Google News: गूगल के मुताबिक, ऐसे हजारों ऐप्स को प्ले स्टोर से हटाया जा रहा है, जो प्ले स्टोर पर लो क्वालिटी में मौजूद है
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By : DB News Update | Edited By : Supriya
Google New Rule 2024: गूगल में नित नए प्रयोग होते रहते हैं. अभी कुछ दिनों पहले सितंबर माह में मोबाइल यूजर्स के लिए ऑनलाइन कामकाज के लिए नियमों में परिवर्तन किया गया था. जिसका असर गूगल और आधार यूजर्स पर पड़ा था. इसके अलावा टेलीकॉम कंपनियों पर भी इसका असर देखा गया था. 14 सितंबर से UIDAI के फ्री सर्विस को भी बंद कर दिया गया था.
फ्री आधार अपडेशन हो गया था बंद
UIDAI ने मुफ्त में आधार कार्ड अपडेट की डेडलाइन बढ़ाई गई थी, जिसे 14 सितंबर, 2024 कर दिया गया था. मोबाइल यूजर्स घर बैठे 10 साल पुराने आधार कार्ड को भी अपडेट करा सकते थे. फ्री आधार अपडेट की सुविधा My Aadhaar पोर्टल पर दिया जा रहा था. इसके अलावा ग्राहकों के लिए आधार सेंटर से भी अपडेशन की सुविधा दी गई थी. इसके लिए 50 रुपये चार्ज निर्धारित किया गया था.
प्ले स्टोर पॉलिसी में किया गया था बदलाव
दरअसल, गूगल की नई प्ले स्टोर पॉलिसी को सितंबर से लागू किया गया था. गूगल के द्वारा दावा किया गया था कि ऐसे हजारों ऐप्स को प्ले स्टोर से हटाया जा रहा है, जो प्ले स्टोर पर लो क्वालिटी में मौजूद हैं. यह ऐप्स मैलवेयर का सोर्स हो सकते हैं. बता दें कि गूगल ने क्वालिटी कंट्रोल की ओर से नया नियम लागू किया है. ऐसे में दुनियाभर के एंड्रॉइड स्मार्टफोन यूजर्स को काफी राहत मिली थी. साथ ही साथ गूगल की प्राइवेसी के लिए भी ये शानदार साबित हुआ.
OTP और मैसेज मिलने में देरी
ट्राई के नए नियमों के मुताबिक, सितंबर 2024 से फर्जी कॉल और मैसेज से छुटकारा मिल गया था. ट्राई ने सितंबर से अन-रजिस्टर्ड मैसेज और कॉल को ब्लॉक करने का निर्देश दिए थे. हालांकि, इससे ऑनलाइन पेमेंट, ऑनलाइन शॉपिंग और ऑनलाइन डिलीवरी में थोड़ी दिक्कत हुई और OTP और मैसेज मिलने में विलंब हुआ.
स्पेलिंग मिस्टेक ने बना दिया Google
देश और विदेश की जानकारी जब भी इंटरनेट पर ढूंढना होता है तो सबसे पहले हर किसी के दिमाग में Google का नाम आ जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस सर्च इंजन गूगल को आज पूरी दुनिया जानती है उसका शुरुआती नाम कुछ और था?
स्पेलिंग मिस्टेक से पड़ा नाम
Google का नाम आज भले ही देश-दुनिया में प्रसिद्ध हो चुका है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि गूगल नाम कोई सोच-समझकर नहीं रखा गया था बल्कि एक छोटी सी स्पेलिंग गलती की वजह से यह नाम पड़ गया. इस मशहूर सर्च इंजन की कहानी 1995 में Stanford University से शुरू होती है. यहां पढ़ने वाले दो छात्रों Larry Page और Sergey Brin ने इंटरनेट पर मौजूद जानकारी को बेहतर तरीके से खोजने के लिए एक नया सिस्टम बनाने का विचार किया. शुरुआत में दोनों की सोच कई मामलों में अलग-अलग थी और अक्सर उनकी बहस भी हो जाती थी लेकिन धीरे-धीरे उनकी यही अलग सोच एक मजबूत साझेदारी में बदल गई. इसी साझेदारी से आगे चलकर दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन तैयार हुआ.
शुरुआती दौर में इस सर्च इंजन का नाम Backrub रखा गया
बताया जा रहा है कि जब ये दोनों छात्र अपने हॉस्टल के कमरों में बैठकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे तब उन्होंने एक ऐसा सर्च सिस्टम तैयार किया जो वेबसाइटों के बीच मौजूद लिंक का विश्लेषण करता था. यानी किसी वेबसाइट की लोकप्रियता और महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जाता था कि कितनी दूसरी साइटें उससे जुड़ी हुई हैं. क्योंकि यह सिस्टम बैकलिंक का विश्लेषण करता था इसलिए शुरुआती दौर में इस सर्च इंजन का नाम Backrub रखा गया.
टीम ने Googol नाम पर विचार किया
कुछ समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि Backrub नाम उतना प्रभावशाली नहीं है इसलिए नए नाम की तलाश शुरू हुई. इस दौरान टीम ने Googol नाम पर विचार किया. Googol गणित का एक शब्द है जिसका मतलब होता है 1 के बाद 100 शून्य. इस नाम के जरिए यह बताने की कोशिश थी कि यह सर्च इंजन इंटरनेट पर मौजूद बेहद बड़ी मात्रा में डेटा को संभाल सकता है.
लेकिन असली ट्विस्ट यहीं आया. जब डोमेन नेम की उपलब्धता जांची जा रही थी तब Sean Anderson नाम के एक छात्र ने गलती से Googol की जगह Google टाइप कर दिया. यह एक साधारण टाइपो था लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि google.com डोमेन उपलब्ध था. Larry Page को यह नाम पसंद आ गया और उन्होंने उसी गलत स्पेलिंग वाले नाम को मंजूरी दे दी. इसके कुछ ही घंटों बाद यह डोमेन रजिस्टर कर लिया गया और इस तरह दुनिया को Google नाम मिला.
4 सितंबर 1998 से अधिकारिक शुरुआत
आधिकारिक रूप से Google की शुरुआत 4 सितंबर 1998 को हुई थी. शुरुआती दिनों में कंपनी का काम एक छोटे से गैरेज से शुरू हुआ था लेकिन धीरे-धीरे यह एक वैश्विक टेक कंपनी बन गई. आज गूगल सिर्फ सर्च इंजन ही नहीं बल्कि ईमेल, मैप्स, क्लाउड और कई डिजिटल सेवाओं के जरिए दुनिया भर के अरबों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है.
27 सितंबर को वर्षगांठ मनाता है गूगल
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी की स्थापना 4 सितंबर को हुई थी लेकिन गूगल हर साल 27 सितंबर को अपनी वर्षगांठ मनाता है. इस दिन कंपनी अपनी उपलब्धियों और इंटरनेट की दुनिया में अपने योगदान को याद करती है. एक छोटी सी स्पेलिंग गलती से शुरू हुआ यह नाम आज टेक्नोलॉजी की दुनिया की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है.

