जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर स्थित एक रेल ओवर ब्रिज गिरने से आवागमन बाधित, डाईवर्ट किया गया वाहनों का रूट
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur HN 45 Bridge Collapse: मध्य प्रदेश जबलपुर से करीब 30 किमी दूर भोपाल को जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 45 (NH-45) का नवनिर्मित पुल कहा हिस्सा भरभराकर गिर गया. जिसके कारण वाहनों का आवागमन बंद हो गया है. यह घटना 22 फरवरी 2026 रविवार को उस दौरान घटी जब इस रूट से बड़ी संख्या में वाहनों का आवागमन हो रहा था. शहपुरा में बना रेल ओवर ब्रिज (ROB) हिस्सा गिरने से वाहनों के आवागमन मार्ग में परिवर्तन किया गया है और सभी वाहनों को डाईवर्टेड रूट से जाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निर्देश दिए गए हैं. डाईवर्टेड रूट के मुताबिक छोटे वाहनों के लिए कोई किसरौंद (kishrod) टोल नाके से किसरौंद गांव से खामदेही जाकर वापस शहपुरा आना है. वहीं बड़े वाहनों के लिए पाटन बायपास से पाटन होकर शहपुरा या भेड़ाघाट से पाटन होकर शहपुरा के लिए डाईवर्टेड रूट तय किया गया है. इस पुल के गिरने से न केवल फ्लाईओवर की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. बल्कि एमपीआरडीसी द्वारा बनवाए गए इस आरओबी की निगरानी पर भी कहीं न कहीं कोर कसर देखने को मिल रही है.
कंसल्टेंसी कंपनी पर आरोप मढ़े जा सकते हैं
जबलपुर शहपुरा के पास बने आरओबी के अचानक भरभराकर गिरने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी इसी आरओबी का एक हिस्सा गिर चुका है. जिस पर लीपापोती हो चुकी है. अब यह दूसरा हिस्सा भी भसक गया है. जिसे अधिकारियों द्वारा कितनी गंभीरता के साथ लिया जाएगा? यह बात सभी को पता है. क्योंकि अक्सर अधिकारी कन्सल्टेंसी कंपनी पर आरोप मढ़कर मामले से इतिश्री कर लेते हैं. अभी महज 5 साल पहले बनकर तैयार हुए इस आरओबी के टूटने से न केवल निर्माण करने वाली कंपनी जिम्मेदार है, बल्कि सरकारी महकमें के अधिकारी भी उतने ही जिम्मेदार हैं, जिनकी निगरानी में इसका निर्माण हुआ है.
628 करोड़ की लागत से बनाई गई थी सड़क
एनएच-45 का जबलपुर से भोपाल का हिस्सा 628 करोड़ रुपये की लागत से बनवाया गया थाङ इसके गिरने से यात्रियों के आवागमन रुकावट आ गई है. इस रूट के यात्रियों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है. गौरतलब है कि इस ब्रिज का एक हिस्सा पिछले साल दिसंबर में ही जर्जर होकर क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसकी मरम्मत के नाम पर उसे बंद कर दिया गया था. प्रशासन ने दूसरे हिस्से से वाहनों की आवाजाही चालू रखने के निर्देश दिए थे, लेकिन सड़क का वह हिस्सा भी आज रविवार को वाहनों के भारी दबाव और सड़क की खराब गुणवत्ता के कारण ढह गया.
MPRDC में हो रहे भ्रष्टाचार की खुली पोल
जबलपुर भेड़ाघाट अंधमूक बायपास से हिरन नदी तक के 54 किलोमीटर लंबे सड़क के इस हिस्से का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) की के माध्यम से कराया गया था. पैकेज-1 के तहत इस मार्ग और फ्लाईओवर पर करीब 628.45 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. निर्माण कार्य नवंबर 2015 में शुरू हुआ था और जनवरी 2020 में इसे पूरा कर लिया गया था. दिलचस्प बात यह है कि एनएच-45 का हिस्सा और यह आरओबी गारंटी पीरियड में है, इससे पहले ही आरओबी भरभराकर गिर गया. इतना ही नहीं यह सड़क पर बनने के कुछ दिनों बाद दरारें आ गईं थीं, जिससे इस सड़की की लाइफ ज्यादा दिनों तक टिकने की नहीं थी. अब तो ब्रिज का आधा हिस्सा गिरने से स्थिति और साफ हो गई कि इस आरओबी का निर्माण घटिया है और इस रोड पर जमकर भ्रष्टाचार हुआ है.
एनएचएआई बिना हैण्डओवर लिए कैसे करता रहा टोल वसूली?
बताया जा रहा है कि एमपीआरडीसी ने निर्माण एजेंसी मेसर्स वागड़ इंफ्रा प्रोजेक्टस लिमिटेड और मेसर्स सोराठिया के माध्यम से कराया था, जिसकी खराब गुणवत्ता के करण एनएचएआई के अधिकारियों ने इस रोड को हैण्डओवर नहीं लिया था. एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने इन निर्माण एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट भी किया था. दिलचस्पी वाली बात यह है कि यह जिस सड़क की टोल वसूली एनएचएआई के माध्यम से किया जा रहा है. लेकिन इस सड़क को बिना हैण्डओवर लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कैसे टोल वसूली कर रहा है? इतना ही नहीं विगत 5 सालों में हुई टोल वसूली की रकम कहां जमा हो रही थी? और यदि एनएचएआई में टोल वसूली की रकम जमा हो रही थी तो इस सड़क का मेंटेनेंस एनएचएआई के द्वारा क्यों नहीं कराया गया? ऐसे कई सवाल हैं, जिनका उत्तर मिलना अभी बाकी है.
सड़क पर पड़ी दरार पर कुछ भी बोलने से बचते रहे अधिकारी
एनएच-45 जब बनकर तैयार हुई थी, उसके कुछ दिनों बाद ही इस सड़क पर चौड़ी दरार पड़ गई थी, कई जगह कंक्रीट सड़क से गिट्टी उखड़ने लगी थी. इस संबंध में जब जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किए जा रहे थे तो उनका रटा-रटाया एक ही जवाब रहता था कि इस सड़क के हिस्से की जमीन पर ‘काली मिट्टी’ है, जिसके कारण सड़क धंस रही है और सड़क की गुणवत्ता पर पर्दा डालने की कोशिश की गई थी. अब सवाल उठता है कि आरओबी बनने से पहले सड़क के हिस्से का निर्माण से पहले मृदा परीक्षण (Soil Testing) होता है, ऐसे में अधिकारियों का यह तर्क बिल्कुल भी फिट नहीं बैठ रहा है कि इस रोड पर काली मिट्टी होने की वजह से सड़क खराब हुई है. अब जब यह सड़क धंस रही है तो बड़े हादसे को आमंत्रित कर रही है.
यातायात प्रभावित: अब तय करनी होगी लंबी दूरी
आरओबी के टूटने से जबलपुर-भोपाल राजमार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है. अब वाहनों को जबलपुर आने-जाने के लिए पाटन रोड या चरगवां रोड का लंबा चक्कर लगाना होगा. इस संबंध में कांग्रेसी नेताओं ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ किए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

