विवाह मुहूर्त कल 4 फरवरी से शुरू हो रहे हैं, लेकिन 14 मार्च से फिर लग जाएगा विराम, जानें वजह…
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Vivah Muhurat 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार विवाह के लिए शुभ मुहूर्त 4 फरवरी से शुरू हो रहे हैं. लेकिन वैवाहिक अग्नि का फेरा लेने के लिए 5 फरवरी को ही सबसे अच्छा मुहूर्त है. ज्योतिष गणना के अनुसार 4 फरवरी को विवाह में अग्नि का फेरा लेने के लिए केवल मकर लग्न मिल रही है, जो सुबह 5 बजे सुबह 7 बजे तक ही है. क्योंकि किसी भी एक लग्न की समय सीमा डेढ़ से 2 घंटे तक ही रहती है और मकर लग्न सुबह के समय है. इस कारण शादी-विवाह में इस दौरान अग्नि के फेरे लेना संभव नहीं हो पाता है. इस कारण 4 फरवरी को विवाह फेरे के लिए शुभ मुहूर्त उपयुक्त नहीं बताया गया है. जबकि 5 फरवरी को मकर, तुला, मीन और कन्या लग्न मिल रही हैं. जिसके कारण वैवाहिक फेरे के लिए 4 लग्न का समय मिल जाएगा. इसी कारण शादी के लिए 5 फरवरी का विवाह शुभ मुहूर्त सबसे ज्यादा उपयुक्त है.
5 को मकर, तुला, मीन और कन्या लग्न का समय
विवाह में सात फेरे लेने के लिए शुभ मकर लग्न 8:15 मिनिट से शुरू 12:44 मिनिट है, 3:01 बजे से लेकर 5:07 मिनिट तक तुला लग्न है, 6 बजे 8:30 बजे तक गौधूलि बेला का मुहूर्त है और कन्या लग्न 3 बजे से 7 बजे तक है. इस प्रकार से 5 तारीख को शादी के फेरे का मुहूर्त लगातार मिल रहा है. इसी कारण 5 फरवरी से शादी विवाह प्रारंभ होंगे.
15 जनवरी को अस्त हो गया था शुक्र
हिंदू धर्म को मानने वाले लोग मांगलिक कार्य शुक्र ग्रह के उदय होने के बाद ही प्रारंभ करते हैं. लेकिन 15 जनवरी को चातुर्मास समाप्त होते ही शुक्र ग्रह अस्त हो गए और मांगलिक कार्यों में पाबंदी लग गई और जनवरी माह में विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रम नहीं हुए. अब जब शुक्र ग्रह अस्त अवस्था से बाहर आ गए हैं तो ग्रह प्रवेश, विवाह, कर्ण छिद्र आदि सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो गए हैं.
भौतिक समृद्धि का कारक माना जाता है शुक्र
हिंदू पंचांग में ऐसी मान्यता है कि शुक्र ग्रह सुख, वैवाहिक जीवन, ग्रह शांति और भौतिक सुख का कारक है. शुक्र ग्रह का उदय 4 फरवरी को हो रहा है, जिसके बाद से मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे. लेकिन विवाह आदि कार्यक्रम 5 फरवरी से प्रारंभ होंगे. इस साल कुल 59 विवाह के शुभ मुहूर्त बताए जा रहे हैं. ये सभी वैवाहिक कार्यक्रम 6 दिसंबर तक होते रहेंगे.
14 मार्च से 13 अप्रैल तक रहेगा खरमास
यहां आपको बता दें कि इस साल 2026 में एक माह का खरमास भी लगने जा रहा है, जो 14 मार्च से 13 अप्रैल तक रहेगा. इस अवधि में शादियां नहीं होंगी. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य का मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाता है और इस दौरान वैवाहिक जैसे मांगलिक कार्यकम नहीं होते हैं. खरमास समाप्त होने के बाद फिर से मांगलिक कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएंगे.
मांगलिक कार्यक्रम फरवरी माह
फरवरी 2026 माह की 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21, 24, 25 और 26 फरवरी को विवाह की कुल 12 तिथियों में विवाह का मुहूर्त है. इसके अलावा मार्च में 8, अप्रैल में 8 और मई माह में 8 विवाह के शुभ मुहूर्त हैं. इसके अलावा कई ऐसे माह हैं, जिनमें विवाह के एक भी मुहूर्त नहीं हैं.
चातुर्मास 2026 कब होगा प्रारंभ
ज्येष्ठ अधिकमास (17 मई से 15 जून) इस बार ज्येष्ठ का महीना दो बार पड़ रहा है, इसलिए पहले महीने में शादी-ब्याह नहीं हो सकेंगे. चातुर्मास देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है.
देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है और इसके साथ ही शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं.
2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को पड़ेगी इसलिए, 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 के बीच कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे.
फाल्गुन के व्रत और त्योहार
02 फरवरी – फाल्गुन की शुरुआत
05 फरवरी – द्विजप्रिय संकष्टी
07 फरवरी – यशोदा जयंती
08 फरवरी – भानु सप्तमी, शबरी जयन्ती
09 फरवरी – जानकी जयंती , कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
13 फरवरी – कृष्ण भीष्म द्वादशी, कुम्भ संक्रान्ति, विजया एकादशी
14 फरवरी – शनि त्रयोदशी, शनि प्रदोष व्रत
15 फरवरी – महाशिवरात्रि
17 फरवरी – सूर्य ग्रहण, फाल्गुन अमावस्या
19 फरवरी – फुलेरा दूज
22 फरवरी – स्कन्द षष्ठी
24 फरवरी – होलाष्टक शुरू,मासिक दुर्गाष्टमी
27 फरवरी – आमलकी एकादशी
01 मार्च – रवि प्रदोष व्रत
02 मार्च – होलिका दहन
03 मार्च – होली
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