मंच पर राहुल, केजरीवाल समेत विपक्ष के नेता मौजूद रहे, गवर्नर संतोष गंगवार ने दिलाई शपथ, . मंत्रिमंडल विस्तार बाद में होगा. समारोह में राहुल गांधी, प. बंगाल की CM ममता बनर्जी, सपा चीफ अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी यादव समेत INDIA ब्लॉक के कई लीडर्स मौजूद रहे.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
JMM लीडर हेमंत सोरेन को गवर्नर संतोष गंगवार ने झारखंड के CM पद की शपथ दिलाई. वे चौथी बार मुख्यमंत्री बने हैं. मंत्रिमंडल विस्तार बाद में होगा. समारोह में राहुल गांधी, प. बंगाल की CM ममता बनर्जी, सपा चीफ अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी यादव समेत INDIA ब्लॉक के कई लीडर्स मौजूद रहे.
इससे पहले 3 बार कब शपथ ली
हेमंत जुलाई 2013 में पहली बार CM बने थे. दिसंबर 2014 तक पद पर रहे. 2019 में JMM, कांग्रेस और राजद ने मिलकर 47 सीटें हासिल कीं और हेमंत CM बने. 31 जनवरी 2024 को जमीन घोटाले में गिरफ्तारी हुए. उनकी जगह 2 फरवरी को JMM के चंपाई सोरेन को CM बनाया गया. 5 महीने बाद हेमंत को जमानत मिली. 3 जुलाई को चंपाई ने इस्तीफा दिया. 4 जुलाई को हेमंत ने तीसरी बार CM पद की शपथ ली थी.
इस दौरान हेमंत सोरेन और उनके बड़े भाई दुर्गा सोरेन का पालन-पोषण उनकी मां शिबू सोरेन ने ही किया। 1980 के दशक में शिबू सोरेन और बिनोद बिहारी महतो ने मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा नामक एक राजनीतिक दल का गठन कर लिया। इसमें झारखंड में खासकर कोयलांचल में वामपंथी विचारधारा से ओतप्रोत मजदूर नेता मासस के ए.के. राय भी हमराही बने। झारखंड के इन तीन दिग्गजों के नेतृत्व में झारखंड अलग राज्य का आंदोलन तेज हो गया। शिबू सोरेन को संगठन और राजनीतिक बैठकों में भाग लेने के सिलसिले में अधिकांश दिनों तक घर से बाहर रहना पड़ा था।
दुमका में शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की हार से लगा सदमा
पिता शिबू सोरेन की अनुपस्थिति में रूपी सोरेन ने ही दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन की पढ़ाई-लिखाई का ख्याल रखा। हेमंत सोरेन ने पटना से 12वीं की परीक्षा पास की और इंजीनियरिंग करने बीआईटी मेसरा, रांची आ गए। उस वक्त उनके पिता शिबू सोरेन 1991 के चुनाव में दुमका से सांसद निर्वाचित हुए थे। लेकिन इसी दौरान शशिनाथ झा हत्याकांड और सांसद रिश्वत कांड के कारण शिबू सोरेन की मुश्किलें बढ़ गई।
सीबीआई की कार्रवाई के बावजूद शिबू सोरेन ने 1996 के लोकसभा चुनाव में फिर से जीत हासिल की। लेकिन राजनीतिक मुश्किलें बढ़ती ही गई। 1996 के लोकसभा चुनाव के पहले 1995 में दुर्गा सोरेन जामा से विधानसभा चुनाव जीत चुके थे, लेकिन बाद में उन्हें कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इन्हीं सब पारिवारिक परिस्थितियों के कारण हेमंत सोरेन की राजनीति में एंट्री हुई।
जेएमएम के छात्र संगठन से राजनीति में एंट्री
1998 के लोकसभा चुनाव में शिबू सोरेन को दुमका में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1999 के लोकसभा चुनाव में शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन को भी भाजपा के बाबूलाल मरांडी ने पराजित किया। संताल परगना में जेएमएम की कमजोर सांगठनिक स्थिति को संभालने के लिए हेमंत सोरेन को सबसे पहले छात्र-युवा मोर्चा की जिम्मेदारी दी गई। हेमंत सोरेन पढ़ाई छोड़ की पूरी तरह से अपने पिता शिबू सोरेन और बड़े भाई दुर्गा सोरेन के लिए चुनाव तैयारियों का अपने हाथों में ले लिया। दुमका और संताल परगना क्षेत्र में संगठन को मजबूत बनाने में हेमंत सोरेन लग गए। हेमंत सोरेन के प्रयास से ही 2001 के दुमका लोकसभा उपचुनाव में शिबू सोरेन को एक बार फिर से बड़ी जीत मिली। 2004 और 2009 और 2014 के चुनाव में भी शिबू सोरेन को दुमका से जीत मिली। इसमें हेमंत सोरेन की बड़ी भूमिका रही।
शिबू सोरेन की अनुपस्थिति में मां रूपी सोरेन ने ही पढ़ाई-लिखाई का ध्यान रखा
10 अगस्त 1975 को रामगढ़ के नेमरा गांव में जब हेमंत सोरेन का जन्म हुआ, उस वक्त उनके पिता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन टुंडी स्थित एक आश्रम में संताली समुदाय को जागृत करने के लिए अभियान चला रहे थे। टुंडी-निरसा क्षेत्र में ही शिबू सोरेन ने सबसे पहले बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर महाजनी प्रथा के आंदोलन की शुरुआत की। इसी दौरान चिरूडीह नरंसहार की घटना समेत अन्य बड़े आंदोलनों के कारण शिबू सोरेन को महीनों तक भूमिगत रहना पड़ा।

