2026 में सावन 30 जुलाई से प्रारंभ होगा, आइए जानते हैं कितने सावन सोमवार व्रत रखा जाएगा और इन दिनों भगवान भोलेनाथ की पूजा का विधान क्या होगा? जानें…
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Sawan 2026 Start Date: हिंदू धर्म में देवाधिदेव भगवान भोलेनाथ के लिए सावन का महीनां अत्यंत प्रिय माना गया है. भगवान शिव शंकर जगत के पालनहार हैं. जीवों का कल्याण करने वाले हैं. इसलिए हर साल सावन माह में भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा के लि सावन माह को शुभ माना जाता है और इन दिनों उनका रुद्राभिषेक करने से कई गुना फल मिलने की मान्यता है. हलांकि हिंदू धर्म के पंचांग का पांचवां महीना सावन माह कहलाता है, यह मुख्यत: जुलाई या अगस्त पर पड़ता है. इन दिनों भगवान भोलेनाथ पृथ्वीलोक मे वास करते हैं. इसी मान्यता के आधार पर श्रद्धालु भक्त बड़ी आस्था के साथ भगवान भोलेनाथ को एक लोटा जल देते हैं और अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, जिससे भगवान भोलेनाथ की कृपा से उनके कष्ट समाप्त हो जाएं.
2026 में सावन कब शुरू होगा?
2026 में सावन 30 जुलाई से प्रारंभ होगा और 28 अगस्त तक रहेगा. यानि इस वर्ष 28 दिन का ही श्रावण मास होगा. सावन के हर सोमवार के अलावा इस माह में आने वाली त्रयोदशी (प्रदोष व्रत), चतुर्दशी तिथि (सावन शिवरात्रि), नाग पंचमी, सावन अमावस्या, सावन पूर्णिमा जलाभिषेक के लिए बहुत खास तिथियां मानी जाती है.
सावन सोमवार 2026 तिथियां ?
- – सावन प्रारंभ – 30 जुलाई 2026
- – प्रथम सावन सोमवार व्रत – 03 अगस्त 2026
- – द्वितीय सावन सोमवार व्रत – 10 अगस्त 2026
- – तृतीय सावन सोमवार व्रत – 17 अगस्त 2026
- – चतुर्थ सावन सोमवार व्रत – 24 अगस्त 2026
- – श्रावण मास समाप्त – 28 अगस्त 2026
सावन महीने का महत्व
भगवान भोलेनाथ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए सावन मास अत्यंत फलदायी है. इन दिनों निष्काम भाव से किये गये कर्म मोक्ष प्रदान करने वाले होते है. सावन माह में अक्सर लोग शिवालय में जल चढ़ाते हैं. कई लोग ज्योतिर्लिंग में जल चढ़ाने के लिए जलाशय से कांवड़ यात्रा निकालते हैं और जल से भरी कावंड़ अपने कंधों पर लेकर पैदल चलते हैं और शिव मंदिर पहुंचते हैं. ऐसी मान्यता है कि जलाभिषेक करने से जन्म जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं.
सावन में क्या करना चाहिए
- सावन में भगवान भोलेनाथ का पूरे मास रुद्राभिषेक करना चाहिए.
- श्रावण मास में आहार संतुलित करना चाहिए,
- पत्तेदार सब्जियों का त्याग करना चाहिए.
- ग्रहयज्ञ, कोटिहोम, लक्षहोम तथा अयुत होम करने पर सद्य फलता है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है.
- पूरे श्रावण मास में जमीन पर सोना और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
- व्रत रखने वालों को सत्य बोलना चाहिए.
- भोलेनाथ की सेवाधारी को पत्तल में भोजन करना चाहिए.
- शिव मंदिर जल चढ़ाने से पहले प्रातः काल स्नान कर लेना चाहिए.
- सावन मास में शिव का ध्यान करना चाहिए.
- शिव भक्त अपने इन्द्रियों को वश में रखें.
- शिव लिंग का रुद्राभिषेक नियमित करना अत्यंत फलदायी है.
- नियमित शिव पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है.
- शिव शंकर के सामने गायत्री मन्त्र और मूल मन्त्र अर्थात “ओम नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए.
रुद्राभिषेक की सरल विधि
- उत्तरदिशा में स्थापित शिवलिंग का पूर्व की ओर मुख करके रुद्राभिषेक किया जाता है.
- शिवलिंग का शुद्ध जल या गंगाजल से जलाभिषेक करें.
- पंचामृत (दूध, दही, शहद, शक्कर, घी) समेत गन्ने के रस आदि तरल पदार्थ से अभिषेक करने का विधान है.
- रुद्राभिषेक करते समय शिवजी का पंचाक्षरी मंत्र- ॐ नम: शिवाय का जाप करते रहें.
- रुद्राभिषेक करने के बाद पुन: जलाभिषेक करें.
- शिवजी को चंदन और भस्म का लेप लगाएं.
- लेप लगाते समय महामृत्युंजय मंत्र या रुद्राष्टकम् मंत्र का जाप करें.
- पान का पत्ता, बेलपत्र सहित सभी बची हुई पूजा सामग्री अर्पित करें.
- शिवजी के पसंद का भोग लगाएं और इसके बाद 108 बार शिव मंत्र का जाप करें.
- शिव जी की आरती करना बिल्कुल भी न भूलें.
- आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरण करें.
रुद्राभिषेक पूजा सामग्री
भांग, धतूरा, बेलपत्र, दूध, दही, घृत, शहद, चीनी, अनार, ऋतुफल, भस्म, चंदन, सफेद फूल, जल का पात्र, गंगा जल, शिव भोग, प्रसाद आदि.
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