2026 में खरमास 15 मार्च से 13 अप्रैल तक रहेंगे. खरमास को ज्योतिष शास्त्र और हिंदू धर्म में अशुभ माना जाता है. शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Kharmas 2026: हिंदू धर्म के अनुसार मांगलिक कार्य करने वालों के लिए 33 दिन शुभ नहीं हैं. क्योंकि इन्हीं दिनों खरमास खरमास (मलमास) का महीना पड़ रहा है. मलमास 15 मार्च से शुरू होगा और 13 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा. इन दिनों ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह, सगाई, यज्ञ, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. साथ ही नया घर या नया वाहन आदि खरीदना भी वर्जित होता है. ज्योतिष गणना के अनुसार ऐसी मान्यता है कि मलमास माह में सूर्य की गति धीमी हो जाती है. जिस कारण कोई भी शुभ कार्य सफल नहीं होते हैं.
इसी कारण शास्त्रों में खरमास महीने को शुभ नहीं माना गया है. इस अवधि में मांगलिक कार्य करने में प्रतिबंध है. साथ ही इस दौरान कोई भी शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. यदि कोई हठधर्मिता करता है तो उसका वह खुद भोग करता है.
33 दिन का रहेगा खरमास
हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास पूरे एक माह का रहता है. 14 मार्च की अर्द्धरात्रि में सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाएगा, जो 13 अप्रैल 2026 को मेष संक्रांति के दिन समाप्त होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य देव के एक राशि से दूसरे राशि में स्थान बदलने की प्रक्रिया को संक्रांति कहते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे एक वर्ष में दो बार ऐसा मौका आता है. जब खरमास लगता है. एक खरमास मध्य मार्च से मध्य अप्रैल के बीच और दूसरा खरमास मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी तक होता है.
15 मार्च से होगा खरमास प्रारंभ
पंचांग के अनुसार, राशि चक्र की अंतिम राशि मीन है और जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है तो खरमास माना जाता है. 14 मार्च की अर्द्धरात्रि में सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी. सूर्य देव 13 अप्रैल तक मीन राशि में रहेंगे. इस अवधि में खरमास रहेगा. यानि 15 मार्च से प्रारंभ हो रहे खरमास का समापन 13 अप्रैल को होगा.
क्यों हैं मांगलिक कार्य करना वर्जित
धार्मिक और ज्योतिष गणना के अनुसार, खरमास को शुभ नहीं माना जाता है. इसलिए इस माह के दौरान कोई भी शुभ, मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है. इस दौरान हिंदू धर्म में बताए गए संस्कार, जैसे मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, नामकरण, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ, वधू प्रवेश, सगाई, विवाह आदि कोई भी कार्य नहीं किया जाता है.
क्यों बंद होते हैं शुभ कार्य करना
ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि गुरु देव बृहस्पति धनु राशि के स्वामी हैं. बृहस्पति का अपनी ही राशि में प्रवेश इंसान के लिए अच्छा नहीं होता है. ऐसा होने पर लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर पड़ जाता है. इस राशि में सूर्य के कमजोर होने कारण इसे मलमास कहते हैं. ऐसा कहा जाता है कि खरमास में सूर्य का स्वभाव उग्र हो जाता है. सूर्य के कमजोर स्थिति में होने की वजह से इस महीने शुभ कार्यों पर पाबंदी लग जाती है.
इन बातों का रखें ध्यान
- खरमास में शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य करना वर्जित हैं.
- खरमास में यदि विवाह किया जाता है तो भावनात्मक और शारीरिक सुख दोनों नहीं मिलते हैं.
- खरमास में मकान का निर्माण या संपत्ति की खरीदारी नहीं करना चाहिएङ
- मलमास में बनाए गए मकान आमतौर पर कमजोर होते हैं और उनसे निवास का सुख नहीं मिल पाता है.
- खरमास में नया कार्य या व्यापार शुरू न करें.
- मलमास में शुरू किए गए व्यापार में शुभ फलों के प्राप्ति नहीं होती है.
- खरमास में द्विरागमन, कर्णवेध और मुंडन जैसे कार्य भी वर्जित होते हैं.
- इस अवधि के किए गए कार्यों से रिश्तों के खराब होने की संभावना होती है.
- खरमास में धार्मिक अनुष्ठान नहीं करना चाहिए.
- खरमास के केवल प्रतिदिन किए जाने वाले अनुष्ठान मान्य हैं.
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