हिंदू धर्म की शादियों में अक्सर दुल्हन लाल रंग के जोड़े में ही क्यों नजर आती हैं और सुहाग का रंग भी लाल क्यों माना गया है. आइए जानते है इसका रहस्य.
By : एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Source : DB News Update
Hindu Wedding Rituals: हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में शादी भी एक संस्कार है. इस दिन हर एक लड़की व लड़का के लिए यह दिन खास होता है. शादी के मौके पर दुल्हन आउटफिट्स से लेकर मेकअप तक, हर एक चीज का ध्यान रखती हैं. इसलिए हिंदू धर्म में शादी के दौरान की सारी रस्में कोई न कोई संदेश जरूर देती हैं. क्योंकि उनका कुछ ना कुछ मतलब तो होता ही हैं.
सकारात्मकता का प्रतीक है लाल रंग
हिंदू धर्म के पौराणिक शास्त्रों में वर्णित लाल रंग को सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है और यह रंग शुभ संकेत भी देता है. यह रंग शक्ति, प्रेम, शौर्य और ममता का प्रतीक भी माना गया है. आध्यात्मिक दृष्टि से लाल या भगवा रंग त्याग का भी प्रतीक माना गया है. हमारे हिंदू धर्म के साधु-संत जब अपने घर का त्याग करते हैं तो वे लाल रंग का वस्त्र ही धारण करते हैं. इसी प्रकार जब कोई लड़की अपने माता-पिता के घर का त्याग कर नए घर आंगन के लिए प्रस्थान करती है तो अग्नि के स्वरूप लाल रंग का वस्त्र धारण करती है. इसी वजह से शादियों में दुल्हन लाल रंग का जोड़ा पहनती हैं.
लाल रंग की मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जा रहा
हिंदू धर्म में लाल रंग को मां लक्ष्मी से भी जोड़ा गया है. धन की देवी मां लक्ष्मी भी हमेशा लाल रंग के वस्त्र धारण करते हुए दिखाई पड़ती हैं, इसलिए दुल्हन को भी लाल रंग का जोड़ा पहनाया जाता है और शादी के बाद भी दुल्हन को लक्ष्मी का स्वरूप ही माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि लाल जोड़ा पहनने से दुल्हन सौभाग्य और समृद्धि लेकर अपने पति के घर में प्रवेश करती है.
मनोवैज्ञानिक कारण भी है
लाल रंग को सिर्फ़ धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से शुभ नहीं माना गया है, बल्कि इसका पीछे मनोवैज्ञानिक कारण भी है. बहुत से लोग लाल रंग को प्रेम, ऊर्जा और मंगल का प्रतीक मानते हैं. यही वजह है कि विवाह जैसे शुभ अवसर पर लाल परिधान पहनना एक अच्छी शुरुआत का संकेत माना गया है. साथ ही, दुल्हन को भीड़ में सबसे खास और आकर्षक दिखाने में यह रंग बड़ी भूमिका निभाता है.
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