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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > National > बाढ़ से निपटने के लिए एक्शन मोड पर अमित शाह
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बाढ़ से निपटने के लिए एक्शन मोड पर अमित शाह

DB News
Last updated: 12/04/2026 10:53 AM
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अधिकारियों के संग बड़ी बैठक करते हुए एहतियात बरतने के दिए निर्देश, पूर्वानुमान की सटीकता में और सुधार करने का आह्वान.

Source : DB News Update

Contents
अधिकारियों के संग बड़ी बैठक करते हुए एहतियात बरतने के दिए निर्देश, पूर्वानुमान की सटीकता में और सुधार करने का आह्वान.अमित शाह के नेतृत्व में बड़ी बैठकअधिकारियों ने क्या बतायापूर्वानुमान की सटीकता में और सुधार करने का आह्वान

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

नई दिल्ली:देश में मॉनसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। बिहार के बाद अब यूपी में भी इसकी एंट्री हो चुकी है। दिल्ली में भी मॉनसून की बेसब्री से इंतजार हो रहा। मॉनसून के भारी बारिश से कई इलाके बेहद प्रभावित हो जाते हैं। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने तैयारी तेज की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक्टिव हो गए हैं। देश में बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक की। इस दौरान गृह मंत्री ने बाढ़ से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए।

अमित शाह के नेतृत्व में बड़ी बैठक

हर साल मॉनसून की बारिश के कारण विभिन्न नदियों के जलस्तर में वृद्धि के चलते बिहार, असम और अन्य पूर्वी राज्यों के कई क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और कुछ अन्य राज्यों में भी मानसून के दौरान भूस्खलन और बारिश से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती हैं। तमिलनाडु, केरल और जम्मू-कश्मीर में भी हाल के वर्षों में बाढ़ आई है। ऐसे ही हालात से निपटने को लेकर अमित शाह ने अहम बैठक की।

अधिकारियों ने क्या बताया

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में असम बाढ़ का सामना कर रहा है। राज्य के 19 जिलों में करीब 3.90 लाख लोग इससे प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि इस साल बाढ़, भूस्खलन और तूफान के कारण जान गंवाने वाले लोगों की संख्या 37 पर पहुंच गयी है जबकि एक व्यक्ति लापता है।

पूर्वानुमान की सटीकता में और सुधार करने का आह्वान

गृह मंत्री ने बाढ़ पूर्वानुमान और सलाह जारी करने की समय सीमा बढ़ाने के लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पूर्वानुमान की सटीकता में और सुधार करने का आह्वान किया और सीडब्ल्यूसी के बाढ़ निगरानी केंद्रों को राष्ट्रीय आवश्यकताओं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय, एनडीएमए और राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) को हिमनदी झीलों की निगरानी करने और किसी भी प्रकार के विस्फोट की स्थिति में समय पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

गृह मंत्री ने बाढ़ पूर्वानुमान की अवधि को 3 से बढ़ाकर 7 दिन करने के लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “सीडब्ल्यूसी के बाढ़ निगरानी केंद्रों को हमारी राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए विकसित किया जाना चाहिए।” उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय, एनडीएमए और राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (एनआरएससी) को हिमनदी झीलों की कड़ी निगरानी करने और किसी भी प्रकार के रिसाव या विस्फोट की स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़क अवसंरचना के महत्व पर जोर दिया और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “भारी बारिश के दौरान जलभराव और सड़क क्षति को रोकने के लिए जल निकासी व्यवस्था राजमार्ग डिजाइन का अभिन्न अंग होनी चाहिए।”

पर्यावरण संबंधी उपायों पर बोलते हुए गृह मंत्री ने नर्मदा नदी बेसिन के किनारे वन क्षेत्र बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “यदि यह सफल होता है, तो इस मॉडल को अन्य नदी बेसिनों में भी लागू किया जा सकता है। इससे नदी पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने, मृदा अपरदन को कम करने और घटती वर्षा की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।”

बैठक में शहरी बाढ़ की लगातार समस्या पर भी चर्चा हुई। शाह ने केंद्रीय एजेंसियों को शहरों में बाढ़ नियंत्रण के लिए सक्रिय कदम उठाने और बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए व्यापक बाढ़ प्रबंधन योजनाएँ तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने आर्द्रभूमि की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, “मानसून के दौरान कम समय में होने वाली भारी वर्षा से निपटने के लिए आर्द्रभूमि का पुनरुद्धार और वृक्षारोपण आवश्यक हैं।” उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय से ब्रह्मपुत्र बेसिन में आर्द्रभूमि की स्थिति में सुधार करने को भी कहा, जिससे आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

गृह मंत्री ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए), आईएमडी, एनआरएससी और अन्य एजेंसियां ​​बाढ़ और संबंधित प्रौद्योगिकियों पर चर्चा करने के लिए विशेषज्ञों को एक सम्मेलन में आमंत्रित करें। उन्होंने कहा, “2014 में भारत मौसम विज्ञान के क्षेत्र में बहुत पिछड़ा हुआ था। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम विकसित देशों के बराबर हैं। अब हमें नंबर एक बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।”

आईएमडी और सीडब्ल्यूसी सहित विभिन्न विभागों ने पिछले वर्ष की बाढ़ समीक्षा के बाद से उठाए गए उपायों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मंत्रालयों और विभागों ने गृह मंत्री को वर्तमान मानसून के लिए अपनी तैयारियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। शाह ने तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया और चरम मौसम की स्थितियों से निपटने के लिए सॉफ्टवेयर प्रणालियों के सहयोगात्मक विकास का आह्वान किया।

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