चैत्र नवरात्रि की महानवमी यानी राम नवमी पर रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है. ऐसे में इस दिन खरीदारी और नए कार्य की शुरुआत करना बेहद शुभ फलदायी होगा.
Source : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Ram Navami 2025, Shubh Muhurat: राम नवमी भगवान राम के जन्म का सम्मान करने , धर्म की विजय का प्रतीक बनने और उनकी शिक्षाओं को याद करने का दिन है. राम नवमी मनाते हुए, आइए हम शांति, प्रेम और भक्ति का प्रसार करें और अपने दैनिक जीवन में धर्म के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करें. भगवान राम का आशीर्वाद हमें सद्गुण के मार्ग पर मार्गदर्शन करे. 6 अप्रैल 2025 को राम नवमी पर इस साल रवि पुष्य पुष्य नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है. राम नवमी पर पुष्य नक्षत्र का होना लाभदायक माना गया है. इस दौरान नए कार्य की शुरुआत, खरीदारी करने वालों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
कब है शुभ मुहूर्त?
रवि पुष्य योग 6 अप्रैल 2025 को सुबह 06:05 से 7 अप्रैल को 6.04 बजे तक रहेगा यानी राम नवमी का पूरा दिन खरीदारी और नए कार्य की शुरुआत के लिए शुभ है.
इनके लिए है अनुकूल
- रवि पुष्य नक्षत्र जीवन में स्थिरता और अमरता लेकर आता है. इसलिए इस दिन रियल एस्टेट में निवेश, नए बिजनेस के शुरुआत करने पर लंबे समय तक शुभ परिणाम मिलते है. माना जाता है कि इस योग के दौरान ग्रहों की ऊर्जा संपत्ति से संबंधित बिजनेस के लिए अनुकूल होता है.
- सोना खरीदना, प्रॉपर्टी और वाहन आदि की खरीदारी, गाय माता को गुड़ खिलाना, मंदिर में दीपक जलाना आदि घर में बरकत लाता है. धन आगमन के रास्ते खुलते हैं.
- राम नवमी पर रवि पुष्य योग बन रहा है. ऐसे में धातु से जुड़ी वस्तु खरीदना शुभ होगा, खासकर सोना या पीतल, क्योंकि ये बृहस्पति को मजबूत करते हैं और मां लक्ष्मी घर में स्थाई रूप से निवास करती हैं.
दान-स्नान का विशेष महत्व
रवि पुष्य योग में किए गए दान, स्नान, पूजा-पाठ और जप-तप का विशेष महत्व होता है, इस दिन नवीन बही खाते या लेखन सामग्री को शुभ मुहूर्त में खरीदकर उन्हें अपने व्यापारिक स्थल पर स्थापित करना चाहिए.
राम नवमी क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
राम नवमी भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के जन्म का प्रतीक है , जिन्हें सत्य, धर्म और नैतिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा के लिए पूजा जाता है. यह हिंदू पंचांग के चैत्र महीने की नौवीं तिथि (नवमी) को चैत्र नवरात्रि के दौरान पड़ती है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम का जन्म अयोध्या में मध्याह्न काल (दोपहर) के दौरान हुआ था , जिसे राम नवमी पूजा करने का सबसे पवित्र समय माना जाता है.
रम नवमी की मुख्य विशेषताएं
- राम नवमी चैत्र नवरात्रि (9वें दिन) के दौरान मनाई जाती है.
- यह अयोध्या में भगवान राम के जन्म का प्रतीक है.
- दोपहर (मध्यना) पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय है.
- भारत भर में उपवास, भजन, रामायण पाठ और मंदिर दर्शन के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व है.
राम नवमी दो बार क्यों मनाई जाती है?
विभिन्न परंपराओं के कारण राम नवमी कभी-कभी दो बार मनाई जाती है. एक बार इसे वैष्णव राम नवमी के रूप में 26 मार्च, 2026 को मनाया जाता है , और दूसरी बार इसे शैव राम नवमी के रूप में 27 मार्च, 2026 को मनाया जाता है.
राम नवमी का उत्सव
राम नवमी के अवसर पर मंदिर भक्तों से भरे रहते हैं, जो प्रार्थना करते हैं और मंत्रों, भजनों और रामायण के श्लोकों का पाठ करते हैं. उत्सव की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं-
रामायण का पाठ : भगवान राम के जीवन और शिक्षाओं की कहानी सुनना.
रथ यात्रा : भगवान राम की मूर्ति को भव्य रूप से सजाए गए रथों पर जुलूस के रूप में निकाला जाता है.
भक्तिमय गायन : भगवान राम के सम्मान में गाए जाने वाले भजन और कीर्तन.
उपवास : कई भक्त उपवास रखते हैं, जिनमें से कुछ पूजा करने के बाद उपवास तोड़ते हैं.
पनाकम (एक मीठा पेय) और नीर मोर (छाछ) जैसी विशेष मिठाइयाँ मित्रों, परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों में वितरित की जाती हैं.
भगवान राम का जन्म और विरासत
श्री राम नवमी का सही अर्थ समझने के लिए, हमें सर्वप्रथम भगवान राम की आकर्षक कथा को समझना होगा. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम का जन्म प्राचीन शहर अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर हुआ था. माना जाता है कि उनका जन्म हजारों वर्ष पूर्व त्रेता युग में हुआ था, जो सद्गुण और धर्मपरायणता का युग था.
भगवान राम के जीवन की कहानी ऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित महाकाव्य रामायण में दर्ज है। इसमें राम, उनकी पत्नी सीता और उनके वफादार साथी हनुमान की यात्रा का वर्णन है, जिसमें उन्होंने अनेक परीक्षाओं और कठिनाइयों का सामना किया. वनवास से लेकर राक्षस राजा रावण के विरुद्ध महायुद्ध तक, भगवान राम साहस, करुणा और धर्मनिष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं.
राम नवमी वह शुभ दिन है जब भगवान राम ने पृथ्वी पर अवतार लेकर संसार से बुराई का उन्मूलन किया और धर्म की स्थापना की. उनका जीवन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो सम्मान, त्याग और समस्त प्राणियों के प्रति प्रेम के मूल्यों का प्रतीक है.
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