किसानों को उनकी फसलों के बेहतर दाम मिल सकेंगे
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Modi Government increased MSP: किसानों को मोदी सरकार ने दिवाली पर बड़ा गिफ्ट दिया है. सरकार ने रबी फसलों की MSP बढ़ा दी है. केंद्र सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए रबी की 6 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की घोषणा की है. इस फैसले के तहत अलग-अलग फसलों के MSP में वृद्धि की गई है, जिससे किसानों को उनकी फसलों के बेहतर दाम मिल सकेंगे.
नए अधिसूचना के अनुसार:
- – गेहूं का MSP 2,425 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले 2,275 रुपये था।
- – जौ का MSP 1,980 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले 1,850 रुपये था।
- – चना का MSP5,650 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले 5,440 रुपये था।
- – मसूर (लेंस) का MSP 6,700 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले 6,425 रुपये था।
- – सरसों का MSP 5,950 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले 5,650 रुपये था।
- – कुसुम (सफ्लॉवर) का MSP 5,940 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले5,800 रुपये था।
- – सरकार का यह कदम किसानों को उनकी फसलों के उचित मूल्य दिलाने के मकसद से उठाया गया है.
2024-25 में भी एमएसपी बढ़ोत्तरी को मिली थी मंजूरी
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 में भी दिवाली से पहले किसानों को बड़ा तोहफा देते हुए रबी की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की मंजूरी दी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया था. गेहूं का समर्थन मूल्य 110 रुपए प्रति क्विंटल बढ़कर 2,125 रुपए प्रति क्विंटल किया गया था, वहीं गेहूं, और दालों के साथ-साथ केंद्र सरकार ने रबी की 6 अन्य फसलों की MSP में बढ़ोतरी की थी.
मसूर के MSP में 500 रुपए का इजाफा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने गेहूं समेत सभी रबी फसलों की MSP में 3 से 9% बढ़ोतरी की सिफारिश की थी। सरकार ने गेहूं की MSP में 110, जौ में 100, चना में 105, मसूर मे 500, सरसों में 400 और कुसुम में 209 रुपए की वृद्धि की थी.
समर्थन मूल्य में हुआ था इजाफा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने फसल वर्ष 2023-24 के लिए मसूर के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 500 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया था. वहीं सरसों और कैनोला के MSP में 400-400 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी.
क्या है MSP या मिनिमम सपोर्ट प्राइज?
MSP वह न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी गारंटेड मूल्य है जो किसानों को उनकी फसल पर मिलता है. भले ही बाजार में उस फसल की कीमतें कम हो. इसके पीछे तर्क यह है कि बाजार में फसलों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का किसानों पर असर न पड़े. उन्हें न्यूनतम कीमत मिलती रहे.
सरकार हर फसल सीजन से पहले CACP यानी कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस की सिफारिश पर MSP तय करती है. यदि किसी फसल की बम्पर पैदावार हुई है तो उसकी बाजार में कीमतें कम होती हैं, तब MSP उनके लिए फिक्स एश्योर्ड प्राइज का काम करती है. यह एक तरह से कीमतों में गिरने पर किसानों को बचाने वाली बीमा पॉलिसी की तरह काम करती है.
अप्रैल से शुरू होगा विपणन वर्ष
बता दें कि अप्रैल से गेहूं के सेशन 2026-27 की शुरुआत होगी और अधिकांश खरीद जून तक पूरी हो जाएगी. केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि एमएसपी का निर्णय कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों पर आधारित है. इसी दौरान देश भर में गेहूं के रख-रखाव का प्रबंधन भी शुरू हो जाता है और सरकारी वेयर हाउस के साथ प्राइवेट वेयर हाउस भी भरे जाते हैं, जन्हें सरकार का समर्थन प्राप्त होता है.
गेहूं उत्पादन का रखा रिकॉर्ड लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के लिए 119 मिलियन टन का रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि 2024-25 में 117.5 मिलियन टन अनुमानित उत्पादन रहा था. बता दें कि गेहूं रबी सत्र की मुख्य फसल है. मध्य प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है. इसी कारण कृषि से संबंधित अवार्ड भी मध्य प्रदेश को सबसे ज्यादा मिले हैं. यहां के किसान कृषि उत्पादन में अग्रणी हैं और प्रत्येक फसल का उत्पादन करते हैं. इसी कारण देश भर में प्रदेश का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाता है.

