By -DB New update edited by -prince awasthi
MP News, Jabalpur.
कचरे से बिजली बनाने के लिए कठौंदा में लगे वेस्ट टू एनर्जी प्लांट काे आखिरकार नया मालिक मिल ही गया। एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) ने जो टेंडर जारी किया था, उसमें दिल्ली की कंपनी कुंदन कंसन्ट्रेटस प्राइवेट लिमिटेड का टेंडर स्वीकार हो गया है। हालांकि एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) को प्लांट की जिम्मेदारी नई कंपनी को सौंपने में अभी समय लगेगा। तब तक प्लांट का संचालन आईआरपी ही करेंगे। हालांकि यह अभी तक नहीं है कि नई कंपनी प्लांट का संचालन पूर्व के अनुबंध के आधार पर करेगी या नहीं। यही वजह है कि नगर निगम ने एनसीएलटी को आवेदन दे दिया है कि प्लांट किसी और को हैंडओवर करने से पहले उनका पक्ष जरूर सुना जाए, ताकि शहर हित के जिन मुद्दों को लेकर प्लांट लगाया गया था वे प्रभावित न हों।
क्या है मामला
कठौंदा में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने वाली कंपनी और बैंकों के बीच रुपयों के लेनदेन काे लेकर विवाद चल रहा था। बैंकों का मूल तो दूर कंपनी ब्याज भी नहीं चुका पा रही थी। इसी को लेकर बैंकों ने एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में आवेदन दिया था। एनसीएलटी ने प्लांट की देनदारियों को निपटाने के लिए इसे बेचने की जिम्मेदारी सितम्बर 2023 में आईआरपी को सौंपी थी। आईआरपी ने पूरा लेखा-जोखा निकालने के बाद प्लांट बेचने के लिए जो टेंडर निकाला था, उसमें कुंदन कंसन्ट्रेटस प्राइवेट लिमिटेड को प्लांट के संचालन का जिम्मा मिलना तय हो गया है।
नगर निगम को 13 साल करना होगा इंतजार
प्लांट को संचालित करने के लिए नगर निगम भी तैयार था। इसको लेेकर निगम प्रशासन ने एनसीएलटी को पत्र भी लिखा था कि प्लांट की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जाए, लेकिन एनसीएलटी ने उस पर गौर न करते हुए प्लांट के संचालन का जिम्मा कुंदन कंसन्ट्रेटस प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया। यानी नगर निगम को अब कम से कम 13 साल और इंतजार करना होगा, क्योंकि एग्रीमेंट के तहत एस्सल कंपनी को जमीन और प्लांट को चलाने के लिए कचरा नगर निगम को देना था। प्लांट की लागत और उसके संचालन का खर्च कंपनी को करना है। प्लांट से बनने वाली बिजली को लगातार 20 साल तक बेचकर कंपनी अपना खर्च निकालेगी। इसके बाद पूरा प्लांट नगर निगम को हैंडओवर कर दिया जाएगा।
कंपनी अपनी शर्तों पर चला सकती है प्लांट
कठौंदा में कचरा से बिजली बनाने का प्लांट लगवाने के पीछे नगर निगम का मकसद यह रहा कि शहर का कचरा हर दिन जल जाए, लेकिन अब जिस कंपनी ने प्लांट खरीदा है, वह कचरे का इस्तेमाल करेगी या नहीं यह अभी तय नहीं है। जानकारों का कहना है कि चूंकि प्लांट एनसीएलटी से हैंडओवर हो रहा है, इसलिए कंपनी निगम के अनुबंध की शर्तों को मानने से इंकार भी कर सकती है। ऐसे में शहर के हित भी प्रभावित हो सकते हैं।
अभी आईआरपी ही संभालेगी जिम्मेदारी
एनसीएलटी ने भले ही प्लांट कुंदन कंसन्ट्रेटस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सौंपने का निर्णय ले लिया है, लेकिन अभी अगले कुछ माह संचालन का काम आईआरपी ही करेगी। प्लांट का संचालन जैसे हो रहा था, वैसे ही होगा, क्योंकि एनसीएलटी को देनदारियाँ निपटाने के साथ कागजी खानापूर्ति में कम से कम 6 माह का समय लगने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस दौरान प्लांट से होने वाली कमाई आईआरपी के खाते में जाएगी, वहीं जो भी खर्चा हो रहा है, उसका भुगतान भी आईआरपी ही करेंगे।
प्लांट के संचालन में शुरू से परेशानी
जानकारी के अनुसार कठौंदा में लगे वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को चलाने में एस्सल कंपनी को शुरू से परेशानी हो रही है। इसी वजह से कंपनी प्लांट को बेचने सालों से प्रयास कर रही है। करीब दो साल पहले दुबई की अवार्डा कंपनी से डील लगभग फाइनल भी हो गई थी लेकिन दस्तावेजी कार्रवाई पूरी होती, उससे पहले ही बैंकों ने आपत्ति लगा दी। उधर एस्सल ग्रुप की देनदारी स्पष्ट न होने से अर्वाडा कंपनी ने भी प्लांट खरीदने से मना कर दिया था।
प्रोजेक्ट पर एक नजर
> 11.5 मेगावॉट का है वेस्ट टू एनर्जी प्लांट।
> 200 करोड़ है प्लांट की लागत।
> 450 टन कचरा हर दिन देता है नगर निगम।
> 20 साल के बीओडी पर कंपनी ने बनाया है ।
> 1 रुपए सालाना लीज पर नगर निगम ने दी है प्लांट की जमीन।

