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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > तांत्रिक क्रिया सिद्ध करने के लिए तीसरा प्रहर उपयुक्त, करें पूजा-आराधना!
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तांत्रिक क्रिया सिद्ध करने के लिए तीसरा प्रहर उपयुक्त, करें पूजा-आराधना!

DB News
Last updated: 21/09/2025 10:38 PM
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4 Min Read
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8 प्रहर में से छठे प्रहर बिल्कुल भी न करें मांगलिक कार्य, जाने क्या है वजह…

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा / Edited By : प्रिंस अवस्थी

Contents
8 प्रहर में से छठे प्रहर बिल्कुल भी न करें मांगलिक कार्य, जाने क्या है वजह…कौन से हैं 8 प्रहर?1- पहला प्रहर2-दूसरा प्रहर3-तीसरा प्रहर4-चौथा प्रहर5- पांचवा प्रहर6- छठा प्रहार7- सातवां प्रहर8- आठवां प्रहर

Navratri Kalash Ghatasthapna Muhurat: हिंदू पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि का पर्व अाज 22 सितंबर 2025 से प्रारंभ हो रहा है. इन पावन दिनों में भक्तजन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. दुर्गा पाण्डाल और घरों में कलश स्थापना से लेकर माता की चौकी का आयोजन किया जाता है. कई भक्त दुर्गा स्वरूपों की आराधना तो करते हैं, लेकिन उन्हें मां दुर्गा की पूजा-पाठ और तांत्रिक क्रिया करने का सही समय नहीं मालूम हाेता है, जिसके कारण भक्त को फल की प्राप्ति नहीं होती है. शास्त्राें में भगवती की आराधना करने का मुहूर्त और उनकी कृपा पाने के उपाय बतलाए गए हैं. यदि कोई भगवती की पूजा और तांत्रिक क्रिया करता है तो उसके मनोकामना की पूर्ति होती है. आइए जानते हैं दिन के आठ प्रहर में से कौन से प्रहर में तांत्रिक क्रिया करने से मन की इच्छा के अनुरूप फल की प्राप्ति होती है?

कौन से हैं 8 प्रहर?

1- पहला प्रहर

शाम के 6 बजे से लेकर रात्रि 9 बजे तक का समय पहला प्रहर होता है, जिसे लोग प्रदोष काल के नाम से भी जानते हैं. इस प्रहर देवी-देवताओं की पूजा करना बेहद ही शुभ माना जाता है.

2-दूसरा प्रहर

रात्रि के 9 बजे से लेकर रात्रि 12 बजे तक का समय दूसरा प्रहर कहलाता है. यह समय खरीददारी के लिए शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान पेड़-पौधों को छूने से बचना चाहिए.

3-तीसरा प्रहर

रात्रि के 12 बजे से 3 बजे तक के समय को तीसरा प्रहर कहा जाता है, जिसे लोग निशिथकाल के नाम से भी जानते हैं. इस प्रहर के दौरान लोग तामसिक और तांत्रिक क्रियाएं करते हैं.

4-चौथा प्रहर

प्रात: 3 बजे से लेकर 6 बजे तक का समय चौथा प्रहर कहलाता है. यह रात्रि का अंतिम प्रहर होता है. इसलिए इसका खास महत्व होता है. इसे लोग ऊंचा काल के नाम से भी जानते हैं.

5- पांचवा प्रहर

सुबह 6 बजे से लेकर 9 बजे तक के समय को पांचवा प्रहर कहा जाता है. यह दिन का पहला प्रहर होता है इस दौरान पूजा-पाठ करना अच्छा माना जाता है.

6- छठा प्रहार

प्रात: 9 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक का समय छठा प्रहर कहलाता है. इस प्रहर में मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं.

7- सातवां प्रहर

दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 3 बजे तक का समय सातवां प्रहर कहलाता है. इस दौरान शुभ कार्य करना अच्छा होता है.

8- आठवां प्रहर

शाम 3 बजे से लेकर 6 बजे तक का समय दिन का आखिरी और आठवां प्रहर होता है. इस दौरान भूलकर भी सोना नहीं चाहिए.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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