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भारतीय स्टार्टअप में छंटनी जारी, निकाले जा चुके हैं 10000 से ज्यादा लोग

DB News
Last updated: 10/04/2026 1:09 PM
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भारतीय स्टार्टअप पिछले एक साल से आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रहे हैं. कोविड-19 महामारी के बाद नौकरियों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव

Source : DB News Update  

Contents
भारतीय स्टार्टअप पिछले एक साल से आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रहे हैं. कोविड-19 महामारी के बाद नौकरियों पर पड़े प्रतिकूल प्रभावबड़े स्टार्टअप ने कॉस्ट कटिंग के नाम पर लोगों को निकालासाइलेंट लेऑफ्स का रास्ता ज्यादा चुन रहीं कंपनियांकोविड-19 महामारी के बाद नौकरियों पर पड़े प्रतिकूल प्रभावLivSpace ने 10,000 लोगों को क्यों नौकरी से निकाला?

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Layoffs in Startup: नई दिल्ली. फंडिंग की कमी के चलते इस साल अब तक सभी स्टार्टअप लगभग 10 हजार लोगों की छंटनी कर चुके हैं. इसके अलावा स्टार्टअप में हायरिंग की स्थिति सुस्त है. हालांकि, साल 2024 की पहली छमाही साल 2023 के मुकाबले बेहतर रही है. साल 2023 की पहली छमाही में 21 हजार और दूसरी छमाही में 15 हजार लोगों की छंटनी की गई थी. यह आंकड़ा 2024 में दर्ज की गई 9,000 छंटनी से अधिक था और उससे पिछले वर्ष की 17,000 छंटनी से कम था, जब दुनिया कोविड-19 के संकट से उबरने की कोशिश कर रही थी। अमेरिका में 2025 का आंकड़ा चौंका देने वाला 1 मिलियन है , जो पिछले वर्ष की तुलना में 65% अधिक है।

बड़े स्टार्टअप ने कॉस्ट कटिंग के नाम पर लोगों को निकाला

लॉन्गहाउस कंसल्टिंग के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय स्टार्टअप सुस्ती से उबरने की भरसक कोशिश कर रहे हैं. पिछले 6 महीने में स्विगी (Swiggy), ओला (Ola), लिसियस (Licious), कल्टफिट (Cultfit), प्रिस्टन केयर (PristynCare) और बायजू (Byju) जैसी कंपनियों ने कॉस्ट कटिंग के नाम पर छंटनी की है. इसके अलावा फ्लिपकार्ट (Flipkart) और पेटीएम (Paytm) जैसी बड़ी कंपनियों ने भी छंटनी की है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लिपकार्ट ने अपने वर्कफोर्स में लगभग 5 से 7 फीसदी की कटौती की है. ईकॉमर्स कंपनी के कर्मचारियों की संख्या में लगभग 1500 घटी है. उधर, आर्थिक संकटों से जूझ रही पेटीएम में भी छंटनी जारी है. कंपनी ने लगभग 1000 कर्मचारी निकाले हैं.

साइलेंट लेऑफ्स का रास्ता ज्यादा चुन रहीं कंपनियां

रिपोर्ट के अनुसार, स्विगी ने लगभग 400 कर्मचारी निकाले हैं. उधर, आईपीओ लेकर आ रही ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) भी लगभग 600 कर्मचारी निकालने जा रही है. अप्रैल में ओला कैब्स (Ola Cabs) ने लगभग 200 लोग निकाले थे. इस साल स्टार्टअप ने रणनीति बदलते हुए साइलेंट लेऑफ्स (Silent Layoffs) का रास्ता ज्यादा चुना है. लोगों को एक साथ निकालने के बजाय धीरे-धीरे बिना किसी ऐलान के नौकरी से निकाला जा रहा है. स्टार्टअप ने ज्यादा सैलरी वाले लोगों को हटाकर कम वेतन के लोगों को नौकरी दी है. साइलेंट लेऑफ्स की मदद से कंपनियां मार्केट में नेगेटिव छवि से भी बच जाती हैं.

कोविड-19 महामारी के बाद नौकरियों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव

गेमिंग पर सख्त वित्तपोषण और नियामक आवश्यकताओं से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लगे नवीनतम झटकों तक, रोजगार में कटौती के कारण विविध हैं। कोविड-19 महामारी के बाद नौकरियों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव के कारण 2024 में छंटनी की संख्या 17,000 तक पहुंच गई।

2025 के लिए भारत का आंकड़ा 9,500 है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए लगभग एक मिलियन की संख्या के मुकाबले कुछ भी नहीं है, जहां अर्थव्यवस्था फल-फूल रही है लेकिन प्रौद्योगिकी-संचालित परिवर्तन अस्थिर बने हुए हैं।

LivSpace ने 10,000 लोगों को क्यों नौकरी से निकाला?

हाल ही में Anthropic ने अपने कोड जनरेट करने वाले सॉफ़्टवेयर Claude के ज़रिए शेयर बाज़ारों में हलचल मचा दी है। स्टार्टअप संस्थापक इरा बॉडनर ने सोशल मीडिया पर तब बवाल खड़ा कर दिया जब उन्होंने घोषणा की कि उनके विज्ञापन उत्पाद Ryze AI को Claude AI ने रातोंरात पछाड़ दिया है। होम डेकोर स्टार्टअप LivSpace ने हाल ही में लगभग 1,000 कर्मचारियों की छंटनी की और सार्वजनिक रूप से कहा कि यह छंटनी लागत बचाने और AI का उपयोग करके संचालन करने के लिए की जा रही है।
इन सब बातों से न तो स्टार्टअप जगत के पुराने जानकारों को हैरानी होगी और न ही उन लोगों को जो लगभग 2000 के आसपास “डॉट कॉम बबल” के दौर में बड़े-बड़े दावे करने वाले उपभोक्ता इंटरनेट स्टार्टअप्स, जो B2C (बिजनेस टू कंज्यूमर) और B2B (बिजनेस टू बिजनेस) जैसे संक्षिप्त नामों का इस्तेमाल करते थे, के पतन को देखकर चौंकेंगे। अंततः, B2C का मतलब कुछ लोगों के लिए “कार्पोरेट नौकरियों में वापसी” और दूसरों के लिए “ऊब भरी जिंदगी में वापसी” निकला।

अभी-अभी वयस्क हुए Gen Z के बच्चों और अभी-अभी वयस्कता की ओर कदम बढ़ा रहे Millennials को कुछ बुनियादी बातें सीखने की जरूरत है क्योंकि वेंचर फंडिंग में कमी आ रही है और AI के बढ़ते प्रभाव के बीच नौकरियों की प्रासंगिकता की वास्तविकता का पता चल रहा है, साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विलक्षण आर्थिक नीतियों से लेकर भू-राजनीतिक युद्ध के बादल तक अन्य वैश्विक अनिश्चितताएं भी मौजूद हैं।

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