जबलपुर, इंदौर, भोपाल सहित प्रदेश भर में लगाया गया प्रतिबंध, संबंधित एसडीएम को दिए गए निर्देश
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Carbide Gun News : किसी भी दुकान या गोदाम में कार्बाइड गन या इसके निर्माण में प्रयुक्त सामग्री का भंडारण या विक्रय पाये जाने पर उसे तत्काल जप्त कर विधिसम्मत कार्रवाई करने कें निर्देश कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने आज 24 आक्टूबर को जारी किए हैं. इस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी जिले में पदस्थ सभी अनुविभागीय दंडाधिकारियों को दिए हैं. कुछ इसी प्रकार के आदेश इंदौर, भोपाल सहित प्रदेश भर के कलेक्टरों ने जारी किए हैं. यह आदेश सरकार की सख्ती के बाद लिए गए हैं.
बतादें कि कलेक्टर श्री सिंह द्वारा यह आदेश दीपावली पर्व के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्टील अथवा पीवीसी पाईप से निर्मित कार्बाइड गन में कैल्शियम कार्बाइड भरकर प्रयोग करने से कई व्यक्तियों की आंख खराब हो गई एवं चेहरे पर गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उक्त आदेश जारी किए गए हैं.
नागरिक सुरक्षा अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
आदेश में कलेक्टर ने सभी एसडीएम को यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये हैं कि उनके अधीनस्थ क्षेत्र में किसी भी किराना या आतिशबाजी की दुकान अथवा अन्य किसी प्रतिष्ठान में तथाकथित कार्बाइड गन अथवा उसके निर्माण में प्रयुक्त सामग्री (कैल्शियम कार्बाइड आदि) का विक्रय न हो. आदेश में उल्लेख किया गया है कि यदि किसी दुकान या गोदाम में इस सामग्री का भंडारण पाया जाता है तो तत्काल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत भंडारित वस्तुओं को तुरंत जप्त किया जाए और विनिष्ट करने की कार्रवाई की जाये.
14 बच्चों की चली गई आंख
मिली जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में दिवाली के दौरान प्रतिबंधित कार्बाइड गन से हुए हादसे में 14 बच्चों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई. 14 बच्चों ने बैन की गई इन कार्बाइड गनों का इस्तेमाल करते हुए अपनी हमेशा के लिए आंखों की रोशनी खो दी है.
जुगाड़ से बनाई गई है गन
बताया जा रहा है कि ये गन जुगाड़ से बनाई गई है. इसके विस्फोटक से पिछले तीन दिनों 122 से ज्यादा बच्चों की आंखों में चोट आई थी. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, राज्यभर में 300 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से सिर्फ भोपाल में ही 186 केस सामने आए हैं. इनमें कॉर्निया जलने और रेटिना को नुकसान जैसे गंभीर चोटें शामिल हैं, जो रासायनिक धमाकों से हुईं.

