5 अगस्त से लेकर अब तक बांग्लादेश के 52 जिलों में हिंदुओं के खिलाफ 205 घटनाएं हुईं, बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन ने शेख हसीना को छोड़कर भागने के लिए मजबूर किया था.
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By : DB News Update| Edited By: Supriya
Bangladesh Hindu Crisis : बांग्लादेश में इस समय सबसे ज्यादा हिंदुओं पर हमले की खबरें सामने आ रही हैं. हिंदुओं की दुकानों, मकानों और मंदिरों पर हमला किया गया. 5 अगस्त से लेकर अब तक बांग्लादेश के 52 जिलों में हिंदुओं के खिलाफ 205 घटनाएं हुईं. अब इस हिंसा के खिलाफ एकजुट होकर हिंदू प्रदर्शन कर रहे है. सोमवार शाम तो ढाका में सैकड़ों लोग शाहबाग चौराहे पर इकट्ठा हुए. उन्होंने करीब 2 घंटे तक प्रदर्शन किया. बांग्लादेश में पीड़ित हिंदू चार दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं. विदित हो कि बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन ने शेख हसीना को छोड़कर भागने के लिए मजबूर किया था. अब जब ढाका में नई अंतरिम सरकार बन गई है, इसके बाद भी वहां विरोध प्रदर्शन नहीं रुक रहे.
8 मांगों के साथ सड़क पर उतरे हिंदू
हिंदुओं ने मानव श्रृंखला बनाई अौर हिंसा बंद करने के साथ-साथ उनके घरों और धार्मिक संस्थानों पर हमलों को लेकर न्याय की मांग की गई. अपने हक के लिए नारे लगाए. इस दौरान चौराहे से वाहनों की आवाजाही रोक दी गई. नोआखाली में हिंदुओं ने जिला मुख्यालय पर 2 घंटे तक प्रदर्शन किया. पीड़ितों ने 8 मांगें भी रखीं, जिसमें अल्पसंख्यकों पर हमलों में शामिल लोगों पर कार्रवाई के लिए विशेष न्यायाधिकरण का गठन और अल्पसंख्यक संरक्षण आयोग का गठन शामिल है. द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, अल्पसंख्यकों के लिए अलग मंत्रालय का गठन और अल्पसंख्यकों पर सभी प्रकार के हमलों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की गई.
भारत में भी हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर आवाज उठाई गई
इधर भारत में भी बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर 50 से अधिक नामचीन लेखकों और वकीलों ने सरकार को पत्र लिखा है. इसके जरिए ऐसी घटनाओं को रोकने की मांग की गई है. लेखकों ने कहा कि बांग्लादेश में अभी हालात काफी खराब हैं, वहां हिंदुओं को चुन चुनकर पीटा जा रहा है, मंदिरों को तोड़ा जा रहा है. ये काफी चिंताजनक है.
अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने वालों के मुकदमों में तेजी लाने के लिए विशेष न्यायाधिकरणों की स्थापना, अल्पसंख्यकों के लिए 10 प्रतिशत संसदीय सीटों का आवंटन और अल्पसंख्यक संरक्षण कानून लागू करने सहित अन्य मांगों को लेकर, हिंदू प्रदर्शनकारियों की रैली ने ढाका के मध्य भाग में स्थित शाहबाग में तीन घंटे से अधिक समय तक यातायात बाधित कर दिया।
छात्रों सहित हजारों मुस्लिम प्रदर्शनकारी भी अल्पसंख्यकों के हित में एकजुटता व्यक्त करने के लिए उनके साथ शामिल हुए। चटगांव में ऐतिहासिक चेरागी पहाड़ चौक पर एक विशाल जनसभा आयोजित की गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, रैली में सात लाख से अधिक लोग शामिल हुए। इसी तरह के प्रदर्शन अमेरिका और ब्रिटेन में भी हुए।
बांग्लादेश के अंतरिम नेता ने अल्पसंख्यकों पर हमलों पर अपनी राय व्यक्त की। बांग्लादेश के अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस ने शनिवार को हिंसाग्रस्त देश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए उन्हें “जघन्य” करार दिया।
नोबेल पुरस्कार विजेता श्री यूनुस ने विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे चल रहे छात्रों से सभी हिंदू, ईसाई और बौद्ध परिवारों को नुकसान से बचाने का भी आग्रह किया।
“क्या वे इस देश के लोग नहीं हैं? आपने देश को बचाया है; क्या आप कुछ परिवारों को नहीं बचा सकते?… आपको कहना होगा – कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता। वे मेरे भाई हैं; हमने साथ मिलकर लड़ाई लड़ी है, और हम साथ रहेंगे,” 84 वर्षीय व्यक्ति ने राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा।
हिंदुओं की क्या है मांग?
बांग्लादेश के हिंदू अपने खिलाफ हुई हिंसा के विरोध में शुक्रवार से राजधानी समेत विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आठ सूत्री मांग रखी है, जिसमें अल्पसंख्यकों पर हमलों में शामिल लोगों के मुकदमे में तेजी लाने के लिए विशेष न्यायाधिकरण का गठन और अल्पसंख्यक संरक्षण आयोग का गठन शामिल है। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक अन्य मांगों में अल्पसंख्यकों के लिए अलग मंत्रालय का गठन और अल्पसंख्यकों पर सभी प्रकार के हमलों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाना और लागू करना शामिल है।

