डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं. उन्होंने का हम भी उस पर उतना ही टैरिफ लगाएंगे.
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
India over Tariff Cut: भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार शुल्क के मोर्चे पर किसी भी तरह की प्रतिबद्धता नहीं जताई है. इस दौरान कई सांसदों ने बर्थवाल से अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता पर सवाल पूछे. बर्थवाल ने संसदीय समिति से कहा कि व्यापार वार्ता के दौरान भारत के हितों का ध्यान रखा जाएगा. भारत मुक्त व्यापार के पक्ष में है और व्यापार का उदारीकरण चाहता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि भारत अपने टैरिफ में कटौती करने के लिए तैयार हो गया है. ट्रंप के इस बयान पर भारत ने कहा कि अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है. इसको लेकर बातचीत जारी है. वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने सोमवार को संसदीय समिति को इस बारे में जानकारी दी.
सूत्रों के मुताबिक, बर्थवाल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावों के बारे में विदेश मामलों की संसदीय समिति को बताया कि भारत अपने शुल्क को ‘काफी कम’ करने के लिए सहमत हो गया है. वहीं विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने चीन और यूरोप से संबंधित घटनाक्रम के बारे में संसदीय समिति को जानकारी दी.
दोनों देशों के बीच बातचीत जारी: वाणिज्य सचिव
भारत के सीमा शुल्क कम करने पर सहमति जताए जाने वाले ट्रंप के दावे पर कई सांसदों ने चिंता जताई. इस पर वाणिज्य सचिव ने कहा कि कोई व्यक्ति इन दावों और मीडिया रिपोर्टों पर भरोसा नहीं कर सकता है क्योंकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत अभी भी जारी है.
अधिकांश उत्पादों पर उच्च शुल्क के साथ-साथ एंटी-डंपिंग या प्रतिकारी शुल्क लगेगा
पीएम मोदी ने सोमवार को अहमदाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा. अमेरिकी सीमा शुल्क अधिसूचना में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत से आने वाले अधिकांश उत्पादों पर उच्च शुल्क के साथ-साथ एंटी-डंपिंग या प्रतिकारी शुल्क जैसे अन्य लागू शुल्क भी लगेंगे, तथापि कुछ वस्तुओं को इससे बाहर रखा गया है.
यह अमेरिकी टैरिफ अनुसूची में अलग से सूचीबद्ध कुछ उत्पादों पर लागू होता है. लोहे और इस्पात से बनी वस्तुओं, जिनमें उनके कुछ व्युत्पन्न उत्पाद भी शामिल हैं, पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा. यही बात एल्युमीनियम उत्पादों और उनके उत्पादित प्रोडक्ट्स पर भी लागू होती है. संक्षेप में, 50 प्रतिशत टैरिफ मोटे तौर पर भारतीय आयात पर लागू होता है, लेकिन लोहा, इस्पात, एल्युमीनियम, वाहन, पुर्जे और तांबे के उत्पादों जैसी प्रमुख श्रेणियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है.
अमेरिकी बाजार में शुल्क मुक्त प्रवेश करता रहेगा
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात का लगभग 30.2 प्रतिशत, जिसका मूल्य 27.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, उच्च टैरिफ लगाए जाने के बावजूद अमेरिकी बाजार में शुल्क मुक्त प्रवेश करता रहेगा. इसमें फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिफाइंड लाइट ऑयल, गैसोलीन, विमानन टरबाइन ईंधन और अन्य शामिल हैं.
फार्मास्यूटिकल्स का हिस्सा सबसे बड़ा है, जो 12.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसमें कैंसर की दवाएं, प्रतिरक्षा दमनकारी, हृदय संबंधी, मधुमेह विरोधी और दर्द निवारक दवाएं सहित दवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है. वहीं, 8.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात, जैसे स्मार्टफोन, स्विचिंग और रूटिंग उपकरण, एकीकृत सर्किट, चिप्स, वेफर्स और सॉलिड-स्टेट स्टोरेज डिवाइस को भी छूट दी गई है.
अमेरिकी डॉलर मूल्य के प्लास्टिक शामिल
अन्य शुल्क-मुक्त श्रेणियों में 3.29 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के रिफाइंड लाइट ऑयल, गैसोलीन और विमानन टरबाइन ईंधन, 165.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की पुस्तकें और ब्रोशर, तथा 155.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के प्लास्टिक शामिल हैं. जहां कुछ व्यापार और उद्योग जगत के नेताओं ने अल्पकालिक व्यवधानों की चेतावनी दी, वहीं अन्य ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का मजबूत विनिर्माण आधार, विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्रों में, उसे इस प्रभाव का सामना करने और नई व्यापार साझेदारियां बनाने में मदद करेगा.
30 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी
इससे पहले 30 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “याद रखें, भारत हमारा मित्र है, लेकिन हमने पिछले कुछ वर्षों में उनके साथ अपेक्षाकृत कम व्यापार किया है, क्योंकि उनके टैरिफ बहुत अधिक हैं, जो विश्व में सबसे अधिक हैं, तथा उनके पास किसी भी देश की तुलना में सबसे कठोर और अप्रिय गैर-मौद्रिक व्यापार बाधाएं हैं.”

