होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण एक साथ, इस कारण 2 तारीख को होलिका दहन के लिए सिर्फ 12 मिनट का समय मिलेगा. जान लें शुभ मुहूर्त.
By : एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : सुप्रिया
Holika Dahan 2026 : ज्योतिषीय गणना के अनुसार, होलिका दहन 2 मार्च 2026 की रात 12 बजकर 50 बजे से 2 बजकर 02 बजे के बीच होगा. चंद्रग्रहण और सूतक काल के चलते रंगों की होली 3 मार्च को नहीं मनाई जाएगी. क्योंकि इसी दिन ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण है, जो शाम 5 बजकर 59 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसमें शुभ कार्य और मंदिर दर्शन वर्जित माने जाते हैं. इस कारण पूरे देश में रंगो की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी.
अर्द्ध रात्रि को होगा होलिका दहन
होली का त्योहार 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा. पहले दिन यानी सोमवार 2 मार्च को होलिका दहन होगा, जबकि मंगलवार यानी 3 मार्च को धुलंडी पर रंग खेला जाएगा. हालांकि इस बार होलिका दहन का समय 2 मार्च की शाम और अर्द्ध रात्रि में किया जाएगा, जिसमें भी 2 मार्च की शाम को सिर्फ 12 मिनट का ही समय मिलेगा, जबकि अर्द्ध रात्रि में 1 घंटे 10 मिनट का समय होलिका दहन के लिए मिल रहा है. खास बात यह भी है कि इस बार होली के दिन चंद्र ग्रहण भी रहेगा.
होलिका दहन पर भद्रा का समय
2 मार्च को शाम 5:55 बजे भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा. वर्ष भद्रा भूलोक में और सिंह राशि में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ रहेगा. भद्रा काल में दान-पुण्य भी किया जा सकता है.
इस कारण शास्त्र सम्मत है होलिका दहन
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट पर होगी, जो 3 मार्च को शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी. इस प्रकार 2 मार्च को निशाव्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त हो रही है. हालांकि, 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा लग रही है, इसलिए भद्रा के मुख काल को त्यागकर, भद्रा पूंछ काल में रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 02 मिनट तक होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना जा रहा है.
चंद्र ग्रहण के साए में होली
- चंद्र ग्रहण के साये में होली मनाई जाएगी. 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा.
- ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का रहेगा. 6:29 बजे और ग्रहण का समापन 6:48 बजे होगा, जिससे ग्रहण का सूतक मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा.
- ग्रहण भारत में दिखाई देगा. ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में बनेगा.
- होलिका दहन 2 मार्च को चंद्र ग्रहण होने से एक दिन पहले करना शुभ रहेगा. इस प्रकार, रंगों का त्योहार 3 मार्च को मनाया जाएगा.
होलिका दहन के लिए प्रदोषकाल का मुहूर्त
फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित में करना शास्त्रसम्मत बताया गया है. इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी सोमवार, 02 मार्च 2026 को सायं 05:56 तक है जो कि अगले दिन मंगलवार, 03 मार्च 2026 को सायं 05:07 तक है.
प्रदोषकाल में पूर्णिमा होने से दिनांक 02 मार्च 2026 (सोमवार) को ही होलिका दहन होगा.
भद्रा सायं 05:56 से अन्तरात्रि 05:28 तक भूमिलोक (नैऋत्यकोण अशुभ) की रहेगी, जो कि सर्वथा त्याज्य है.
यथा :- भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी (रक्षाबंधन) फाल्गुनी ऐलिकादहन) तथा। श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी ॥ – मुहूर्तचिन्तामणि
होलिका दहन के लिए सिर्फ 12 मिनट का समय
ज्योतिष गणना के अनुसार दिनांक 02 मार्च 2026 सोमवार को सायं 06:24 से सायं 06:36 के मध्य प्रदोषकाल में होलिका दहन श्रेष्ठ है.
यदि भद्रा निशीथकाल से आगे तक रहे तो (भद्रा मुख को छोड़कर) होलिका दहन भद्रकाल (भद्रा पुच्छ या प्रदोष) में किया जाना चाहिए.
2 मार्च 2026 को, भद्रा और भद्रा पुच्छ ही निशीथकाल से आगे तक व्याप्त हैं. इसलिए प्रदोष काल ही होलिका दहन हेतु श्रेष्ठ हैं.
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