगती है आसान
दक्षिण भारत की यात्रा पर निकले यात्रियों का मानना है कि जो यात्रा जितनी कठिन दिखाई पड़ती है. वह यात्रा उतनी ही सरल है. दक्षिण भारत की यात्रा में हिंदी भाषा को लेकर कुछ समस्या है. लेकिन सरलता और मिलन सारिता हमारे प्रदेश जैसे ही लगती है. सभी के प्रति एक समान भाव देखने को मिलते हैं. किसी के प्रति राग-द्वेष दिखाई नहीं पड़ता है. यदि सामूहिक रूप से यात्रा की जाए तो और भी सरल दिखाई पड़ती है.

