पितृ पक्ष से जुड़ा एक धार्मिक अनुष्ठान जो पितृदोष निवारण और अकाल मृत्यु के कारण मरे हुए लोगों के लिए किया जाता है.
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
NARAYAN BALI PUJA: पितरों का पर्व यानी पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है. 7 सितंबर 2025, रविवार के दिन अगस्त ऋषि को तर्पण दिया गया. दूसरे दिन यानी 8 सितंबर 2025 सोमवार को प्रतिपदा श्राद्ध यानी पहला श्राद्ध है, जब लोग अपने पितरों का पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करेंगे. पितृ दोष या पितृ शाप को मिटाने के लिए (पूर्वजो के असंतुष्ट इच्छाओ को पूरा करने के लिए) नारायण बलि पूजा करते है तथा सांप को मारने के पाप से छुटकारा पाने के लिए भी नागबलि पूजा की जाती है.
गरुड़ पुराण के अनुसार, यह पूजा तब की जाती है जब कोई व्यक्ति की असामान्य मृत्यु जैसे बीमारी से मौत, आत्महत्या, जानवरों द्वारा, सांप के काटने से मौत हो जाती हैं. इस पूजा प्रक्रिया में, गेहूं के आटे से बने सांप के शरीर पर अंतिम संस्कार किया जाता है.
मान्यता है कि नारायण नागबलि पूजा की विधी अंतिम संस्कार में की जाने वाली विधि के समान है. पूजा के समय जपे गए सभी मंत्र पूर्वजों की असंतुष्ट इच्छाओं के लिए आत्मा को आमंत्रित करते हैं. क्योंकि यह कहा जाता है कि अंतिम संस्कार आत्माओं को दूसरी दुनिया से मुक्त करता है.
पितृदोष के कारण ऐसे दिखते हैं लक्षण
- स्वप्न में नाग दिखाई देना एवं नाग पीछे पड़ जाना.
- परिवार में आपसी झगड़े होना.
- संतान सुख का लाभ न होना अन्यथा गर्भपात हो जाना.
- व्यापार में नुकसान एवं पैसे की बर्बादी हो जाना.
- पढ़ाई में मन एकाग्र न होना.
- परिवार में बार-बार स्वास्थ्य की समस्याएं उत्पन्न होना.
- न्यायालयीन प्रक्रिया में उलझे रहना. काेर्ट कचहरी के चक्कर काटना.
- नौकरी में उतार-चढ़ाव तथा प्रमोशन न मिलना.
- शादी-विवाह का संबंध अचानक टूट जाना.
नारायण नागबली पूजा की प्रक्रिया
नारायण नागबलि पूजा विभिन्न समस्याओं को मिटाने के लिए की जाती है, नारायण नागबलि पूजा की प्रक्रिया को पूरा होने में कुल तीन दिन का समय लगता है. इसके पहले दिन, भक्त को पवित्र कुशावर्त कुंड (कुशावर्त तालाब) में स्नान करना होता है, उसके बाद “दशदान’ यानी, दस चीजों को दान में देने का संकल्प करना होता है.
भगवान शिव की साधना करने के बाद, सभी भक्तो को नारायण नागबली पूजा करने के लिए धर्मशाला जाना होता है. नारायण नागबली पूजा दो दिनों तक गोदावरी और अहिल्या नदी के संगम के स्थान पर संपन्न होती है.
ऐसे होती है नागबलि की पूजा
सनातन धर्म में सभी पूजाए प्रथम संकल्प, न्यास और कलश पूजन से शुरू होती है. उसके बाद भगवान सूर्य, गणेश, और विष्णु का अनुष्ठान होता है. उसके बाद, पांच देवताओं, भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु, भगवान महेश, यम, और तत्पुरुष की पूजा होती है. फिर क्रमशः अग्नि स्थापना, पुरुषसूक्त हवन, एकादशी विष्णु श्राद्ध, पंचदेवता श्राद्ध बलीदान, पिंड दान, पराशर, और द्वादश कर्म किए जाते हैं.
इस अनुष्ठान को करने के बाद, उपासक किसी को छू नहीं सकते यानि उन्हें एक दिन के लिए सूतक का पालन करना होता है. ऐसे सारे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, यह नारायण नागबली पूजा अनुष्ठान स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, पारिवारिक समस्याओ से छुटकारा या किसी सांप (कोबरा) द्वारा मार दिया या काट दिया गया है तो यह अनुष्ठान करते हैं.
त्र्यंबकेश्वर में ही क्यों किया जाता है अनुष्ठान?
त्र्यंबकेश्वर यह एक पवित्र स्थान है जहा विभिन्न पुजा करने से उनका फल जल्द ही प्राप्त होता है. त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर की शिव लिंग त्रिदेवता (भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु, भगवान महेश) को दर्शाती है.
भगवान शिवा के साथ साथ मंदिर में, श्री रामा, केदारनाथ , देवी लक्ष्मी, नारायण, गंगा देवी, रामेश्वर, गौतमेश्वरा, परशुराम आदि की भी पूजा की जाती है. जिससे मंदिर में एक सकारत्मक ऊर्जा निर्माण होती है और उपासक को सभी देवता के आशीर्वाद से कम समय में अधिक फल प्राप्त होता है.
भागवत पुराण में उल्लेख किये गए समुद्र मंथन के अनुसार, यह कहा जाता है की, केवल भगवान शिव आत्मसमर्पण आत्माओं के पाप को मिटा सकते है, तो कोई भी अनुष्ठान जैसे नारायण नागबलि करने के लिए त्र्यंबकेश्वर स्थान अधिक उचित है.
कौन कर सकता है अनुष्ठान?
- कोई भी व्यक्ति (किसी भी जाति का) यह अनुष्ठान कर सकता है.
- पारिवारिक खुशीके लिए, कोई विधुर भी यह अनुष्ठान कर सकते है.
- संतान प्राप्ति के हेतु, पति और पत्नी भी नारायण नागबलि जैसे पूजाएं कर सकते हैं.
- गर्भवती महिला को (केवल 5 महीने के गर्भवस्था तक) यह पूजा करने की अनुमति है.
- विवाह जैसे पवित्र कार्य के बाद हिन्दू को एक वर्ष तक यह अनुष्ठान नहीं करना चाहिए.
- यदि माता- पिता में से कोई एक की मृत्यु हुई हो तो एक वर्ष बाद नारायण नागबलि अनुष्ठान त्र्यंबकेश्वर मंदिर याने मंदिर के पूर्व दरवाज़े के ओर स्थित अहिल्या गोदावरी संगम और सती महास्मशान में किया जाता हैं.
- अलावा जबलपुर नर्मदा तट सिद्धघाट कुण्ड पर भी पूजा करने का विधान है.
- नारायण नागबलि पूजा से संबंधित जानकारी
- नारायण नागबली पूजा को करने में कुल 3 दिन लगते हैं.
- हिन्दू शास्त्र के अनुसार, केवल पुरुष ही पिंड दान की विधी कर सकता है.
- पूजा के 3 दिनो में पूजा करने वाले भक्त ब्राह्मणों द्वारा दिए गए सात्विक भोजन का ही सेवन कर सकते हैं.
- पूजा मे पुरुषों के लिए वस्त्र, सफेद रंग की धोती, गमछा, रुमाल, और सफेद रंग की साड़ी महिलाओं के लिए अनिवार्य है.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

