बिहार चुनाव में अब एनडीए के दल नई सरकार की कवायद में जुट गए हैं. रविवार को बैठकों के दौर जारी रहा और अब शपथ ग्रहण की तैयारियां तेज हो गई हैं.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Bihar News: बिहार में नई सरकार बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है. विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत मिली है. इसी के साथ अब नई सरकार बनाने की तैयारी भी जोरशोर से की जा रही है. बिहार सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से एक पत्र जारी किया गया है. नीतीश सरकार के विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि निदेशानुसार पटना के मुख्य सचिवालय स्थित मंत्रिमंडल कक्ष में सोमवार यानी 17 नवंबर को सुबह 11:30 बजे से मंत्रिपरिषद की बैठक होगी.
इस पत्र में कहा गया है कि बिहार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक से अनुरोध है कि मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद सूचना भवन का सभागार उपलब्ध कराते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की समुचित व्यवस्था कराने की कृपा की जाए.
आज बैठकों का दौर जारी रहा
आज रविवार (16 नवंबर) को बैठकों का दौर जारी रहा. निर्वाचन आयोग की तरफ से राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को सभी 243 विधायकों की लिस्ट सौंप दी गई. वहीं अब सोमवार (17 नवंबर) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है.
सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार सुबह 11:30 बजे कैबिनेट बैठक बुलाई है, जिसमें मंत्रिमंडल भंग करने के फैसले पर मुहर लगेगी. वहीं कैबिनेट की मीटिंग के तुरंत बाद नीतीश कुमार राजभवन जाएंगे और राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे. इसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी.
गांधी मैदान आम लोगों के लिए बंद
वहीं इससे पहले 17 नवंबर से 20 नवंबर तक चार दिन गांधी मैदान, पटना बंद रहेगा. इस दौरान आम लोगों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. गांधी मैदान को शपथ ग्रहण समारोह के लिए तैयार किया जाएगा.
शपथ ग्रहण समारोह की तारीख आई सामने
सूत्रों के मुताबिक बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 19 या 20 नवंबर को हो सकता है. ये समारोह गांधी मैदान में होगा, जिसमें पीएम मोदी और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं.
गठबंधन बदलने की राजनीति के कारण नीतिश कुमार मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री पद से 10 बार इस्तीफा दे चुके हैं. इन रिकॉर्ड्स के साथ-साथ उनके शासन में कानून-व्यवस्था, सड़क, बिजली, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व कीर्तिमान बदलाव किए हैं.
रेल मंत्री पद से नीतीश का पहला इस्तीफा
नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहा है. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वे 19 मार्च 1998 को रेल मंत्री बने. 2 अगस्त 1999 को पश्चिम बंगाल के गैसाल स्टेशन पर अवध-असम एक्सप्रेस और ब्रह्मपुत्र मेल की भयानक टक्कर हुई. इसमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए. नीतीश कुमार ने घटना स्थल पर पहुंच कर 3 अगस्त 1999 को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया. यह इस्तीफा भारतीय राजनीति में नैतिकता का उदाहरण बन गया. रेल मंत्री के रूप में उन्होंने इंटरनेट टिकट बुकिंग, तत्काल योजना और रिकॉर्ड टिकट काउंटर शुरू किए थे. यह उनका पहला बड़ा इस्तीफा था, जो बाद में CM पद पर भी उनकी नैतिक जिम्मेवारी वाली छवि का आधार बना. नीतीश ने हमेशा कहा है कि राजनीति में स्थिरता जरूरी है, लेकिन जनता की भलाई के लिए गठबंधन बदलना पड़ता है. यह रणनीति उन्हें पलटू राम (पाला बदलने वाले का उपनाम) भी बनाती रही.
अब एक बार फिर चर्चा में
नीतीश कुमार एक बार फिर चर्चा में बने हुए हैं. क्योंकि उन्होंने बिहार के सीएम की कुर्सी से त्यागपत्र दे दिया है. राज्यसभा का चुनाव जीतने के बाद विधान परिषद की सदस्यता से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. 10 अप्रैल को वे राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेंगे. शपथ के पूर्व संभवतः वे सीएम पद से भी इस्तीफा दे देंगे. विलंब हुआ तो शपथ के बाद जरूर इस्तीफा देंगे. मात्र 10 दिनों के अंदर उनका यह दूसरा इस्तीफा होगा. वैसे भी नीतीश कुमार के इस्तीफा देने का वैसा ही रिकार्ड रहा है, जैसा उन्होंने सीएम पद की शपथ का कीर्तिमान बनाया है. पहली बार उन्होंने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था. उसके बाद इस्तीफा देने और शपथ ग्रहण का उनका लंबा इतिहास रहा है. शायद इसीलिए जेडीयू के प्रवक्ता और पूर्व मंत्री नीरज कुमार बड़े गर्व के साथ कहते हैं कि नीतीश कुमार का इस्तीफा कोई नई बात नहीं है. बिहार में सुशासन बाबू के नाम से मशहूर रहे नीतीश कुमार राजनीति के अनोखे और लंबे सफर वाले नेता हैं. 1 मार्च 1951 को जन्मे जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की अब तक 10 बार शपथ ली है. करीब 25 साल (2000 से 2025 तक) के सियासी सफर में उनके इस रिकॉर्ड को गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने भी मान्यता दी है.

