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स्मार्ट वर्क को ही बेस्ट वर्क मानती है जेन-जी की युवा पीढ़ी

DB News
Last updated: 12/10/2025 12:53 PM
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9 Min Read
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 ‘ब्रो यू स्लेड इट! इट्स लेजिट,’ जब शनाया शाह ने अपने कलीग को ये कहा तो ऑफिस के बाकी सीनियर्स इसका मतलब ही सोचते रह गए। आखिर वो बोली क्या?

आजकल ऐसे कई शब्द जैसे लिट, नो कैप, लेजिट, फोमो, गोट, ब्रुह, सैवेज, लोकी जैसे शब्द Gen-Z (जेन-जी) की आम बोलचाल की भाषा बन गए हैं। इन्हें समझना डिक्शनरी में किसी कठिन अंग्रेजी शब्द के मायने खोजने जैसा है।

अब सबसे पहले जान लें कि Gen-Z क्या है। आज की युवा पीढ़ी, जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है, उसे जनरेशन-Z का टैग दिया है। Gen-Z को आमतौर पर ‘जूमर्स’ भी कहते हैं। ये ‘इंस्टाग्राम जनरेशन’ है, जो किताबों की तुलना में अपने फोन पर टाइम बिताना ज्यादा पसंद करती है। न्यूजपेपर की बजाय सोशल मीडिया पर न्यूज पढ़ना, ट्रेंडिंग मीम्स बनाना, फेस टाइम करना, यह सब Gen-Z युवाओं का लिविंग पैटर्न बन गया है।

आज के टाइम में वर्कप्लेस पर Gen-Z की संख्या काफी बढ़ रही है। ऑफिस में ज्यादातर 21-22 साल के फेलोज और ट्रेनर्स या फ्रेशर्स की हायरिंग की जा रही है। इनका काम करने का तरीका ही कुछ अलग है। जैसे बातचीत में स्लैंग लैंग्वेज यूज करना, किसी की टांग खींचना हो तो मीम भेज देना, चिल मोड में काम करना और काम करते हुए गाने सुनना।

ऑफिस में काम करने वाले सीनियर्स जो मिलेनियल या फर्स्ट जेनरेशन (1996 के पहले वाले लोग) से हैं, उन्हें Gen Z वालों के मीम या स्लैंग समझना मुश्किल लगता है।

इसलिए आज ‘वर्कप्लेस रिलेशनशिप’ में बात करेंगे Gen-Z और वर्कप्लेस पर उनके काम करने के तरीकों की। साथ ही जानेंगे कि इस जेनरेशन के लोग वर्क कल्चर को कैसे बदल रहे हैं।

Gen-Z के लिए ‘स्मार्ट वर्क ही बेस्ट वर्क’

जेनरेशन Z आज की दूसरी सबसे युवा पीढ़ी है। इस जेनरेशन के पहले पैदा हुए लोग ‘मिलेनियल्स’ कहलाते हैं। वहीं 2012 के बाद वाली जेनरेशन ‘अल्फा’ कहलाती है। हर पीढ़ी की तरह, जेनरेशन Z का बिहेवियर भी इस बात पर निर्भर करता है कि वे कैसे बड़े हुए हैं।

  • Gen-Z इंटरनेट के साथ बड़ी हुई। इसलिए भी उन्हें ‘डिजिटल नेटिव’ कहा जाता है। इस पीढ़ी के युवा बेहद ऊर्जावान हैं।
  • इन युवाओं की आंख केवल सनुहरी मछली पर ही रहती है।
  • वह कड़ी मेहनत करना सही नहीं समझते। उनके लिए स्मार्ट वर्क ही बेस्ट वर्क है। यानि शॉर्ट कट से किया गया काम।
  • ये सोशल मीडिया एडिक्ट हैं। लाइफ के हर अपडेट स्नैपचैट पर शेयर करना इन्हें पसंद है।
  • ये इंस्टाग्राम फ्रेंडली हैं और हर दिन स्टोरीज-रील्स अपलोड करते रहते हैं।

इसी को लेकर अमेरिका के पिता-पुत्र की जोड़ी डेविड और जोनाह स्टिलमैन ने Gen-X और Z पर एक किताब लिखी है- “Gen Z@ वर्क: हाउ द नेक्सट जेनरेशन इज ट्रांसफॉर्मिंग द वर्कप्लेस।“ इस किताब में बताया गया है कि इस आने वाली पीढ़ी को क्या प्रेरित करता है और वो आज के वक्त से क्या चाहते हैं।

वर्क–लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता देते Gen-Z युवा

वैश्विक स्तर पर जेनरेशन Z तेजी से बढ़ रही है। 2025 तक ये एशिया की आबादी का एक चौथाई हिस्सा होंगे। इंटरनेट की इस दौड़ती-भागती दुनिया में इस जेनरेशन के बच्चे भी काफी एडवांस हो गए हैं।

वर्कप्लेस को कैसे बदल रहे हैं Gen-Z

Gen-Z सिर्फ सोशल मीडिया, रील्स, स्नैपचैट तक ही सीमित नहीं हैं। यह हेल्थ, करियर और ट्रैवल को भी उतनी ही प्राथमिकता देते हैं। ये जेनरेशन स्मार्ट तरीके से करियर ग्रोथ और सेल्फ डेवेलपमेंट में यकीन रखती है। इसी यकीन के साथ वो ऑफिस में भी अपनी ग्रोथ पर ज्यादा फोकस करते हैं। जैसे नए अवसर की तलाश, कैसे अच्छी सैलेरी मिल सके, कैसे वो नया मुकाम हासिल कर सकें।

नीचे पॉइंटर्स में जानें कि वर्कप्लेस पर जेन-Z कैसे बदलाव ला रहे हैं-

  • US ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, Gen-Z वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा बनने जा रहा है।
  • वर्कप्लेस की बात करें तो इस जेनरेशन के लोगों की ऑफिस और उसके वर्किंग एनवायरमेंट से बहुत एक्सपेक्टेशंस हैं।
  • जैसे कूल और मीम कल्चर फॉलो करना, अपनी बातों को सोशल मीडिया मीम के अनुसार कहना।
  • किसी की तारीफ या मजाक में भी मीम का जिक्र करना। बड़े वाक्यों की जगह स्लैंग का यूज करना।
  • ये जेनरेशन ओवरटाइम में यकीन नहीं रखती। उनके अनुसार ये बिल्कुल गलत है। उनका मानना है, जितनी सैलरी उतना काम।
  • किसी की मदद लेने की बजाय ज्यादातर Gen-Z अपनी मदद खुद करना पसंद करते हैं।
  • वे किसी भी समस्या के बारे में ऑनलाइन सर्च करके खुद समाधान निकालने की कोशिश करते हैं।

Gen-Z मिलेनियल से कैसे अलग

जेनरेशन Z जिसे जिलेनियल भी कहा जाता है, यह मिलेनियल से काफी अलग हैं। नीचे दिए ग्राफिक में जानें दोनों जेनरेशन में क्या अंतर है-

जॉब सिक्योरिटी Gen-Z का पहला प्रिफरेंस

Gen-Z अपनी जॉब सिक्योरिटी को पहले प्राथमिकता देते हैं। वे चाहते हैं कि जॉब में उनकी स्टेबिलिटी बनी रहे। उन्हें नए रोल्स मिलते रहें। लेकिन इसके साथ ही इस जेनरेशन को इंक्रीमेंट के वक्त हाइक और प्रमोशन की भी पूरी उम्मीद रहती है। इनसाइड आउट डेवेलपमेंट (Insideout Development) की एक स्टडी के मुताबिक-

  • 75% का मानना ​​है कि प्रमोशन पाने से पहले उन्हें केवल एक साल के लिए ही अपने पहले पद पर काम करना चाहिए।
  • 32% का मानना ​​है कि काम करने के पहले 6 महीनों के अंदर ही वे प्रमोशन के लायक हो जाते हैं।
  • 75% का कहना है कि ऐसा बॉस होना जरूरी है, जो कर्मचारियों को ट्रेन कर सके।
  • वे ऐसे बॉस को भी बहुत महत्व देते हैं, जो लगातार फीडबैक दे।
  • Gen-Z हर नई अपॉर्चुनिटी के लिए तैयार रहते हैं। अगर उन्हें कोई नया रोल दिया जाए तो वो उसे बखूबी निभाते हैं।
  • वे वर्क-लाइफ बैलेंस को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। उनके लिए अपने परिवार और दोस्तों से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं।
  • इसलिए वे वहां काम करना पसंद करते हैं, जहां छुट्टियां आसानी से मिलें। अगर नहीं मिलतीं तो उन्हें अपने हक के लिए लड़ना भी आता है।
  • 80% का मानना ​​है कि उन्हें अपने सपनों की नौकरी पाने के लिए कम-से-कम स्नातक की डिग्री की जरूरत है।
  • लगभग 70% लोगों का मानना ​​है कि आरामदायक लाइफस्टाइल के लिए उन्हें कम-से-कम स्नातक की डिग्री चाहिए होगी।
  • ये जनरेशन गेम एडिक्टेड है और ऑनलाइन गेम का शौक रखती है। काम के बीच ब्रेक लेने का भी इनका यही तरीका है।

AI, चैट-GPT जेनरेशन-Z के बाएं हाथ का खेल

2023 में AI ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया। इसमें कोई शक नहीं कि लोगों में इस तकनीक को लेकर उत्साह और चिंता दोनों है। बहुत से लोग AI टूल पर भरोसा नहीं करते और कुछ लोग उनका इस्तेमाल करने में सहज नहीं होते। लेकिन Gen-Z के लिए यह बाएं हाथ का खेल है।

ये जेनरेशन AI और ChatGPT को काम करने का सबसे आसान प्लेटफॉर्म मानती है। साथ ही Google Bard और Bing AI Chat भी इनके पसंदीदा हैं। वे इन टूल का अक्सर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा, वे इनके आउटपुट को लेकर कॉन्फिडेंट रहते हैं।

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