मैहर शारदा माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. छठवें दिन तक यहां करीब डेढ़ लाख श्रद्धालों ने दर्शन प्राप्त कर लिए हैं.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Maihar Sharda Mata Mandir News: चैत्र नवरात्रि के 7वें दिन कालरात्रि का दिन है. इस दिन गुड़ का भोग लगाने का विधान है, जिससे शारदा माता का आशिर्वाद मिलता है. इस अवसर पर मैहर शारदा माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर देवी दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने मातारानी के दर्शन कर लिए हैं. प्रशासन की चौक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच भक्त-श्रद्धालु उत्साहपूर्वक आस्था के साथ मां शारदा देवी के सुगमता से दर्शन कर रहे हैं.
चैत्र नवरात्रि के छठवें दिन मंगलवार को देश के कोने-कोने से करीब 1 लाख 55 हजार दर्शनार्थियों ने शाम तक मैहर पहुंचकर सुगमता से शारदा माता के दर्शन कर लिए थे. कुछ श्रद्धालु पैदल मार्ग से तथा कुछ वैन मार्ग से मंदिर माता के दरबार में पहुंचे. नवरात्रि पर्व के चलते मंदिर परिसर में लगातार भक्तों की भीड़ बनी हुई है.
कालरात्रि के स्वरूप में शारदा माता की पूजा
मैहर की शारदा माता को कालरात्रि देवी का स्वरूप माना जाता है. इस कारण बुधवार 25 मार्च 2026 को मां शारदा की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी. कालरात्रि की पूजा में गुड़ का भोग लगाया जाता है. जिससे मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्त को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं.
मां कालरात्रि का स्वरूप
रंग: काला (अंधकार के समान)
केश: बिखरे हुए
वाहन: गर्दभ (गधा)
नेत्र : तीन
हस्त मुद्रा: एक हाथ में खड्ग, दूसरे में वज्र, एक हाथ अभय और दूसरा वर मुद्रा में
श्रंगार: गले में माला, और शरीर से अग्नि की ज्वालाएं निकलती हैं
फल: भयंकर रूप होने के बावजूद इन्हें “शुभंकरी” भी कहा जाता है, क्योंकि ये भक्तों को शुभ फल देती हैं.
भोग: माता कालरात्रि की पूजा में गुड़ का भोग लगाया जाता है.
त्रिकूट पर्वत पर है शारदा शक्तिपीठ
त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा मंदिर स्थल देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है. मान्यता है कि माता सती का हार इसी स्थान पर गिरा था, जिसके कारण इस जगह का नाम “मैहर” पड़ा. यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां प्रतिदिन चमत्कार देखने को मिलते हैं. जिसके कारण मातारानी का आशिर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु गहरी आस्था के साथ यहां आते हैं.
अल्हा-उदल की रहस्यमयी परंपरा आज भी जिंदा
ऐसी मान्यता है मां शारदा की पहली पूजा आज भी आल्हा और उदल करते हैं. मातारानी शारदा के चरणों में विखरे फूल इस बात को प्रमाणित भी करते हैं.
मान्यता के अनुसार पहाड़ी के नीचे स्थित आल्हा अखाड़ा के तालाब से रोज कमल के फूल अपने आप मंदिर में पहुंच जाते हैं. इसके अलावा देर रात घंटियों की आवाजें भी सुनाई देती हैं, जिन्हें अल्हा की पूजा से जोड़कर देखा जा रहा है.
इसी वजह से रात की आरती के बाद मंदिर को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है और किसी को भी ऊपर रुकने की अनुमति नहीं दी जाती है.
अमरत्व की कथा से जुड़ा है विश्वास
मैहर शारदा मंदिर को लेकर लोककथाएं प्रचलित हैं कि अल्हा-उदल ने मां शारदा की कठोर तपस्या की थी, जिस कारण उन्हें अमरत्व का वरदान मिल गया. तभी से यह विश्वास है कि अल्हा आज भी जीवित हैं और रोज सबसे पहले माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं. यही कारण है कि इस मंदिर को दुनिया के सबसे रहस्यमयी और चमत्कारी मंदिरों में गिना जाता है.
मैहर रोपवे, वेन और पैदल मंदिर पहुंचकर श्रद्धालु कर रहे दर्शन
मैहर शारदा मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से ही मैहरधाम में भक्ति की भीड़ लगी हुई है. यहां आस्था का माहौल चरम पर दिखाई पड़ रहा है. शारदा माता मंदिर में देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां शारदा के दर्शन कर रहे हैं और अपनी ईच्छापूर्ति करने का आशिर्वाद मांग रहे हैं.
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