बड़ों का सम्मान करने से आशीर्वाद, सकारात्मक ऊर्जा तो प्राप्त होती है लेकिन शास्त्र अनुसार कुछ ऐसे लोग हैं जिनके पैर नहीं छून चाहिए, इससे पाप लगता है.
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
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Feet Touching Niyam: हिंदू धर्म में पैर छूना बड़ों के प्रति सम्मान का भाव प्रकट करने का प्रतीक माना गया है. पैर छूने की प्रक्रिया जितनी आस्था और विश्वास से जुड़ी हुई है उतना ही मान्यताओं से भी इसका खास संबंध हैं. हिंदू धर्म के अनुसार 7 लोगों को कभी भी अपना पैर नहीं छूने देना चाहिए. इससे दरिद्रता बढ़ती है.
इन्हें कदापि पैर न छूने दें
- भांजा या भांजी 100 ब्राह्मणों के बराबर एक होता है. हिंदू धर्म में ब्राह्मण को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है ऐसे में भांजा या भांजी को अपने मामा-मामी के पैर नहीं छून चाहिए. इससे सामने वाला पाप का भागी बनता है, मान्यता अनुसार उनका सौभाग्य दुर्भाग्य में बदल सकता है.
- कन्या को देवी का स्वरूप माना गया है. ऐसे में कुंवारी लड़कियों से कभी पैर नहीं छुवाने चाहिए. इससे व्यक्ति को दोष लगता है. ऐसा करने पर इसका उल्टा प्रभाव घर पर देखने मिलता है.
- जब कोई व्यक्ति सो रहा हो तब उसके पैर नहीं छूना चाहिए. इसे अशुभ माना गया है. कहा जाता है जीवित व्यक्ति निद्रा में हो और उसके पैर छूने पर उसकी उम्र घटती है. वैदिक शास्त्रों के मुताबिक केवल मृत व्यक्ति के ही लेटे हुए अवस्था में पैर छुए जा सकते हैं.
- मंदिर में कोई अपना मिल जाए तो वहां उसके पैर नहीं छूना चाहिए, मंदिर ईश्वर का स्थान है, यहां देवी-देवता से बड़ा किसी को नहीं माना जाता है.
- अगर आप अशुद्ध हैं, शौच की अवस्था में हैं, श्मसान घाट से आए हैं तो किसी के पैर न छुएं इससे उल्टा प्रभाव पड़ता है.
जब कोई पैर छुए तो भगवान से क्षमा मांगे
चरण स्पर्श करने से धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों तरह के लाभ प्राप्त होते हैं. जब भी कोई व्यक्ति चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, हमारे पैर छुए तो उन्हें आशीर्वाद तो देना ही चाहिए, साथ ही भगवान या अपने इष्टदेव को भी याद करना चाहिए. आमतौर पर हम यही प्रयास करते है कि हमारा पैर किसी को न लगे, क्योंकि ये अशुभ कर्म माना गया है. जब कोई हमारे पैर छूता है तो हमें इससे भी दोष लगता है. इस दोष से बचने के लिए मन ही मन भगवान से क्षमा मांगनी चाहिए.
किन लोगों के पैर छूने चाहिए
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को हमेशा योग्य लोगों के पैर छूना चाहिए. जैसे माता, पिता, गुरु आदि. इनके अलावा हिंदू धर्म में छोटों के पैर भी छूने का विधान है. जैसे नवरात्रि में कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पैर छूने की परंपरा है. लेकिन अयोग्य आदमी काा पैर बिल्कुल भी नहीं छूना चाहिए. क्योंकि अयोग्य व्यक्ति का पैर छूने से पाप लगता है. जीवन में दरिद्रता आती है और आपके मन में प्रसन्नता नहीं रहती है.
कैसे छूना चाहिए बड़ों का पैर?
सनातन धर्म को मानने वाले लोग इस बात को जानते हैं कि पैस सबसे पहले किसका छूना चाहिए और कैसे छूना चाहिए. यदि आपको इस बात की जानकारी नहीं है तो मैं बताने जा रहा हूं कि सबसे पहले किसका और कैसे पैर छूना चाहिए? सबसे पहले अपने पूजनीय का चयन करें और उनका पैर छुएं और अपने से बड़ों के पैर छूने के तीन तरीके हैं. जिसमें आदमी कमर झुकाकर अपने से वरिष्ठ व्यक्ति के पैर छूकर आशीर्वाद मांगता है. दूसरा तरीके में वह अपने घुटनों को मोड़कर बैठता है और सामने वाले के पैर छूता है. इसके अलावा तीसरे तरीके में वह व्यक्ति को दंडवत प्रणाम करता है. जिसमें वह पेट के बल जमीन में सीधे लेटकर प्रणाम करता है.
आशिर्वाद से मिलता है आत्मबल
ऐसी मान्यता है कि जब भी अपने से बड़ों का आप आशिर्वाद लेते हैं तो उससे कुछ न कुछ मिलता है. अपनों से बुजुर्ग, पूजनीय या फिर संत-महात्मा का पैर छूने से आपको आत्मबल मिलता है. उनका आशिर्वाद फलीभूत होता है. जीवन में तरक्की के रास्ते खुलते हैं.
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