कैसे मालेगांव ब्लास्ट में प्रज्ञा ठाकुर समेत 7 आरोपी हुए बरी, NIA कोर्ट के फैसले से समझें
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Malegaon Blast case: एनआईए अदालत ने मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित और अन्य सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया. 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव शहर में एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल पर बंधे विस्फोटक उपकरण में विस्फोट होने से छह लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए थे.
सातों आरोपी बरी हुए
मालेगांव बम ब्लास्ट केस में सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया गया है. प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी सभी बरी हो गए. अब सवाल है कि कोर्ट में ऐसा क्या हुआ कि सभी आरोपी बरी हो गए. कोर्ट ने जो टिप्पणी की है और जो फैसला दिया है, उससे समझ आ जाएगा.
ये अंतर पाया गया
- कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि न तो बम मिला था और न ही आरडीएक्स और न ही कोई फिंगरप्रिंट.
- कोर्ट ने कहा कि एटीएस और एनआईए की चार्जशीट में काफी अंतर है.
- अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि बम मोटरसाइकिल में था.
- कर्नल पुरोहित के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला कि उन्होंने बम बनाया या उसे सप्लाई किया.
- यह भी साबित नहीं हुआ कि बम किसने लगाया.
- घटना के बाद विशेषज्ञों ने सबूत इकट्ठा नहीं किए, जिससे सबूतों में गड़बड़ी हुई.
- धमाके के बाद पंचनामा ठीक से नहीं किया गया,
- घटनास्थल से फिंगरप्रिंट नहीं लिए गए.
- बाइक का चेसिस नंबर कभी रिकवर नहीं हुआ.
- साथ ही, वह बाइक साध्वी प्रज्ञा के नाम से थी, यह भी सिद्ध नहीं हो पाया.
- अदालत ने साफ कर दिया कि सातों आरोपी निर्दोष हैं.
- केवल संदेह के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती है.
- कोर्ट ने यह भी टिप्पणी कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है.
- यूएपीए लागू नहीं होता – ये मामला बनता ही नहीं.
19 अप्रैल को सुरक्षित हुआ था फैसला
दरअसल, इस मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से सुनवाई और अंतिम दलीलें पूरी करने के बाद 19 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रखा गया था. इस मामले में सात लोग, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय शामिल हैं, जिन पर मुकदमा चल रहा था. इन सभी लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे. सभी आरोपी वर्तमान में जमानत पर रिहा हैं.

