नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के सफाई वर्करों में सर्वाधिक घालमेल, कभी भी बढ़ा लेते हैं संख्या, 1400 आउटसोर्स कर्मी ब्लॉक
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur News : एमपी जबलपुर के नगर निगम में बोगस कर्मचारियों की हाजिरी को लेकर बड़ा घालमेल है, जिसकी जानकारी नगर निगम कमिश्नर को भी है. वर्तमान में एईबीएएस के माध्यम से हाजिरी लगाई जा रही है. जिसमें कई बोगस कर्मचारियों का खुलासा होता जा रहा है और ऐसे कर्मचारी ब्लॉक किए जा रहे हैं. लेकिन इससे पहले भी ऐसे ही बोगस आउटसोर्स कर्मचारियों गड़बड़झाला था, जिससे जांच कराए जाने के बाद ही पर्दा उठ सकता है. लेकिन अधिकारियों को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं प्रभावशाली लोगों तक जांच की आंच न पहुंच जाए. जिससे नौकरी पर संकट खड़ा हो जाए, इसी डर के चलते बोगस आउटसोर्स कर्मचारियों की जांच ही नहीं कराई जा रही है.
नगर निगम जबलपुर एमपी में आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (एईबीएएस) पोर्टल को प्रारंभ हुए करीब 6 माह हो रहे हैं, जिसके माध्यम से हाजिरी लगाई जा रही है. इस पोर्टल में आउटसोर्स कर्मचारियों की हाजिरी रजिस्टर्ड संख्या के आधार पर आज तक पूरी नहीं हो पाई. हर माह 1500 से 2000 के करीब आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या कम पाई गई है. इसके बाद भी नगर निगम के उच्च अधिकारियों ने गंभीरता से जांच नहीं कराई और वर्षों से बोगस आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या के आधार पर भुगतान करते रहे, जबकि निगम के पोर्टल में 2504 नियमित, विनियमित, संविदा, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं. इसके अलावा 4601 आउटसोर्स कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं, यानी एईबीएएस पोर्टल पर कुल 7105 रजिस्टर्ड हैं. इनमें से 1635 कर्मचारी हाजिरी नहीं लगा रहे थे. ऐसे बोगस 1635 कर्मचारियों में से 1400 आउटसोर्स कर्मचारियों को निगमायुक्त द्वारा आनन-फानन में ब्लॉक करा दिया गया, लेकिन पोर्टल की हाजिरी गणना के अनुसार अभी भी 235 रजिस्टर्ड कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके द्वारा अभी भी हाजिरी नहीं लगाई जा रही है. इनके विरुद्ध अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है. इतना ही नहीं विभागीय नोटशीट में जो 5779 कर्मचारी बताए जा रहे हैं और एईबीएएस पोर्टल में 1178 अनरजिस्टर्ड हैं, ऐसे 1178 अनरजिस्टर्ड कर्मचारियों की अभी तक जांच क्यों शुरू नहीं हुई? यह सबसे बड़ा सवाल है.
नोटशीट पर 5779 कर्मियों का जिक्र
पोर्टल को प्रारंभ हुए अभी केवल 6 माह ही हुए हैं, जबकि आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर रकम निकालने की धांधली लंबे समय से चल रही है. जिसका नगर निगम की विभागीय नोटशीट में भी जिक्र है. विभागवार कर्मचारियों की संख्या 5779 दर्शाई जा रही है और हर माह इन आउटसोर्स कर्मचारियों को भुगतान करने का बिल भी तैयार किया जाता है. जिसका लेखाजोखा न केवल विभागीय उच्च अधिकारियों तक पहुंचता है, बल्कि प्रभारी अधिकारी के भी हस्ताक्षर हो रहे हैं. ऐसे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच क्यों नहीं हो रही है? यह समझ से परे है.
स्वास्थ्य विभाग में घटाए-बढ़ाए जाते हैं कर्मचारी
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी घटाए-बढ़ाए जाते हैं. इसकी जानकारी निगमायुक्त को भी है, तभी तो नर्मदा जन्मोत्सव के बहाने गौरीघाट और तिलवाराघाट की साफ-सफाई के नाम पर 100 कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की नोटशीट चलाई गई थी, जिसे निगमायुक्त ने सिरे से नकार दिया था और मौजूदा कर्मचारियों से ही काम कराने का आदेश दे दिया था. इतना ही नहीं कभी त्योहार, तो कभी तालाब साफ-सफाई के नाम पर आउटसोर्स सफाईकर्मी बढ़ाने की मांग की जाती है, उस पर अभी कुछ दिनों से अंकुश लगा है. लेकिन इससे पहले जितने कर्मचारी घटाए-बढ़ाए गए हैं, उनकी जांच क्यों नहीं हो रही है? यह सबसे बड़ा सवाल है, क्योंकि स्वास्थ्य अधिकारी 3500 कर्मचारियों की संख्या बता रही हैं, जबकि विभागीय नोटशीट में 3910 आउटसोर्स कर्मचारियों कार्यरत बताए जा रहे हैं.
संख्या बढ़ी, तो नहीं होगी पेमेंट
आउटसोर्स कर्मचारियों की मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से लगातार की जा रही है, यदि किसी एजेंसी द्वारा कर्मचारी बढ़ाकर बिल पेश किया जाता है तो उसका भुगतान रोक दिया जाएगा. अभी हमारे द्वारा 1400 कर्मचारियों के नाम काटे गए हैं. इसके अलावा नर्मदा घाटों की साफ-सफाई के नाम पर 100 कर्मचारी लगाने की नोटशीट आई थी, उसे भी हमने रोका है. मौजूदा सफाई कर्मियों से साफ-सफाई कराई जाएगी. पुराना भुगतान हो चुका है, उसमें पार्षद से लेकर सभी ने कर्मचारियों की संख्या को अप्रूव्ड किया है, उस पर हमें सवाल करने का हक नहीं है.
रामप्रकाश अहिरवार, आयुक्त ननि
आउटसोर्स वर्करों की कुल संख्या
विभाग आउटसोर्स कर्मचारी
स्वास्थ्य विभाग 3910
ड्राइवर स्टोर 804
उद्यान 220
कम्प्यूटर ऑपरेटर 341
फायर 123
सिक्युरिटी 169
अतिक्रमण 100
प्रकाश विभाग 105
स्वच्छता सेल 07
कुल- 5779

