सिख, बौद्ध और जैन संप्रदाय के लोग क्यों मानते हैं दीपोत्सव?
By : DB News Update | Edited By : सुप्रिया
Jabalpur MP News. भारत देश में दिवाली पर्व को सामाजिक और धार्मिक दोनो ही नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए इसे ‘दीपोत्सव’ दीपों का पर्व भी कहा जाता है. भारत में तमसो मा ज्योतिर्गमय की विचारधारा भी अंधेरे से प्रकाश की और इशारा करती है. हिंदू मान्यता के अनुसार दिवाली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र जी ने 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे. उनके आगमन पर अयोध्या वासियों ने घर-घर में घी के दीपक जलाएं थे.
कार्तिक माह की सघन काली अमावस्या की वो रात दीयों से जगमगा उठी थी. तब से लेकर वर्तमान समय तक हर भारतीय प्रत्येक वर्ष दिवाली का त्योहार मनाता है. इस पर्व को लेकर भारतीयों का मानना है कि दिवाली का त्योहार असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है. दिवाली का पर्व यही चरितार्थ करता है कि असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात दिवाली स्वच्छ व प्रकाश का पर्व है. वहीं सिख, बौद्ध और जैन संप्रदाय के लोग भी मानते हैं.
जहां एक तरफ दिवाली पर्व को जैन धर्म महावीर के मोक्ष के दिन के रूप में मनाता है, तो वही दूसरी तरफ सिख धर्म के लोग इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं.
2024 में दिवाली की तारीखें क्या है?
2024 में दिवाली का पर्व 29 अक्टूबर, मंगलवार धनतेरस के दिन शुरू होकर 3 नवंबर, 2024 रविवार भाई दूज के दिन समाप्त होगी. दिवाली के शुभ अवसर पर लोग माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा आराधना करते हैं. इस साल दिवाली 1 नवंबर 2024, शुक्रवार के दिन है.
दिवाली क्या है?
दिवाली बुराई पर अच्छाई की जीत का, अज्ञान पर ज्ञान की जीत का और अंधकार पर प्रकाश की जीत का त्योहार है. ये पर्व हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध धर्म के लोग भी मानते हैं.
दिवाली से जुड़ी कुछ परंपराएं क्या है?
- दिवाली को लेकर कुछ परंपराएं काफी चर्चित है, जिसमें-
- तेल या घी के दीपक जलाना
- घरों को रंगोली से सजाना
- माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा अर्चना करना
- उपहार भेंट करना
- स्वादिष्ट भोजन का लुफ्त उठाना
- घरों को रंग बिरंगी लाइटों से सजाना
- नए कपड़े पहनना
- तमाम तरह की मिठाइयों को खाना
दिवाली के 5 दिन कौन से हैं?
दिवाली का पर्व पांच दिवसीय उत्सव है जिसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। हर दिन का एक अलग महत्व होता है.

