महाशिवरात्रि के दूसरे दिन भगवान महाकाल का सेहरा सजाया गया है. वर्ष में एक बार भगवान महाकाल सेहरा सजाते हैं और भक्त भगवान के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.
Source : MEDIA
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Ujjain Mahakal Mandir: उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में महाशिवरात्रि के दूसरे दिन भगवान महाकाल को दूल्हे की तरह सजाया जाता है. भगवान का सेहरा सजाकर उनका शृंगार किया जाता है. इसके लिए सप्तधान अर्थात् अलग-अलग प्रकार के धान, देश-विदेश से आए फूलों का उपयोग किया जाता है.
साल में एक बार होता है ऐसा श्रृंगार
वैसे तो भगवान महाकालेश्वर के प्रतिदिन अलग-अलग शृंगार किए जाते हैं, लेकिन सेहरा सजाकर दूल्हे के रूप में भगवान वर्ष में एक बार ही दर्शन देते हैं. महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी के अनुसार, साल भर में एक बार भगवान महाकाल का सेहरा सजाया जाता है. इसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से शिव भक्त उज्जैन पहुंचते हैं. महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के सेहरे की आरती की गई.
दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं होती हैं पूरी
ऐसी मान्यता है कि दूल्हे स्वरूप के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. महाकालेश्वर मंदिर के महेश पुजारी ने बताया कि भगवान महाकाल के सेहरे की सजावट के लिए पंडित और पुरोहितों द्वारा कई घंटे तक मेहनत की जाती है.
महाशिवरात्रि के अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में भस्म आरती नहीं होती, बल्कि भगवान दूल्हे के रूप में सभी को दर्शन देते हैं और ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली भस्म आरती दोपहर 12:00 बजे होती है.
इसलिए गुरुवार दोपहर 12:00 बजे भस्म आरती होगी. इसके बाद महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व का समापन होगा.
बाबा का पंच मुखौटे से होता है विशेष श्रृंगार
महाशिवरात्रि के बाद बाबा महाकाल का पंच मुखौटे में विशेष श्रृंगार किया जाता है. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकाल के दर्शन करते हैं. महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व शिव नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और भस्म रमाने वाले बाबा महाकाल को दूल्हा बनाया जाता है. रोज 9 दिन तक अलग-अलग रूपों में बाबा महाकाल का श्रृंगार किया जाता है, ऐसे में बाबा महाकाल के 9 रूप के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है.
साल मे एक दिन ही क्यों होता है यह श्रंगार?
महाकाल मंदिर के पुरारी की मानें तो महाकाल की ऐसी मान्यता है कि इन 9 दिनों तक महाकाल के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. महाशिवरात्रि के बाद महाकाल का पंच मुखौटे में श्रृंगार किया जाता है. मान्यता है कि ऐसे लोग जो शिव नवरात्रि में दर्शन नहीं कर पाए और अगर बाबा महाकाल के पंच मुखौटे के दर्शन कर लेते हैं तो उन्हें शिव नवरात्रि के सभी दर्शनों का फल मिलता है. इसलिए इस दिन यह पंच मुखोटो के दर्शन करने श्रद्धांलु देश-विदेश से आते है.
3 किवंटल फूलों से सजा महाकाल का दरबार
महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल के 44 घंटे लगातार पट खुले रहते हैं. अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेते हैं. इस साल 7 लाख से अधिक श्रद्धलुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए.फरवरी में महाकाल दूल्हा बनने के बाद बाबा के सेहरे की तैयारी के लिए खास फूलों की व्यवस्था की गई. महाकाल के दूल्हे के रूप में श्रृंगार के लिए 3 किवंटल फूल लगते हैं. जिसमें 100 किलो आंकड़े के फूल, सवा लाख बेल पत्र, 200 किलो देसी फूल से 11 फीट का सेहरा बनाया गया. बता दें कि महाशिवरात्रि पर्व पर महाकाल के आंगन को फूलों से सजाया जाता है. बेंगलोर, थाईलैंड और इंडोनेशिया के विशेष विदेशी फूलों से सजाने के लिए 5 से अधिक कारीगर बेंगलोर से हर साल आते हैं. बेंगलोर के रहने वाले कृष्ण रेड्डी हर साल बाबा महाकाल के दरबार को विदेशी और देशी फूलों से निशुल्क सजवाते हैं. उनका मानना है कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद है इसलिए इस सेवा का मौका मिलता है.
सांध्य आरती तक हुए बाबा महाकाल के पंचमुखौटा दर्शन
बताया जाता है कि आज ही वह शुभ दिन है जब भगवान शिव ने चन्द्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया था. श्री महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि संध्या पूजन के बाद पुजारियों ने भगवान का एक साथ पांच रूपों में श्रृंगार किया था. जिसके बाद भक्तों को शयन आरती तक पंचमुखारविंद के दर्शन हुए.

