पार्क के खुले जंगल में चीतों की संख्या अब 17 हो गई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश एशिया से विलुप्त हो चुके चीतों के लिए मां का आंचल बन चुका है.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
MP Cheetah Project News: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एमपी के श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में गामिनी के साथ चार शावकों की रिहाई से पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा. मादा चीता ‘गामिनी’ और चार शावकों को सफलतापूर्वक बाड़े से खुले जंगल मं छोड़ा गया. कूनो नेशनल पार्क में जंगल सफारी करने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चीता प्रोजेक्ट (Cheetah Project) के लिए आज का दिन उल्लेखनीय बताया. उन्होंने मध्य प्रदेस के लिए भी सौभाग्य की बात बताया.
गामिनी ने पिछले साल छह शावकों को जन्म दिया था
बता दें कि गामिनी और चार शावकों को छोड़े जाने से कूनो नेशनल पार्क में स्वच्छंद विचरण करने वाले चीतों की कुल संख्या 17 हो गई है. पार्क प्रबंधन के मुताबिक गामिनी ने पिछले साल छह शावकों को जन्म दिया था. 10 मार्च 2024 को जन्मे छह में से दो शावकों की मौत हो गई थी. इससे पहले, 21 फरवरी को भी पांच चीते कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए थे.
प्रोजेक्ट चीता को बड़ी सफलता
- कूनो में चार शावकों का जन्म हुआ है.
- मादा चीता ‘गामिनी’ ने दिया चार शावकों को जन्म दिया है.
- देश में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो गई है.
शावक पूरी तरह से स्वास्थ्य
मीडिया रिपोर्ट से पता चलाा है कि कूनो प्रबंधन के अनुसार, ‘गामिनी’ और उसके चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं. वन विभाग की टीम उन पर 24 घंटे निगरानी रख रही है. प्रबंधन के अनुसार, शावकों का जन्म खुले में होना इस बात का प्रमाण है कि कूनो का पर्यावरण चीतों के लिए अनुकूल हो गया है. इस सफलता के बाद उम्मीद है कि भारत में चीतों की संख्या तेजी से बढ़ेगी.
1952 में विलुप्त घोषित हुआ था चीता
बताया जा रहा है कि 1952 में भारत में चीतों को ऑफिशियल तौर पर विलुप्त घोषित कर दिया गया था. इसके बाद फिर से चीता को बसाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया था. प्रोजेक्ट चीता के लिए कूनो नेशनल पार्क चुना गया था. कूनो नेशनल पार्क को चुनने के पीछे की सबसे बड़ी वजह यहां का वातावरण अफ्रीकी चीतों के लिए अनुकूल माना गया था. जिसकी वजह से मध्य प्रदेश में चीते छोड़े जा रहे हैं और एमपी को चीता स्टेट घोषित किए जाने की दिशा में काम हो रहा है.
मुख्यमंत्री ने दी बधाई
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुशखबरी शेयर की है. उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा- “अब मध्य प्रदेश चीतों के ‘पुनरुद्धार’ का भी मुख्य केंद्र बन रहा है. ‘गामिनी’ से जन्मी भारतीय मूल की 25 माह आयु की मादा चीता द्वारा खुले जंगलों में 4 शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि मध्य प्रदेश की धरती चीतों के वंश विस्तार के लिए पूरी तरह अनुकूल है.”
सीएम मोहन यादव ने लिखा- “प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सफल हो रही है. कूनो के प्रबंधकों और वन्यजीव चिकित्सकों को बहुत-बहुत बधाई.”
गामिनी’ ने 2024 में भी 6 शावकों को जन्म दिया था
बताया जा रहा है कि गामिनी ने 2024 में भी 6 शावकों को जन्म दिया था. जिसकी फोटो केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया था. सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होने जानकारी दी थी कि मादा चीता गामिनी की विरासत आगे बढ़ी! खुशी का कोई अंत नहीं है, ये पांच नहीं, बल्कि छह शावक हैं. गामिनी से पांच शावकों के जन्म की खबर के एक हफ्ते बाद अब यह पुष्टि हो गई है कि दक्षिण अफ्रीकी चीता गामिनी ने छह शावकों को जन्म दिया था. पहली बार मां बनने वाली गामिनी छह शावकों को जन्म देने वाली पहली मादा चीता बन गई है. जानकारी के मुताबिक, अब तक किसी भी मादा चीता ने अधिकतम पांच शावकों को जन्म दिया है.
चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के तहत लाए गए थे चीते
गौरतलब है कि चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2022 को अपने जन्मदिन के अवसर पर नामीबिया से आठ चीतों को लाकर श्योपुर के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा था. इनमें से ज्वाला चीता ने मार्च 2023 को चार शावकों को जन्म देकर बड़ी खुशखबरी दी थी. हालांकि भीषण गर्मी और कमजोरी के चलते इनमें से तीन शावकों की मौत हो गई थी. एक शावक पूरी तरह स्वस्थ है और एक साल का होने वाला है.
चीतों को लाकर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बसाया गया था
वहीं, 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाकर कूनो में बसाया गया था। इनमें से गामिनी पहली मादा चीता है, जिसने भारत की धरती पर शावकों को जन्म दिया है. बीते 10 मार्च को खबर आई थी कि गामिनी ने पांच शावकों को जन्म दिया है, लेकिन सोमवार को गामिनी द्वारा छह शावकों को जन्म देने की पुष्टि हुई है. इससे पहले नामीबिया से लाई गई ज्वाला ने दो बार और आशा ने एक बार शावकों का जन्म दिया है.

