रहस्यमयी चीजों के बारे में पढ़कर हम चौंक जाते हैं। हालांकि, कई बार इन चीजों के मौजूदा समय में होने का भी दावा किया जाता है।
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
World Mysterious Treasures:दुनिया में इतिहास की किताबों में उल्लेख कई तरह के रहस्यमयी चीजों के बारे में पढ़कर हम चौंक जाते हैं। हालांकि, कई बार इन चीजों के मौजूदा समय में होने का भी दावा किया जाता है। मगर, इनके बारे में कुछ पता नहीं चल पाता है। हाल ही में एक व्यक्ति ने अपने साथ घटित कुछ इस तरह की घटना के बारे में बताया है। दरअसल, शख्स का कहना है कि वह बायरन प्रीस की साल 1982 में प्रकाशित एक पुस्तक “द सीक्रेट: ए ट्रेजर हंट” के बारे में पढ़ रहा था। इस पुस्तक को पढ़ते वक्त उसकी नजर स्टेटन आइलैंड में लिखे एक रहस्यमयी खजाने की ओर गई। इसके बाद वह शख्स उस खजाने की तलाश करने के लिए चला गया। इस खजाने को ढूंढ निकालने के लिए उसने हर जगह खुदाई करना शुरू कर दी।
रहस्य जानते ही खड़े हो जाएंगे रोंगटे
किताब में खजाने को लेकर खुलासा इस बारे में न्यूयॉर्क पोस्ट ने एक रिपोर्ट पब्लिश की है। इसमें बताया गया है कि 58 वर्षीय शख्स का नाम डेविड हेगर है। एक दिन शनिवार की सुबह 6 बजे डेविड अचानक उठ गए। इसके बाद अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ खजाना ढूंढने के लिए खुदाई करना चालू कर दी। डेविड ने कहा कि बायरन प्रीस की किताब के मुताबिक यह खजाना इसी जगह पर छुपा है। इस जगह को पहले भी कई बार खुदा जा चुका है, मगर कुछ हाथ नहीं लगा। ऐसा इसलिए क्योंकि वह सुरागों को सही तरह से समझ नहीं पाए थे। डेविड पेशे से एक एक जियोलॉजी और साइंस के टीचर हैं।
उनका मानना है कि किताब में ऐसे दो बातों के बारे में बताया गया है, जिसे आज भी कोई सुलझा नहीं पाया है। इन चीजों को हमने अच्छी तरह से समझा लिया है। डेविड ने कहा कि खजाना को पार्क में इसी जगह पर कही छुपाया गया है। कहा जाता है कि साल 1980 के दशक के शुरु होते ही उत्तरी अमेरिका के 12 शहरों में चाबियों को जमीन में दफना दिया गया था। ऐसे में किताब में इन्हीं ठिकानों के सुरागों का पूरा वर्णन किया गया है। डेविड की किताबों को देखते हुए शिकागो, क्लीवलैंड और बोस्टन में जगह जगह पर खुदाई की गई थी। मगर, आज तक यह खजाना किसे के हाथ नहीं लगा। इस बारे में लोगों का कहना है कि लूट के सामान को पांच बोरों में भरकर रखा गया है। साल 2005 में लॉन्ग आइलैंड पर एक कार हादसे में प्रीस मारे गए थे।
कई प्रकार की सामग्री हाथ लगी
परिवार के साथ कोलोराडो पहुंचे किताब में बताए गए निर्देशों को समझने के बाद डेविड अपने परिवार के साथ खजाना ढूंढने के लिए डेनवर से कोलोराडो चले गए। उन्होंने अपने साथ बैटरी से चलने वाली पावर ड्रिल, फावड़ा और अन्य भूमिगत कैमरा अपने साथ रख लिया था। यदि डेविड के हाथों चाबी लग जाती तो उनकी किस्मत बदल सकती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि चाबी जिस बॉक्स के अंदर रखी हुई है, उसके अंदर एक पुखराज भी मौजूद है।
इस पुखराज की कीमत 2000 डॉलर मतलब 1.66 लाख रुपये के आसपास बताई जा रही है उन्होंने बताया कि वह खजाना खोदने का काम छिपकर कर रहे हैं। इस बात की जानकारी उन्होंने किसी के साथ साझा नहीं की है। डेविड का कहना है कि उन्होंने खुदाई करने के लिए हर तरह के औजारों के साथ अभ्यास किया है। इस चक्कर में डेविड और उसके परिवार ने 30 फीट जमीन तक खोद डाली है। मगर, इसके बावजूद उन्हें खजाने का नामोनिशान तक नहीं मिला।
दुनिया के 10 रहस्यमय खजाने, खोज में कई मरे
धन-दौलत, हीरे-जवाहरात, सोना-चांदी आदि को जमा करने का शौक इंसान को शुरू से रहा है। इतिहास में कई ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने बड़ी मात्रा में इन चीजों को जमा करके अपने खजाने में भरा और उनके मरने के बाद यह पता नहीं चला कि उनका खजाना कहां है। कई लोग इन खजानों की तलाश में लगे रहते हैं।
1941 में नाजियों ने इस पर कब्जा कर लिया
अंबर रूम सेंट पीटर्सबर्ग के करीब एक महल में था। दरअसल यह सोने का बना एक कमरा नुमा चैंबर था जिसका निर्माण 1707 में पर्शिया में हुआ था जो पीटर द ग्रेट को रूस और पर्शिया के बीच हुई शांति के बाद गिफ्ट में मिला था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1941 में नाजियों ने इस पर कब्जा कर लिया और इसे सुरक्षित करने के लिए अलग अलग भागों में बांट दिया। इन सभी टुकड़ों को 1943 में एक म्युजियम में प्रदर्शित किया गया। जहां से यह पूरा का पूरा द अंबर रूम गायब हो गया। तब से इस खजाने का भी पता नहीं चला।

