कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि, बेरोजगारी चिंता का विषय, भारत की राजनीति में सिर्फ हिंदू-मुस्लिम का एजेंडा
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Cockroach Janta Party Supporter: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को जंतर मंतर में प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया. क्योंकि इससे पहले यूजीसी को लेकर इसी जगह पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी, जिसके लिए प्रदर्शनकारियों को एड़ीचोटी का जोर लगाना पड़ा था और प्रदर्शन कर लोगों पर लाठियां भी बरसाई गईं थीं. लेकिन सीजेपी को पुलिस के संरक्षण में प्रदर्शन करने की खुली छूट मिली और सोशल मीडिया से लेकर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इस प्रदर्शन की खबर को कवर किया. प्रदर्शन के बाद CJP फाउंडर अभिजीत दीपके आज रविवार सुबह महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के वालुज इलाके में अपने घर पहुंचे. उन्होंने ने यहां प्रेस कान्फ्रेंस की. इस अवसर पर अभिजीत दीपके ने कहा- पिछले 10-12 साल में देश की राजनीति हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर केंद्रित रही है. इससे रोजगार नहीं मिलेगा. सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव होना चाहिए. इसके बाद उन्होंने शाम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. दीपके ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए एजेंडा तैयार किया जाएगा. बेरोजगारी भी देश का बड़ा मुद्दा है. आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा.
इससे पहले अभिजीत ने X पर पोस्ट कर लिखा था- दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन काफी सफल रहा. 7,000 लोगों ने हिस्सा लिया. सरकार ने ट्रेलर देखा कि एकजुट होने पर ‘कॉकरोच’ क्या कर सकते हैं. बात अभी खत्म नहीं हुई है. अब यह आंदोलन पूरे देश में किया जाएगा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस की 3 मुख्य बातें…
- जंतर-मंतर की भीड़ में कौन लोग थे. कितने लोगों को पाकिस्तानी कहा जाएगा? क्या प्रदर्शन कर रहे छात्रों, सवाल पूछने वाले मीडिया और विपक्ष को भी पाकिस्तानी कहा जाएगा?
- यह Gen Z का आंदोलन है. हमने किसी राजनीतिक दल के नेताओं से बात नहीं की है. कोई समर्थन देना चाहता है तो बाहर से दे सकता है, लेकिन हम किसी पार्टी से नहीं जुड़ेंगे.
- CJP की तुलना पड़ोसी देशों में हुए आंदोलनों से नहीं की जानी चाहिए. जंतर-मंतर का प्रदर्शन बहुत शांतिपूर्ण था. इसमें देशभर से युवा शामिल हुए थे.
X पोस्ट में लिखीं अभिजीत ने ये बातें-
- जब तक हम आवाज नहीं उठाएंगे तब तक परिवर्तन नहीं हो सकता. धर्मेंद्र प्रधान ने पूरी पीढ़ी के साथ अन्याय किया है. वे अगर इस्तीफा नहीं देते, तो 13 जून को फिर प्रदर्शन होगा.
- शनिवार को प्रदर्शन में शामिल ज्यादातर लोगों ने पहले कभी किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया था, लेकिन हमारी मौजूदगी से उन्हें शिक्षा प्रणाली पर अपना गुस्सा और हताशा व्यक्त करने का साहस मिला.
- तेज गर्मी-धूप में खड़े छोटे बच्चे और छात्रों ने साबित किया कि शांतिपूर्ण विरोध हमारी सबसे बड़ी ताकत है. मैं आपमें से हर एक को धन्यवाद देता हूं. सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन को छू नहीं सकती. हम कॉकरोचों को कभी भी उनसे डरने की जरूरत नहीं है.
आंदोलन को इनका समर्थन मिला
आंदोलन और युवाओं की मांग का समर्थन राजनीति से जुड़े नेता, बॉलीवुड और मनोरंजन उद्योग से जुड़े लोगों ने समर्थन दिया. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने विरोध से संबंधित सामग्री साझा की और छात्रों और युवा नौकरी चाहने वालों द्वारा उठाई जा रही चिंताओं के सराहना की. उद्धव ठाकरे और संजय राउत सहित शिव सेना (यूबीटी) के नेताओं ने कहा कि युवाओं को नकारात्मक रूप से लेवल करके खारिज करना अनुचित था. वहीं ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी सहित तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व ने इस अभियान को भारत के युवाओं के बीच वास्तविक चिंता का एक आईना बताया. शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने शांतिपूर्ण विरोध को एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए जंतर मंतर प्रदर्शन की अनुमति देने के फैसला का स्वागत किया. इस आंदोलन को अभिनेताओं, फिल्म निर्माताओं, कॉमेडियंस और टेलीविजन हस्तियों का भी सोशल मीडिया के जरिए से समर्थन मिला.
24 घंटे में 6 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स बढ़े
कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या भी बढ़ गई है. प्रदर्शन से पहले उनके फॉलोअर्स की संख्या 2.21 करोड़ थी. 7 जून को दोपहर 3 बजे तक यह संख्या बढ़कर 2.27 करोड़ हो गई। X पर उनके 2.70 लाख फॉलोअर्स हैं.
अभिजीत के सामने चुनौतियां
फॉलोअर्स को वोटर्स में बदलना:
जंतर-मंतर की कम भीड़ ने साबित किया कि पार्टी को अभी सोशल मीडिया से निकलकर जमीनी स्तर पर ब्लॉक और जिला कमेटियां बनानी होंगी. पार्टी के पास पॉलिटिक्स का अनुभव नहीं है. सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की ताकत तो है, लेकिन सवाल है कि अगर वे चुनाव में उतरते हैं तो क्या इसे वोट बैंक में बदल पाएंगे.
अन्ना आंदोलन जैसा मददगार कैडर नहीं:
2011 के अन्ना आंदोलन की कामयाबी के पीछे अलग-अलग संगठनों का समर्थन था. कॉकरोच जनता पार्टी के पास कैडर नहीं है. उसका पूरा आधार क्लिक एक्टिविज्म पर टिका है. इंस्टाग्राम पर 2.2 करोड़ फॉलोअर्स होना डिजिटल उपलब्धि तो है, लेकिन इस वर्चुअल कैडर के पास न लीडर हैं और न ही बूथ मैनेजमेंट की कोई समझ.
सिंगल पॉइंट एजेंडा नहीं:
कामयाब राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन की पहली शर्त सिंगल पॉइंट एजेंडा है. अन्ना आंदोलन का एक साफ मकसद था- लोकपाल बिल. इससे लोग जुड़ गए. कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में आए लोगों में कोई मणिपुर की बात कर रहा था, कोई टैक्स और पानी के संकट की, तो कोई करप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर की. पार्टी को स्पष्ट राष्ट्रीय नीति और एजेंडा सामने रखना होगा.
CJI सूर्यकांत का बयान बना CJP के बनने की वजह
CJP का उदय उस दौरान हुआ, जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत के युवाओं पर को लेकर एक बयान दिया. दरअसल CJI सूर्यकांत ने 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान देश के बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच कहा था. उन्होंने कहा- कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं.
CJI और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक वकील की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उसने सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने मांग की थी. बेंच ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा- समाज में पहले से ही पैरासाइट (परजीवी) हैं, जो सिस्टम पर हमला करते हैं.
इसके बाद 16 मई को अमेरिका से अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत की. एक्स-इंस्टाग्राम पर अकाउंट बनाया. शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के लिए 22 मई को वेबसाइट पर ऑनलाइन पिटीशन लगाई. इस पिटीशन में 8 लाख से ज्यादा लोगों ने साइन किया था.

