महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित होने वाले ‘कुंभ’ को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी, गोदावरी की गोद में लगने वाले कुंभ मेला को लेकर प्रशासन अलर्ट
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Nashik Kumbh 2027: महाराष्ट्र के नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेला 2027-28 को लेकर तैयारी प्रारंभ हो गई है. धर्म संसद ने 31 अक्टूबर 2027 से कुंभ मेला प्रारंभ करने की घोषणा कर चुका है. कुंभ आयोजन ध्वजारोहण के साथ शुरू होगा. इस कुंभ का समापन 20 फरवरी 2028 को होगा. देश का सबसे लंबे दिनों तक चलने वाला यह कुंभ मेला गोदावरी के तट पर आयोजित होने जा रहा है. जहां सभी 13 अखाड़ों के साधु-संतों, जगद्गुरु, महामण्डलेश्वर, श्रीमंहत, महंत और नागा साधुओं के दर्शन का लाभ श्रद्धालु भक्तों को मिलेगा. अमृत स्नान के साथ प्रमुख तिथियों पर स्नान करने की तारीख निश्चित हो गईं हैं. जिसको लेकर श्रद्धालु-भक्तों में काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है. वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी कुंभ को लेकर तैयारी शुरू है और गोदावरी के तट पर घाटों का निर्माण भी शुरू होने की खबर है.
अमृतस्नान की तिथियां
तारीख हिंदू कैलेंडर की तिथि
2 अगस्त 2027 आषाढ़ सोमवती अमावस्या
11 अगस्त 2027 श्रावण अमावस्या
11 सितंबर 2027 भाद्रपद शुद्ध एकादशी
नासिक कुंभ मेला 2027 की अन्य महत्वपूर्ण तिथियां
तारीख त्यौहारों की तिथियां
24 जुलाई 2027 नासिक कुंभ मेला 2027 का ध्वजारोहण समारोह
5 सितंबर 2027 ऋषि पंचमी
11 सितंबर 2027 भाद्रपद शुद्ध एकादशी
15 सितंबर 2027 भाद्रपद पूर्णिमा
11 और 15 अक्टूबर 2027 आश्विन शुद्ध एकादशी और पूर्णिमा
10 और 14 नवंबर 2027 कार्तिक शुद्ध एकादशी और पूर्णिमा
25 मई 2028 से 2 जून 2028 गंगा दशहरा उत्सव
26 जनवरी 2028 मौनी अमावस्या
1 फ़रवरी 2028 वसंत पंचमी
8 फ़रवरी 2028 गंगा गोदावरी महोत्सव
27 फ़रवरी 2028 महा शिवरात्रि
नासिक कुंभ में स्नान करने के लिए मिलेगा लंबा समय
नासिक कुंभ मेला 2027-28 का आयोजन करीब 4 से 5 महीने तक चलेगा. जिसके कारण कुंभ मेले में आने वाले वाले श्रद्धालुओं को गोदावरी मे स्नान करने के लिए भरपूर समय मिल जाएगा. बताया जा रहा है कि नासिक के साधुग्राम क्षेत्र में लगभग 350 एकड़ खाली जमीन है. इसके अलावा रामकुंड घाट में 100 एकड़ के करीब जमीन का एक हिस्सा है. जिसमें कुंभ मेले का आयोजन किया जाना है और साधु-संत यहीं डेरा जमाएंगे.
नासिक कुंभ मेला 2027 का फैलाव
नासिक कुंभ मेला प्रमुख रूप से त्र्यंबकेश्वर, तपोवन और पंचवटी में आयोजित किया जाएगा. तपोवन में श्रद्धालुओं के लिए जमीन आरक्षित होगी. इस कुंभ मेले में सभी 13 अखाड़े हिस्सा लेंगे और 3 अमृत स्नान और 45 कुंभ स्नान करेंगे.
मुख्यतः इन 13 अखाड़ों का होगा आगमन
- जूना अखाड़ा
- निरंजनी अखाड़ा
- महानिर्वाणी अखाड़ा
- अटल अखाड़ा
- आहवान अखाड़ा
- निर्मोही अखाड़ा
- आनंद अखाड़ा
- पंचाग्नि अखाड़ा
- नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा
- वैष्णव अखाड़ा
- उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा
- उदासीन नया अखाड़ा
- निर्मल पंचायती अखाड़ा
कैसे तय होती हैं कुंभ की तिथियां
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों और राशियों के विश्लेषण करने के बाद कुंभ मेले की तिथियां निर्धारित की जाती है. कुंभ मेले की तिथि के लिए ग्रहों के राजा सूर्य और देवताओं के गुरु बृहस्पति की चाल को महत्वपूर्ण माना जाता है. सूर्य और गुरु के राशि परिवर्तन के आधार पर ही कुंभ का स्थान तय किया जाता है.
प्रयागराज – ग्रहों के राजा सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं और बृहस्पति वृषभ राशि में होते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में किया जाता है.
नासिक – जब सिंह राशि में सूर्य और बृहस्पति ग्रह विराजमान रहते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन महाराष्ट्र के नासिक में लगता है.
हरिद्वार – जब सूर्य मेष राशि में तो बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ का मेला हरिद्वार में लगता है.
उज्जैन – जब सूर्य मेष राशि में तो बृहस्पति सिंह राशि में होते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन उज्जैन में किया जाता है.

