स्मार्ट सिटी जबलपुर के द्वारा शहर में कई जगह बनाई गई एनएमटी, शहरवासियों को न तो घूमने के लिए साफ जगह मिल पा रही है और न ही स्वच्छ हवा, अब अधिकारी फंड का रोना रोने लगे हैं.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Non-Motorized Track In Jabalpur : मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के लोगों के पैदल चलने और साइक्लिंग के लिए करीब 25 करोड़ रुपए खर्च कर स्मार्ट सिटी ने जो एनएमटी बनाए थे, वे बरबादी की कगार पर पहुंच चुके हैं. गौरीघाट रोड पर बने सबसे लंबे एनएमटी में कब्जों की भरमार है. आधी से ज्यादा एनएमटी पाइप लाइन बिछाने के लिए खोद दी गई है. बाकी में सड़क के दोनों तरफ मिलाकर करीब 200 अस्थायी ठेले, टपरे जमे हैं. नौदराब्रिज देशबंधु कॉम्प्लेक्स से घोड़ा अस्पताल तक अवैध कब्जे हैं. लोगों ने इसे पार्किंग का अड्डा बना लिया है. चारपहिया वाहन कतार से खड़े नजर आ जाते हैं. वहीं नौदराब्रिज से लेकर मदन महल (भातखंडे संगीत विद्यालय) तक करीब डेढ़ किमी के नॉन मोटराइज्ड ट्रैक (एनएमटी) की लाइटिंग उखाड़ ली गई है. ग्रेनाइट पत्थर जगह-जगह से टूट गए हैं. मुहाने पर अितक्रमण जमे हुए हैं, तो भीतर नशेड़ियों ने अड्डा बना लिया है. जर्जर होते जा रहे एनएमटी की तरफ स्मार्ट सिटी के अधिकारियों का ध्यान ही नहीं है. जनता की गाड़ी कमाई को बर्बाद करने वाले अधिकारी अब मेंटेनेंस कराने के नाम पर फंड का रोना रो रहे हैं.
मेंटेनेंस से दूर, अतिक्रमण भी नजर नहीं आ रहे
शहर का सबसे पहला एनएमटी कटंगा से गौरीघाट तक करीब 6 किलोमीटर लंबा बनाया गया था. सड़क के दोनों ओर बना यह एनएमटी अतिक्रमण के बीच गुम होता जा रहा है. कटंगा से गौरीघाट तक सड़क के दोनों ओर करीब 200 अस्थायी ठेले-टपरे जमने लगे हैं. शाम को तो हर 50 मीटर पर चलित दुकानें नजर आ जाती हैं. बीच-बीच में वाहन पार्किंग का अड्डा भी बना लिया गया है. शाम को जब इन दुकानों में ग्राहकी शुरू होती है, तो आने वाले लोग एनएमटी के बीच में ही अपना वाहन खड़ा करते हैं. यानी पूरे एनएमटी में पैर रखने की जगह भी नहीं बचती है. बची कसर खुद नगर निगम ने पाइप लाइन के लिए खुदाई कर पूरी कर दी है. ताज्जुब की बात तो यह है कि मेंटेनेंस के नाम पर फंड की कमी का रोना-रोने वाले अधिकारियों को यहां के अतिक्रमण नजर ही नहीं आ रहे हैं. एनएमटी में जमे अितक्रमणों को हटाने के लिए आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसी वजह से अतिक्रमणों का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है. कटंगा तिराहे से बंदरिया तिराहे तक तो एक ओर शाम को इतने अधिक अतिक्रमण नजर आने लगते हैं कि वहां से पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है.
टूट रहे ग्रेनाइट, बिजली पोल भी जर्जर
नौदराब्रिज से मदन महल (भातखंडे संगीत विद्यालय) तक जो एनएमटी बनाया गया है, उसमें डेकोरेटिव लाइट लगाई गई थीं. खंभों से न सिर्फ लाइट बल्कि उन्हें चालू करने के लिए लगाए गए स्विच बोर्ड तक गायब हो चुके हैं. यहां इंसानों की जगह जानवर घूमने लगे हैं. सजावट के लिए लगे ग्रेनाइट पत्थर जगह-जगह से टूट रहे हैं. प्रवेश द्वारों की स्थिति भी ठीक नहीं है. कहीं अितक्रमण जमे हैं तो कहीं सामने लगी ग्रिल टूट चुकी हैं. कुछ हिस्से को तो नशेड़ियों ने अपना अड्डा बना लिया है. नशेड़ी यहां दिन-दहाड़े नशा करते नजर आ जाते हैं. आसपास के रहवासियों ने अपना आउटलेट इसी ओर खोल दिया है, जिससे घरों का गंदा पानी एनएमटी में आने लगा है. हरियाली के नाम पर सिर्फ गाजरघास और बेढंगे पेड़-पौधे नजर आने लगे हैं.
वाहनों की लगी है कतार
नौदराब्रिज से घोड़ा अस्पताल तक बने एनएमटी में वाहनों का कब्जा हो गया है. यहां दोनों ओर लंबी-लंबी कतार में वाहन खड़े नजर आते हैं. बीच-बीच में एक-दो टपरे भी जम गए हैं. इतना ही नहीं एनएमटी के एक बड़े हिस्से को रसूखदार परिवार ने अपना निजी गार्डन बना लिया है. सालों पहले नगर निगम ने यह गार्डन खाली तो कराया था, लेकिन उस पर फिर से कब्जा हो गया है. यहां लगी ग्रिल तो लगभग गायब हो चुकी हैं. लाइटों के खराब होने से शाम होते ही अंधेरा फैल जाता है. लोगों ने इसे पार्किंग बना लिया है.
जबलपुर के एनएमटी पर एक नजर
प्रोजेक्ट लागत दूरी
कटंगा से गौरीघाट एनएमटी 8.83 करोड़ 6 किमी
नवभारत से मदन महल ओमती नाले के ऊपर 8.02 करोड़ 5.5 किमी
नवभारत से नौदाब्रिज तक फेज-2 3.44 करोड़ 2.75 किमी
नौदराब्रिज से घोड़ा अस्पताल फेज-3 2.98 करोड़ 1.5 किमी
एनएमटी फेज-2 के तहत लाइटिंग का कार्य 0.77 करोड़ –

