शास्त्रों में शिवलिंग पूजा के कठोर नियम बताए गए हैं. इन्हीं नियमों में एक है गर्भवती महिला का शिवलिंग को न छूना. आइए जानते हैं आखिर क्यों प्रेग्नेंट लेडी को नहीं छूना चाहिए शिवलिंग.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shivling Niyam: अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक भगवान भोलेनाथ की भक्ति साधारण नहीं है. हिंदू धर्म में शिव के लिंग स्वरूप को शिवलिंग माना गया है. सनातन धर्म में शिवलिंग का पूजन करने के लिए कड़े नियम बताए गए हैं. क्योंकि यह भगवान शिव का निराकार और अनंत स्वरूप है जिसे ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विनाश की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.
गर्भवती महिलाओं को शिवलिंग पूजन करने से जुड़ी कई मान्यताएं और मत प्रचलित हैं. कई लोग ऐसा मानते हैं कि, प्रेग्नेंट महिला को शिवलिंग स्पर्श नहीं करना चाहिए. आइए जानते हैं, आखिर ऐसा मानने के पीछे क्या कारण है.
अत्यंत शक्ति का केन्द्र हैं शिव
शास्त्रों में वर्णित है कि शिवलिंग ऊर्जा के अत्यंत शक्तिशाली केंद्र है. मान्यता है कि गर्भावस्था में महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों ही भावनात्मक व शारीरिक रूप से संवेदनशील होते हैं, ऐसे में तीव्र आध्यात्मिक ऊर्जा का सीधा संपर्क संतुलन बिगाड़ सकता है. कई विद्वानों का यह भी तर्क है कि, शिवलिंग की अत्यधिक ऊर्जा गर्भस्थ शिशु के लिए संवेदनशील हो सकती है. इसलिए कुछ परंपराओं में गर्भवती महिलाओं को शिवलिंग को सीधे स्पर्श करने की मनाही होती है.
ऊर्जा को अलग रखने की परंपरा
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शिवलिंग ब्रह्मचर्य, तप और संहार–सृजन की शक्ति का प्रतीक है, जबकि गर्भावस्था सृजन की अवस्था है. इसलिए दोनों अवस्थाओं की ऊर्जा को अलग रखने की परंपरा बनी है.
शिवलिंग न छुए गर्भवती महिला
गर्भावस्था में शिवलिंग न छूने का एक कारण यह भी हो सकता है कि, पुराने समय में मंदिरों में लंबे समय तक खड़े रहना, भीड़ और फिसलन जैसी स्थितियों से बचने और गर्भवती महिला की सुरक्षा के लिए ऐसे नियम बनाए गए हों.
शिव पूजा के नियम, जिनसे महादेव होते हैं प्रसन्न
सोमवार का दिन भगवान शिव शंकर को समर्पित होता है और इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व भी होता है, शिव कृपा से जीवन के हर संकट और कष्ट दूर होते हैं और मन की मुराद पुरी होती है लेकिन शिव जी की पूजा के कुछ नियम हैं, जिसका पालन करना जरूरी है-
- जब भी शिव जी की पूजा करें, तो शिवलिंग पर गंगाजल, साफ पानी या फिर गाय के दूध से अभिषेक करें, तीव्र गति के साथ जलाभिषेक न करें.
- जलाभिषेक हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही करें और ध्यान रखें कि शिवलिंग का जलाभिषेक बैठकर या झुककर करें.
- बेलपत्र के बिना शिव जी की पूजा अधूरी है, 3 पत्तों वाला साबुत बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करें.
- शिव पूजा के दौरान कभी भी शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जलाभिषेक के दौरान जहां से जल नीचे की तरफ गिरता है, उसे लांघते नहीं हैं.
- जब भी आप शिव मंदिर जाएं, सबसे पहले आचमन आदि से शुद्धि जरूर कर लें, स्वयं को शुद्ध करने के बाद ही पूजन करें.
- शिव पूजा में ध्यान रखें कि तुलसी, सिंदूर, हल्दी, नारियल, शंख, केतकी का फूल आदि का उपयोग नहीं करना है.
शंख का उपयोग करना शुभ नहीं
शिव जी की पूजा में शंख का उपयोग करना भी शुभ नहीं माना जाता, जिसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है कि दैत्य शंखचूड से सभी देवी-देवता परेशान थे. ऐसे में भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से उस दैत्य को भस्म कर दिया. उस भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई. इसलिए शिवलिंग पूजा में शंख का इस्तेमाल करना वर्जित होता है.
न चढ़ाएं ये चीजें
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, श्रीफल का संबंध मां लक्ष्मी से माना जाता है. मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु की धर्मपत्नी हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस भी चीज का संबंध मां लक्ष्मी से होता है, उसे कभी भी शिव जी को अर्पित नहीं करना चाहिए, वरना इससे साधक को शुभ परिणाम नहीं मिलते. इसी के साथ सिंदूर, हल्दी, केतकी और कनेर के फूल, नारियल का पानी व टूटे हुए चावल भी शिव जी को अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता.
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