आरक्षण को लेकर एससी, एसटी में नाराजगी साफ झलक रही है. यहां जाट, राजपूतों में गुस्सा झलक रहा है.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Rajasthan News: राजस्थान. जातिगत गणित बैठाने में भाजपा विफल रही. 25 सीटों वाले लोक सभा प्रदेश राजस्थान में 14 सीटें ही भाजपा जीत पाई. जबकि कांग्रेस 8 सीटों में जीत दर्ज की है. इससे साफ जाहिर होता है कि यहां कांग्रेस वापिसी के संकेत दिए हैं और कांग्रेस का जातिगत गणित फिट बैठता नजर आ रहा है. आरक्षण को लेकर एससी, एसटी में नाराजगी साफ झलक रही है. यहां जाट, राजपूतों में गुस्सा झलक रहा है. इसके आलावा गुर्जर-मीणा एक साथ होने से भी भाजपा के वोट शेयर में कमी देखने को मिल रही है. 2019 में हुए चुनाव के मुकाबले भाजपा के वोट शेयर में 11 प्रतिशत वोट शेयर में कमी देखने को मिली है.
संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश
कांग्रेस अब जमीनी स्तर पर खुद को मजबूत करने में लगी है. पार्टी ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर तक संगठन बनाने का बड़ा अभियान चला रही है. जिला स्तर पर भी बड़े पैमाने पर नए पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं. इसका मतलब है कि पार्टी सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि लंबी तैयारी कर रही है.
नेताओं की वापसी और असंतोष का फायदा
कुछ नेता जो बीजेपी में गए थे, वे असंतोष के कारण वापस कांग्रेस की ओर झुक रहे हैं. उदाहरण: महेंद्रजीत सिंह मालवीय की “घर वापसी” को बड़ा संकेत माना जा रहा है. इससे कांग्रेस को नैरेटिव मिल रहा है कि “पुराना घर ही सही विकल्प है.”
हाईकमान का भरोसा और बड़ी जिम्मेदारियाँ
हाल ही में सचिन पायलट, भंवर जितेंद्र सिंह और नीरज डांगी को दूसरे राज्यों में बड़ी जिम्मेदारियाँ दी गईं है. यह दिखाता है कि राजस्थान के नेताओं पर पार्टी नेतृत्व का भरोसा बना हुआ है जो भविष्य में राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका बढ़ा सकता है.
भविष्य की रणनीति: 2028 पर नजर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सचिन पायलट को फिर से राजस्थान की राजनीति में केंद्रीय भूमिका दी जा सकती है. उन्हें संभावित CM फेस के तौर पर भी देखा जा रहा है. यानी कांग्रेस अभी से अगले विधानसभा चुनाव (2028) की तैयारी कर रही है.
विपक्ष के रूप में आक्रामक रुख
गोविंद सिंह डोटासरा जैसे नेता फिर से विधानसभा में सक्रिय हो रहे हैं और सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं. विधानसभा में भी कांग्रेस लगातार मुद्दे उठा रही है. इससे पार्टी “एक्टिव विपक्ष” की छवि बनाना चाहती है. इससे साफ जाहिर होता है कि राजस्थान में कांग्रेस की वापसी अभी तय नहीं है, लेकिन ये संकेत जरूर मिल रहे हैं कि संगठन फिर से मजबूत किया जा रहा है. पुराने नेता वापस आ रहे हैं. युवा और बड़े चेहरों को आगे लाया जा रहा है. अगले चुनावों के लिए लंबी रणनीति बन रही है. इसलिए “वापसी के संकेत” का मतलब है कि कांग्रेस धीरे-धीरे जमीन तैयार कर रही है लेकिन असली परीक्षा अगले चुनावों में होगी.
सात नेताओं की घर वापसी पर हुई चर्चा
अनुशासन कमेटी के अध्यक्ष उदयलाल आंजना ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, महेंद्रजीत सिंह मालवीय सहित सात नेताओं की कांग्रेस में वापसी को लेकर अनुशासन कमेटी में चर्चा की गई है. इसकी रिपोर्ट बनाकर शनिवार तक पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष को दी जाएगी. जिस पर अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और आलाकमान फैसला करेंगे. उन्होंने बताया कि मालवीय के अलावा कांता भील, खिलाड़ीलाल बैरवा, कैलाश मीणा, सुभाष तंबोली, गोपाल गुर्जर की कांग्रेस में वापसी के एजेंडे पर चर्चा की गई है. जिसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है.
‘जो नेता गए थे, कांग्रेस उनका घर’:
उन्होंने कहा, इन नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारणों, उन पर लगे आरोपों पर भी गहनता से मंथन किया गया है. ऐसे नेताओं को पार्टी में वापस लेने का क्या असर होगा. इसे लेकर जिले के प्रमुख नेताओं से भी बात की गई है. जिलाध्यक्षों ने अपनी तरफ से जो बात कही है. उसे भी अनुशासन कमेटी अपनी रिपोर्ट में शामिल कर रही है. उन्होंने कहा, जो लोग पार्टी छोड़कर गए. वो घर के ही आदमी थे. वे पार्टी छोड़कर गए क्यों, यह समझ से परे है. जो आना चाहेगा. उसे वापस भी लेंगे. कांग्रेस उनका घर है. उन्होंने यह महसूस भी कर लिया कि उधर कोई फायदा नहीं है और कांग्रेस से बढ़िया कोई पार्टी नहीं है.

