भगवान शिव के प्रति भक्ति और प्रेम व्यक्त करना है तो सावन माह में करें शिव स्त्रोत का पाठ
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Shiva Stotram Lyrics in Hindi : शिव स्त्रोत भगवान शिव के प्रति भक्ति और प्रेम व्यक्त करने का एक तरीका है. शिव स्त्रोत, भगवान शिव की महिमा का गुणगान करने वाले स्त्रोत हैं. इनमें शिव तांडव स्तोत्रम और अष्टोत्तर शतनामावली जैसे प्रसिद्ध स्त्रोत शामिल हैं. ये स्त्रोत भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए पढ़े जाते हैं, और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए इनका पाठ किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव स्त्रोत का पाठ करने से सुख, शांति, समृद्धि और मुक्ति मिलती है.
शिव जी की स्तुति
नमामीशमिशान निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद: स्वरुपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाश मकाशवासं भजेऽहम् ॥
निराकामोंकारमूलं तुरीयं गिरा ध्यान गोतीतमीशं गिरिशम ।
करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोअहम ॥
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा लासद्भाल बालेन्दु कंठे भुजंगा ॥
चलत्कुण्डलं शुभ नेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकंठ दयालम ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥
प्रचण्डं प्रकष्ठं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम ।
त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम ॥
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सच्चीनान्द दाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम।
न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥
न जानामि योगं जपं पूजा न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम्।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥
रुद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषा शंभो प्रसीदति ॥
॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥
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