जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक आयोजित होगी, आतंकवादी घटनाओं के मद्देनजर शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
New Delhi: नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर हमले समेत हाल में हुई कई आतंकवादी घटनाओं के मद्देनजर शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। शाह ने 16 जून को एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक भी बुलाई है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के शीर्ष अधिकारियों समेत अन्य लोग शामिल होंगे। सूत्रों ने कहा कि गृह मंत्री ने रविवार की बैठक में भी सालाना अमरनाथ यात्रा की तैयारियों का जायजा लिया था जो 29 जून से शुरू हो रही है।
चार दिनों में चार जगहों पर हुए आतंकी हमले
उस बैठक में गृह मंत्री को जम्मू-कश्मीर के हालात और वहां आतंकवादी घटनाओं के बाद उठाए गए कदमों से अवगत कराया गया। आतंकवादियों ने पिछले चार दिनों में रियासी, कठुआ और डोडा जिलों के चार स्थानों पर हमला किया है, जिसमें नौ तीर्थयात्रियों के अलावा एक सीआरपीएफ जवान की मौत हो गई, जबकि सात सुरक्षाकर्मियों समेत अन्य लोग घायल हो गए।कठुआ जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी भी मारे गए और उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया।
तीर्थ यात्रियों की बस में हुआ था आतंकी हमला
आतंकवादियों ने मंगलवार को भद्रवाह के चटरगल्ला में राष्ट्रीय राइफल्स और पुलिस की एक संयुक्त जांच चौकी पर गोलीबारी की, जबकि बुधवार को डोडा जिले के गंदोह इलाके में एक निगरानी दल पर हमला किया जिसके कारण एक पुलिसकर्मी सहित सात सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।अधिकारियों ने बताया कि नौ जून को तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर हुए हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों का पता लगाने और उन्हें मार गिराने के लिए शुरू किया गया खोजबीन अभियान जारी है।अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा बलों ने दो और आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना के बाद बृहस्पतिवार को कठुआ के सैदा सुखल गांव में नए सिरे से तलाशी और घेराबंदी अभियान शुरू किया। यह अभियान 15 घंटे से अधिक के उस अभियान के बाद शुरू किया गया है जिसके तहत गांव में दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए थे और एक सीआरपीएफ जवान की भी मौत हो गई थी।
आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
गृह मंत्री शाह ने कहा कि केंद्र और गृह मंत्रालय नीति और रणनीति दस्तावेज तैयार कर सकते हैं और अपनी भूमिका भी निभा सकते हैं, लेकिन कानून और व्यवस्था एक ‘राज्य’ का विषय होने के कारण, आतंक के खिलाफ असली लड़ाई राज्य पुलिस बलों को ही लड़नी होगी। उन्होंने ‘सरकार के सभी अंगों’ के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि सभी केंद्रीय एजेंसियां खुफिया जानकारी इकट्ठा करने से लेकर कार्रवाई करने तक, हर तरह से राज्यों का समर्थन करेंगी। लेकिन जब तक ‘आतंक के प्रति जीरो टॉलरेंस’ के मूड के साथ एक समूह नहीं बन जाता, तब तक राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति सफल नहीं हो सकती।
गृह मंत्री ने राज्यों से आपस में और केंद्रीय एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय के साथ काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जबकि राज्यों की भौगोलिक और संवैधानिक सीमाएं हो सकती हैं, आतंकवादी अभियान अंतर्राज्यीय और वैश्विक सीमाओं से परे हैं। उन्होंने थानों से कहा कि वे अपने अधिकारियों को NIA द्वारा बनाए गए डेटाबेस सहित विभिन्न पुलिस / आपराधिक डेटाबेस का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग में प्रशिक्षित करके आतंकवाद के खिलाफ तैयार रहें।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘NIA को ‘जानने की आवश्यकता’ दृष्टिकोण से ‘साझा करने की आवश्यकता’ और अंततः ‘साझा करने के कर्तव्य’ दृष्टिकोण की ओर बढ़ना चाहिए।’ शाह ने कहा कि आतंकी वित्तपोषण और क्रिप्टो जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए, पुलिस स्टेशनों से लेकर DGP कार्यालय तक एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक मॉडल आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS), मॉडल विशेष कार्य बल (STF) और मॉडल पुलिस प्रशिक्षण नियमावली लेकर आई है, जिसे अपनाने पर, आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए एक सामान्य संरचना और मंच के रूप में काम करेगा।

