मध्य प्रदेश में बर्ड फ्लू का पहला मामला सामने आया है. यह मामला राज्य के छिंदवाड़ा में पाया गया है. राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मालिकों को क्वारंटाइन कर दिया था.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Bird Flu Case in MP: मध्य प्रदेश में बर्ड फ्लू ने एक बार फिर एमपी में दस्तक दे दी है. MP के छिंदवाड़ा में तीन बिल्लियों के सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं. बिल्लियों के सैंपल दो चिकन शॉप से कलेक्ट किए गए थे. यहां तीन बिल्लियों की मौत हो गई थी जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मटन मार्केट की दुकानें सील कर दीं.
छिंदवाड़ा में बिल्लियों का लिया गया था सैंपल
बिल्लियों के सैंपल को लैब में भेजा गया. लैब में H5N1 की पुष्टि होने पर छिंदवाड़ा के कलेक्टर ने एक किलोमीटर के इलाके को संक्रमित क्षेत्र घोषित कर दिया है. इलाके के सभी चिकन सेंटर अगले आदेश तक बंद रखने के लिए भी कहा गया है. जिले में बर्ड फ्लू को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
बिल्लियों में पुष्टि के बाद इलाके को किया गया सील
बताया जा रहा है कि बिल्लियों की मौत के बाद उनके सैंपल पशु चिकित्सा विभाग ने कलेक्ट कर भोपाल भेजा था. जब सैंपल पॉजिटिव पाए गए तो उस इलाके को लेकर प्रतिबंध घोषित किया गया जहां बिल्लियों की मौत हुई थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिला कलेक्टर शैलेंद्र सिंह ने कहा है कि छिंदवाड़ा से सैंपल लिए गए थे जिनमें तीन बिल्लियां पॉजिटिव पाई गई हैं. इलाके को संक्रमण क्षेत्र घोषित कर दिया गया है.
बिल्लियों में पुष्टि के बाद इलाके को किया गया सील
बताया जा रहा है कि बिल्लियों की मौत के बाद उनके सैंपल पशु चिकित्सा विभाग ने कलेक्ट कर भोपाल भेजा था. जब सैंपल पॉजिटिव पाए गए तो उस इलाके को लेकर प्रतिबंध घोषित किया गया जहां बिल्लियों की मौत हुई थी. जिला कलेक्टर शैलेंद्र सिंह ने कहा कि छिंदवाड़ा से सैंपल लिए गए थे जिनमें तीन बिल्लियां पॉजिटिव पाई गई हैं. इलाके को संक्रमण क्षेत्र घोषित कर दिया गया है.
बर्ड फ्लू का पहला केस 1997 में आया था सामने
बर्ड फ्लू के फिलाहल दुनिया में कई स्ट्रेन मौजूद हैं. इनमें H5N1, H7N9, H5N6 और H5N8 शामिल है. सबसे पहली बार यह बीमारी चीन में 1997 में सामने आई थी. इसे एवियन इन्फ्लूएंजा भी कहा जाता है.यह श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है जो पक्षियों से इंसानों में भी संक्रमित हो सकता है इसलिए जब छिंदवाड़ा में टीम सैंपल कलेक्ट करने आई तो उसने पीपीई किट पहन रखा था. भारत में सबसे पहला मामला 2006 में सामने आया. पहला केस महाराष्ट्र के पोल्ट्री फार्म में कन्फर्म हुआ था. अब तक इस बर्ड ब्लू के प्रकोप के कारण कई पक्षियों को मारा गया है. ताकि उनका संक्रमण आगे ना फैले.
मालिकों को यह बीमारी नहीं पाई गई
समाचार एजेंसी पीटीआई ने गुरुवार को एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि मध्य प्रदेश में एच5एनआई से संक्रमित पाई गई तीन से चार बिल्लियों के मालिकों को यह बीमारी नहीं हुई है. फिर भी, पक्षियों से स्तनधारियों में H5N1 वायरस के उत्परिवर्तन ने इस बात की चिंता बढ़ा दी है कि यह मनुष्यों को भी प्रभावित कर सकता है.
चार बिल्लियों के रक्त, नाक और गुदा के नमूनों में H5NI की पुष्टि हुई
मध्य प्रदेश के पशुपालन विभाग के निदेशक पीएस पटेल ने पीटीआई को बताया, “जनवरी में छिंदवाड़ा से भोपाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान में भेजी गई तीन से चार बिल्लियों के रक्त, नाक और गुदा के नमूनों में H5NI की पुष्टि हुई है. हालांकि, उनके मालिकों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है.”
राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मालिकों को क्वारंटाइन कर दिया था
पटेल ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि बिल्लियों में एवियन फ्लू की पुष्टि होने के बाद, राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मालिकों को क्वारंटाइन कर दिया था और उनकी निगरानी कर रहे थे. पटेल ने कहा कि “हालांकि, हमने अपनी सतर्कता कम नहीं की है. हम समय-समय पर छिंदवाड़ा और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों से बिल्लियों और पक्षियों के नमूने भेज रहे हैं, लेकिन उनमें से किसी में भी एवियन वायरस की पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल इसके मनुष्यों में फैलने को लेकर चिंता करने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है,”

