शुभांशु शुक्ला को लेकर यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के फ्लाइट सर्जन डॉ. ब्रिगिट गोडार्ड ने आश्वासन देते हुए कहा है कि वो पूरी तरह से फिट हैं और समय के साथ वो अंतरिक्ष में एडजस्ट हो जाएंगे.
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By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Communication With Astronauts: भारत के लाल शुभांशु शुक्ला फिलहाल अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्पेस सेंटर में हैं. उन्होंने अभी हाल ही में देशवासियों के नाम एक संदेश दिया था. उस संदेश में उन्होंने कहा था कि यहां रहते हुए उनके सिर में दर्द सा है लेकिन ये समय के साथ ठीक हो जाएगा. उन्होंने साथ ही कहा था कि स्पेस सेंटर में रहने का अनुभव कमाल का है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के फ्लाइट सर्जन डॉ. ब्रिगिट गोडार्ड स्पेस के सभी मेंबर के स्वास्थ्य पर निगरानी रखे हुए हैं. उन्होंने आश्वासन दिया है कि स्पेस में सभी पूरी तरह से फिट हैं और समय के साथ वो अंतरिक्ष में एडजस्ट हो जाएंगे. डॉक्टर्स की मानें तो उन्होंने बताया कि पायलट ट्रेनिंग के दौरान शुभांशु शुक्ला की अलग-अलग स्थिति में रहने की ट्रेनिंग पहले ही दी गई थी. लेकिन जब उन्हें अंतरिक्ष में जाना था तो उससे भी उन्हें पूरी तरह से तैयार कराया गया था.
टेलीमेडिसिन सुनिश्चित करता है निगरानी
उन्होंने आगे कहा कि टेलीमेडिसिन सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की बारीकी से निगरानी की जाए. अंतरिक्ष इस तरह की छोटी मोटी दिक्कत होती रहती है. एक बार जब वह अंतरिक्ष में ग्रैविटी के साथ अपना तालमाल बना लेंगे तो उनकी ये दिक्कत भी दूर हो जाएगी. उन्हें आगे अंतरिक्ष में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी ये मैं कह सकता हूं.
डॉ. ब्रिगिट गोडार्ड ने आश्वासन देते हुए कहा है कि वो पूरी तरह से फिट
इस खास बातचीत में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के फ्लाइट सर्जन डॉ. ब्रिगिट गोडार्ड ने आश्वासन देते हुए कहा है कि वो पूरी तरह से फिट हैं और समय के साथ वो अंतरिक्ष में एडजस्ट हो जाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि पायलट ट्रेनिंग के दौरान शुभांशु शुक्ला की अलग-अलग स्थिति में रहने की ट्रेनिंग पहले ही दी गई थी. लेकिन जब उन्हें अंतरिक्ष में जाना था तो उससे भी उन्हें पूरी तरह से तैयार कराया गया था.
उन्होंने आगे कहा कि टेलीमेडिसिन सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की बारीकी से निगरानी की जाए. अंतरिक्ष इस तरह की छोटी मोटी दिक्कत होती रहती है. एक बार जब वह अंतरिक्ष में ग्रैविटी के साथ अपना तालमाल बना लेंगे तो उनकी ये दिक्कत भी दूर हो जाएगी. उन्हें आगे अंतरिक्ष में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी ये मैं कह सकता हूं.
शुभांशु शुक्ला की ट्रेनिंग आएगी काम
ब्रिगिट गोडार्ड ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रा चाहें कितनी भी कम समय की हो, लेकिन इससे मानव बायोलॉजी और फिजियोलॉजी पर फर्क पड़ता ही है. अंतरिक्ष यात्रियों में फ्लूड शिफ्ट, बोन डेंसिटी लॉस और स्पेस मोशन सिकनेस जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. गोडार्ड ने कहा कि शुभांशु शुक्ला के पास लड़ाकू विमान उड़ाने का लंबा अनुभव है और उनके फाइटर पायलट ट्रेनिंग और डेडिकेटेड मेडिकल देखरेख के कारण वह माइक्रोग्रैविटी के लिए पूरी तरह से फिट हैं.
अंतरिक्ष के यात्रियों को इस प्रकार की दिक्कतों का करना पड़ता है सामना
जानकारों की मानें तो “अंतरिक्ष यात्रियों को सबसे पहले जो प्रभाव महसूस होता है, वह है शरीर में तरल पदार्थों का स्थानांतरण, क्योंकि तरल पदार्थ सिर की ओर ऊपर की ओर बढ़ते हैं, जिससे सिर भारी लगने लगता है, चेहरा सूज जाता है, नाक बंद हो जाती है और खोपड़ी में दबाव महसूस होता है। इसके परिणामस्वरूप चक्कर आना, सिरदर्द और असंतुलन की अनुभूति हो सकती है।”
आंतरिक कान, जो संतुलन को नियंत्रित करता है, गुरुत्वाकर्षण के बिना भ्रमित हो जाता है , जिसके कारण “कुछ अंतरिक्ष यात्रियों को पहले कुछ दिनों में गतिभंग का अनुभव होता है।”

