घटना सोमवार की रात की बताई जा रही है. फिलहाल, पुलिस की टीम शराब के स्त्रोत की जांच कर रही है
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Amritsar Poisonous Alcohol Case: अमृतसर के मजीठा एरिया में जहरीली शराब पीने से 14 लोगों की मौत हो गई है जबकि 6 लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं. अमृतसर पुलिस के मुताबिक, मजीठा थाने में इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.
घटना सोमवार (12 मई) की रात की बताई जा रही है. फिलहाल, पुलिस की टीम शराब के स्त्रोत की जांच कर रही है. प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि रविवार (11 मई) की शाम को एक ही जगह से यह शराब खरीदी गई थी. इनमें से कुछ लोगों की सोमवार की सुबह ही मौत हो गई थी, लेकिन पुलिस को सूचना नहीं मिली.
जहरीली शराब मामले में हुई गिरफ्तारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमृतसर डिप्टी कमिश्नर ने बताया, ”जहरीली शराब के जो भी सप्लायर थे और जो लोग भी इसमें शामिल थे, उनकी गिरफ्तारी की जा चुकी है. अस्पताल में 6 लोग भर्ती हैं. जहरीली शराब का असर 5 गांव में देखा गया है. आशंका है कि इन सभी लोगों ने एक ही सप्लायर और एक ही जगह से शराब खरीदी है. सरकार की तरफ से पूरी सहायता दी जा रही है.”
मरने वालों में ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर
मजीठा में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से मरने वालों में ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर हैं. अधिकारियों ने बताया कि भंगाली, पातालपुरी, मरारी कलां, तलवंडी खुम्मन, करनाला, भंगवान और थेरेवाल गांवों में मौतें हुईं. पुलिस ने बताया कि मजीठा के पुलिस उपाधीक्षक अमोलक सिंह और मजीठा थाने के प्रभारी अवतार सिंह को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है.
दो अधिकारी हुए निलंबित
आबकारी विभाग के दो अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है. पुलिस जांच में पता चला है कि जहरीला शराब बनाने के लिए औद्योगिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला रसायन मेथनॉल ऑनलाइन थोक में खरीदा गया था. पीड़ितों के परिवार व्यथित हैं. अपने भाई जोगिंदर सिंह को खो चुकी मंजीत कौर ने कहा कि अब उनके परिवार के लिए गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा.
नशे के खिलाफ लड़ाई जारी
मनीष सिसोदिया ने पंजाब के लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई को एक साल से जारी है. पिछले इस एक साल में 2000 किलो नशा पकड़ा गया, 17 हज़ार लोग नशे के धंधे में गिराफ्तार किया गया. इस पूरे काम में सबसे बड़ी मदद Village Defence Committees ने की है. 13,000 VDC बनी हैं, हर VDC में 10 लोग हैं. हर 15 दिन अपने गाँव-वार्ड में बैठक कर चर्चा करते हैं कि नशा बिक तो नहीं रहा, फिर सरकारी ऐप पर शिकायत करते हैं. शिकायत करने वाले का नाम गुप्त रहता है. अगर कहीं लोकल पुलिस की मिलीभगत की बात आती है, तो अलग टीम भेजकर कार्रवाई होती है. इसका असर साफ दिख रहा है. आज पंजाब के हज़ारों गाँव नशे से मुक्त हो चुके हैं.
2024-25 में ड्रग तस्करों की संपत्तियों को फ्रीज किया गया
पंजाब पुलिस ने वर्ष 2024 में लगभग 330 करोड़ रुपये और वर्ष 2025 में 270 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को फ्रीज किया. यह कुल राशि पिछले दो वर्षों में ड्रग तस्करों की फ्रीज की गई संपत्तियों का बड़ा हिस्सा है. उल्लेखनीय है कि देशभर में 2024 में ड्रग मामलों में फ्रीज की गई कुल संपत्तियों का करीब 50 प्रतिशत पंजाब से संबंधित था.
केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, पूरे नेटवर्क पर नजर
बताया जा रहा है कि पुलिस अब केवल ड्रग बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है. तस्करी से अर्जित धन और संपत्तियों को ट्रैक किया जा रहा है. इसमें बैंक खाते, शेल कंपनियां, बेनामी निवेश, महंगे वाहन, मकान और कृषि भूमि शामिल हैं, जिन्हें कानून के तहत फ्रीज किया गया.
आर्थिक दबाव से नशा कारोबार कमजोर होगा
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ड्रग तस्करी का पूरा नेटवर्क अवैध कमाई पर आधारित है. अब तस्करों को यह एहसास होगा कि उनकी कमाई और संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी. इससे ड्रग कारोबार का जोखिम बढ़ेगा और नए लोग इस धंधे में शामिल होने से बचेंगे. पंजाब के कई जिलों में तस्करों की संपत्तियों पर कार्रवाई की जा चुकी है. मकान, व्यावसायिक इमारतें और कृषि भूमि जैसी संपत्तियों को फ्रीज कर संदेश दिया गया है कि नशे से अर्जित धन कानून से बच नहीं सकेगा.

