नगर निगम ने नगरीय प्रशासन विभाग को विधानसभावार निर्माण का आंकड़ा भेजा, लेकिन हकीकत में यहां के रहवासी हो रहे परेशान, गली-कूचे तो दूर मुख्य बाजारों तक से नदारद हो गए टॉयलेट
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Swachh Bharat Mission News: स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में 14000 शौचालय बनवाए गए थे. जिन पर करीब 68 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. लेकिन शहर की गली-कूचे तो दूर, मुख्य बाजारों से भी टॉयलेट नदारद हो चुके हैं. घर से बाहर निकलने वालों को कई किलोमीटर तक भटकना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है. शहर में अभी भी गंदगी का आलम है. आश्चर्य की बात यह है कि स्वच्छता के नाम पर हर साल करोड़ों का भ्रष्टाचार करने वाले निगम अधिकारियों की कोई जांच नहीं हो रही है. आर्थिक अपराध और लोकायुक्त जैसे विभाग भी मौन हैं.
गरीब बस्तियों के शौचालय बरबाद
शहर को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए नगर निगम ने गरीब बस्तियों में भी शौचालयों का निर्माण करवाया था, लेकिन ज्यादातर मेंटेनेंस न होने के कारण बरबाद हो गए हैं. कुछ तो घटिया निर्माण के कारण जमींदोज हो गए और कुछ शौचालयों के दरवाजे और पानी की टंकी-नल कनेक्शन पर नशेड़ियों की नजर पड़ गई, जिसके कारण बेकाम के हो गए. ऐसे शौचालयों की ओर न तो नगर निगम के जिम्मेदारों द्वारा ध्यान दिया जा रहा है और न ही इस दिशा में किसी की काम करने मंशा दिखाई पड़ रही है.
हजार भी नहीं बचे होंगे
नगर निगम जोन कार्यालय के अंतर्गत जहां भी गंदी बस्ती थी, वहां शौचालय बनाने का टारगेट बनाकर सभी जोन अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में शौचालय निर्माण कराया था. इसी वजह ये शौचालयों की संख्या करीब 15 हजार पहुंच गई थी, लेकिन साल दो साल बीतते ही सही सलामत शौचालयों की संख्या एक हजार भी नहीं बची, क्योंकि जोन अिधकारियों ने उनकी देखरेख का जिम्मा ही नहीं लिया.
शौचालय को लेकर हर जगह परेशानी
शहर में जितने भी शौचालय बनाए गए, वे आम नागरिकों के काम नहीं आ सके. इतना ही नहीं, जहां भी शौचालय बनाए गए, वहां दबंगों का कब्जा हो गया या फिर नगर निगम अिधकारियों की अनदेखी की वजह से बरबादी की कगार पर पहुंच गए. इस कारण बाजार आने वाले लोग परेशान हैं. नवरात्रि पर्व और दशहरा चल समारोह के दौरान भी शौचालय न होने के कारण लोगों की परेशानी देखने मिली.
कई किलोमीटर भटकना पड़ता है
फुहारा, गढ़ाफाटक, लॉर्डगंज जैसे क्षेत्रों में लोगों को यूरिनल के लिए भी डेढ़ से दो किलोमीटर तक भटकना पड़ रहा है. दरअसल स्वच्छता सर्वेक्षण के चक्कर में नगर निगम ने शहर के ज्यादातर पुराने शौचालय और यूरिनल तोड़ दिए हैं, लेकिन उन्हें दोबारा नहीं बनाया जा सका. इस वजह से जनता परेशान हो रही है. विशेष तौर से महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अभी शहर में सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की संख्या 96 है. वहीं यूरिनल मात्र 6 हैं.
कहां पर कितने टॉयलेट बनाए गए
- कैंट विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत नगर निगम जोन कार्यालय 10, 11 और 7 में करीब 3380 शौचालयों का निर्माण कराया गया था.
- पश्चिम विधानसभा के अंतर्गत जोन क्रमांक-1, 2, 3, 4 और 13 के अंतर्गत 4743 शौचालय बनाए गए थे.
- विधान सभा पूर्व के अंतर्गत जोन क्रमांक- 6, 7, 8, 9, 11 और 12 के अंतर्गत कुल- 3843 शौचालय बनाए गए थे.
- विधान सभा- उत्तर के अंतर्गत जोन क्रमांक- 2, 5, 6, 8, 12 व 13 नंबर के तहत कुल-2198 शौचालयों का निर्माण कराया गया था.

