शिंदे का भी प्रदर्शन अच्छा, कांग्रेस ने इस बार महा विकास अघाड़ी से अलग होकर चुनाव लड़ा. पार्टी को 24 सीटें मिलीं, जो 2017 के मुकाबले कम हैं.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
BMC election Results: महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में भाजपा ने परचम लहराया है और उसके गठबंधन वाली पार्टियों ने यानी महायुति ने एकतरफा जीत दर्ज की है. 29 नगर निगमों की सभी 2,869 सीटों का रिजल्ट आ गया है. इस चुनाव में BJP ने 1425 सीटें जीतीं हैं. वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 399 और अजित पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) को 167 सीटों पर जीत मिली.
इसके अलावा नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी चिंचवाड और नासिक में भी भाजपा गठबंधन को ही जीत मिली है.
मुंबई के बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में 227 वार्ड के नतीजे भी शुक्रवार देर रात घोषित कर दिए गए. जिसमें BJP ने 89, शिवसेना ने 29, कांग्रेस ने 24, शिवसेना (UBT) ने 65 और MNS ने 6 सीटें जीती हैं. AIMIM को 8, NCP को 3, समाजवादी पार्टी को 2 और NCP (SP) को सिर्फ एक सीट मिली.
बीजेपी का बनेगा महापौर
देश की सबसे अमीर नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर अब बीजेपी का राज है. 227 सदस्यीय BMC सदन में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत थी. महायुति गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. BJP पहली बार मुंबई में मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है. वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अपने प्रदर्शन से साख बचा ली है. दूसरी ओर ठाकरे भाइयों को बड़ा झटका लगा है.
ठाकरे भाइयों की मराठी इलाकों में पकड़ मजबूत
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS को मिलाकर 71 सीटें मिलीं. उद्धव गुट ने 65 और MNS ने 6 सीटें जीतीं. मुंबई के पारंपरिक मराठी इलाकों जैसे दादर, परेल, लालबाग, वरली और शिवड़ी में ठाकरे परिवार की पकड़ बनी रही. वरली में शिंदे गुट के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा. हालांकि ठाणे और नवी मुंबई जैसे इलाकों में यह गठबंधन असर नहीं दिखा सका.
BJP के मजबूत सहयोगी शिंदे ने बचाई साख
BJP के सहयोगी एकनाथ शिंदे इस चुनाव में मजबूती के साथ उभरे हैं. उनकी शिवसेना ने जहां 29 सीटें जीतीं, वहीं ठाकरे गुट के मुकाबले कम सीटें मिलीं, लेकिन सत्ता की चाबी उन्हीं के हाथ में नजर आ रही है. इससे अजित पवार की राजनीतिक अहमियत पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
ओवैसी की पार्टी को जबरदस्त प्रदर्शन
इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी MIM का रहा. पार्टी ने अपनी सीटें 2 से बढ़ाकर 8 कर लीं. कई अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में MIM ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया. माना जा रहा है कि ओवैसी के बयानों का असर अल्पसंख्यक वोटों पर पड़ा.
कांग्रेस लड़ी अकेले चुनाव
कांग्रेस ने इस बार महा विकास अघाड़ी से अलग होकर चुनाव लड़ा. पार्टी को 24 सीटें मिलीं, जो 2017 के मुकाबले कम हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गठबंधन से दूर रहकर उन्होंने उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बचाए. हालांकि AIMIM की बढ़त ने कांग्रेस को भी नुकसान पहुंचाया.
‘ट्रिपल इंजन सरकार’ का असर
विश्लेषकों के मुताबिक, मतदाताओं ने केंद्र, राज्य और शहर में एक ही पार्टी की सरकार के BJP के नारे को समर्थन दिया. BJP का हिंदुत्व और विकास का एजेंडा ठाकरे गुट की मराठी अस्मिता की राजनीति पर भारी पड़ा. BJP को अलग-अलग समुदायों का समर्थन मिला.

