मां बगलामुखी की पूजा का महत्व वाणी, बुद्धि और शत्रु पर विजय प्राप्ति के लिए अचूक माना गया है. वैशाख में बगलामुखी जयंती 25 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन कैसे करें मां पीतांबरा की पूजा जानें…
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By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Baglamukhi Jayanti 2026: हिंदू धर्म में 10 महाविद्याओं में मां बगलामुखी को अष्टम (आठवीं) महाविद्या माना गया है. इन्हें वाणी, बुद्धि और शत्रु पर विजय प्राप्त करने की देवी माना गया है. इनकी पूजा, व्रत और अनुष्ठान करने से जीवन सुखमय व्यतीत होता है. वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी जयंती मनाई जाती है. इस साल 2026 में मां बगलामुखी जयंती कल 25 अप्रैल शुक्रवार को है. इस दिन देवी बंगलामुखी का दर्शन करने से सारी मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति हो जाती है. ऐसी मान्यता है कि यदि सारे ब्रह्मांड की शक्तियां एक साथ मिल भी जाए तो वह मां बगलामुखी का मुकाबला नहीं कर सकती हैं.
इस देवी को बगलामुखी, पीताम्बरा, बगला, वल्गामुखी, वगलामुखी, ब्रह्मास्त्र विद्या आदि नामों से भी जाना जाता है. मां बगलामुखी वाणी, वाक्पटुता और नियंत्रण की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं. विशेषतौर पर तांत्रिक साधना के लिए मां बगलामुखी की पूजा प्रसिद्ध है. अक्सर बंगलामुखी मंदिरों में तांत्रिक साधना होती रहती है. अभी कुछ दिनों पहले ही मध्य प्रदेश के दतिया में मां बंगलामुखी मंदिर में एक बड़ा अनुष्ठान आयोजित किया गया था.
मां बगलामुखी की पूजा का शुभ मुहूर्त
20 अप्रैल 2026 को पूजा मुहूर्त – सुबह 5.47 – सुबह 10.41 तक है.
तांत्रिक साधना के लिए सावधानी बहुत जरूरी
धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि यदि किसी को मां बंगलामुखी की साधना करना है तो उसमें साधक को सावधानी रखना बहुत ही जरूरी है. क्योंकि तांत्रिक पूजा रात्रि कालीन ही होती है, इस विधि को करने के लिए गुरु का मार्गदर्शन बहुत जरूरी है या किसी जानकार के मार्गदर्शन लेना चाहिए. अन्यथा खुद से की गई साधना का विपरीत असर भी साधक पर ही होता है.
मां बगलामुखी की पूजा के लाभ
- शत्रुओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है.
- न्यायालय कोर्ट-केस में जीत मिलती है.
- किसी वाद-विवाद में सफलता मिलती है.
- साधक के वाणी में वाक्पटुता आती है.
- घर की दरिद्रता का नाश होता है.
- कार्य में बाधाओं से मुक्ति के लिए मां बगलामुखी की पूजा अचूक मानी जाती है.
मां बगलामुखी की पूजा विधि
ऐसी मान्यता है कि मां बगलामुखी की पूजा में केवल पीले रंग का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. गृहस्थ जीवन यापन करने वाले लोग मां बंगलामुखी माता की सामान्य पूजा कर सकते हैं. लेकिन इन सावधानियों को रखना बहुत जरूरी है…
- सुबह स्नान के बाद पीले रंग के वस्त्र पहनें.
- माता को पीले फूल, हल्दी, अक्षत, सिंदूर, श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें.
- केला या हलवे का भोग लगाएं.
- ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः मंत्र का जाप करें.
- आरती कर अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए मन में संकल्प दोहराएं.
मां बगलामुखी से पहले मृत्युंजय भैरव पूजन
यहां हम बता दें कि शक्ति की उपासना में भैरव पूजन का विशेष महत्व होता है. मां बगलामुखी के भैरव मृत्युंजय भैरव हैं. भैरव पूजन के लिए दशांश मृत्युंय भैरव मंत्र हौं जूं स: का जाप अवश्य करें.
मां बगलामुखी पूजा मंत्र
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।
मां बगलामुखी कथा
एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच गया. भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए. इस समस्या का कोई हल न पा कर वह भगवान शिव को स्मरण करने लगे, तब भगवान शिव ने कहा कि शक्ति रूप ही इस प्रलय को रोक सकती हैं. इसके बाद भगवान विष्णु ने कठिन तपस्या की, तब माता बगलामुखी प्रकट हुईं.
कहां हैं मां बगलामुखी का मंदिर
भारत में मां बगलामुखी के तीन मुख्य सिद्धपीठ माने जाते हैं- हिमाचल प्रदेश (बनखंडी), नलखेड़ा (मध्य प्रदेश) और दतिया (मध्यप्रदेश) को प्रमुख पीठ के रूप में माना जाता है. यहां मां बगलामुखी देवी का दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. इसके अलावा मध्य प्रदेश जबलपुर में भी बंगलामुखी की स्थापना कराई गई है. यहां भी देवी दर्शन करने वालों की भीड़ देखने को मिलती है.
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