दिवाली का शुभ मुहूर्त आज 20 अक्टूबर को ही है, जानें पूजन विधि, मंत्र, उपाय और आरती से जुड़ी समस्त जानकारी.
By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Diwali 2025 Laxmi Puja Muhurat : हिंदू पंचांग के अनुसार दीपावली का त्योहार आज 20 अक्टूबर को है. दिवाली की रोनक भी अब लगभग देशभर में देखने को मिल रही है, लेकिन फिर भी लोगों के मन में असमंजस की स्थिति है. दिवाली 20 अक्टूबर को है या 21 अक्टूबर को. बता दें कि, दिवाली 20 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी. क्योंकि 20 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि रहेगी, जोकि लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ होती है. 21 अक्टूबर को दिवाली नहीं मनाने का प्रमुख कारण यह है कि, कार्तिक अमावस्या की तिथि 21 अक्टूबर को शा 05:55 पर समाप्त हो जाएगी. भले ही 21 अक्टूबर को उदयातिथि रहेगी, लेकिन प्रदोष काल में पूजा का मुहूर्त नहीं रहेगा. इसलिए 20 अक्टूबर 2025 को ही देशभर में दिवाली मनाई जाएगी और इसी दिन लक्ष्मी-गणेश जी का पूजन भी किया जाएगा.
यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए उत्तम
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा के अनुसार आज 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर अमावस्या तिथि लग जाएगी और अगले दिन यानी 21 अक्टूबर शाम 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगी. शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक का समय लक्ष्मी पूजन के लिए उत्तम है.
दिवाली पूजा के लिए मां लक्ष्मी और गणेश जी की एक साथ वाली जुड़ी हुई मूर्ति नहीं खरीदनी चाहिए. दिवाली पूजा के बाद घर में रखने के लिए लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा अलग-अलग होनी चाहिए. आप अलग-अलग मूर्ति लाकर एक साथ पूजा कर सकते है.
पूजा के लिए 3 शुभ मुहूर्त
गणेश-लक्ष्मी पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त – शाम 07:08 से लेकर 08:18 बजे तक
प्रदोष काल की पूजा का शुभ मुहूर्त – शाम 05:46 से लेकर रात्रि 08:18 बजे तक
वृषभ काल की पूजा का शुभ मुहूर्त – शाम 07:08 से लेकर रात्रि 09:03 बजे तक
इन चीजों का अवश्य लगाएं भोग
केसर का खीर
सिंघाडे का भोग
नारियल, ईख, अनार,
मिठाई, लड्डू
पान और मखाना
पूजा के लिए जरूरी सामग्री
गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र, गंगाजल, जनेऊ, लाल-पीला कपड़ा, चौकी, आसन, कलश दो, मिट्टी का दीपक, लड्डू, फल, घी, अक्षत, पान, सुपारी, नारियल, आम के पत्ते, पान के पत्ते, दूर्वा घास, केसर, लौंग, बाती, माचिस, साबुत धनिया, कौड़ी, भगवान के वस्त्र या चुनरी, फूल, कमल के फूल, पंचमेवा, धूप, अगरबत्ती, कलावा, जल पात्र, गट्टे, खील-बताशे, सिंदूर, कुमकुम, चांदी सिक्का, कुबेर यंत्र आदि.
इन जीवों को देखना शुभ
दीपावली के दिन घर में या आस-पास छिपकली, छछूंदर या काली चींटियों का दिखाई देना शुभ माना गया है. इनके देखने से यह संकेत होता है कि धन की देवी लक्ष्मी आपसे प्रसन्न हैं और आपके घर धन-वृद्धि होने वाली है.
दिवाली पूजा में जरूर करें लक्ष्मी, गणेश जी की आरती (Lakshmi Ganesh Ki Aarti):-
लक्ष्मी जी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन * सेवत हरि विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता-2
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता-2
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता-2
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता
ॐ जय लक्ष्मी माता-2
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता
ॐ जय लक्ष्मी माता-2
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता
ॐ जय लक्ष्मी माता-2
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
भगवान गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत,चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
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