मुख्यमंत्री ने रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के लिये छिन्दवाड़ा में 4 जिलों के उद्यमियों के साथ की बैठक,
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP News: भोपाल. मध्यप्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव कराई जा रही है। उन्होंने प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिये 20 जुलाई को जबलपुर में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव को सफल बनाने के लिये मंगलवार को छिन्दवाड़ा जिले के अमरवाड़ा में हुई उद्योग संघों व उद्योगपतियों की बैठक में यह विचार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थानीय उद्यमियों के साथ बाहर के उद्यमियों को जोड़कर प्रदेश के सभी अंचल में सरकार समान रूप से विकास करना चाहती है, जिसमें कृषि, रोजगार, व्यापार, पर्यटन आदि की दिशा में एक नये उपलब्धि को हासिल किया जा सके। इसमें कई सारी कठिनाईया आती है लेकिन सकारात्मक सोच से आगे बढ़कर उनका निराकरण करें। छोटे-बड़े, मझौले सभी उद्यमी सरकार के साथ कदम-कदम से मिलाकर चलेंगे तो विकास की एक नई धारा प्रवाहित होगी। अभी तक इंदौर में इंडस्ट्री सम्मिट होती थी लेकिन अब यह प्रदेश के अन्य भागों में भी होगी और वहां की औद्योगिक कठिनाईयों को दूर किया जायेगा। उन्होंने उद्योग संघों व उद्योगपतियों से कहा कि वे निवेश को प्रोत्साहित करें। इसके लिये उन्हें औद्योगिक नीति अनुसार सुविधा प्रदान की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी 5 साल में प्रदेश की जीडीपी को डबल करने के लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुये निवेश को प्रोत्साहित करना है।
स्थानीय उत्पादों के प्र-संस्करण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जो बेहतर हो सकता है उस दिशा में निवेश में अनुकूलता लाना है। औद्योगिक विकास के लिये प्रदेश में पर्याप्त लैंड बैंक है। बैठक में उन्होंने औद्योगिक निवेश में रोजगारमूलक गतिविधि और स्थानीय उत्पादों के प्र-संस्करण पर जोर दिया गया। उन्होंने उद्योगों के स्थापना में सब्सिडी का जिक्र करते हुये बॉयर- सेलर के बीच की कठिनाईयों को दूर कर उद्योग और व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने को कहा। इन सब बातों में उन्होंने स्थानीयता को विशेष महत्व देते हुये कहा कि स्थानीय स्तर पर कच्चे-माल को उपयोगी बनाये और रोजगार पाने वालों की संख्या बढ़ायें।
दुग्ध उद्योग को बढ़ावा
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने सभी जिला कलेक्टरों से उद्योग और व्यापार संघों की कठिनाईयों को समझने तथा उसे दूर करने और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये कहा ताकि लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिले और उनकी बेहतरी के लिये सुझाव भी हो। उन्होंने दुग्ध उद्योग को बढ़ावा देने के लिये हो रहे प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने जिले एवं संभाग में उद्योगों की संभावनाओं की दिशा में कारगर कार्य करने को निर्देशित किया।
आईटी क्षेत्र को प्रोत्साहन करने के लिये विशेष कार्ययोजना
प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन ने औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की समस्या के निदान के साथ औद्योगिक नीति की जानकारी देते हुये कहा कि आईटी क्षेत्र को प्रोत्साहन करने के लिये विशेष कार्ययोजना है।
क्षेत्रीय स्तर पर उद्योगों के विकास की पहल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय स्तर पर उद्योगों के विकास की ठोस पहल की है। इसके लिए के नवीन मंत्र का उपयोग प्रभावी तरीके से प्रारंभ किया गया है। गत मार्च माह में उज्जैन में सम्पन्न रीजनल कॉन्क्लेव के बाद महाकौशल अंचल के प्रमुख नगर और औद्योगिक केन्द्र जबलपुर में हुई कॉन्क्लेव अनेक अर्थ में महत्वपूर्ण रही। कॉन्क्लेव से जहां प्रदेश में 67 नई औद्योगिक इकाइयों के लोकार्पण और भूमिपूजन सम्पन्न हुए, वहीं 265 औद्योगिक इकाइयों को 340 एकड़ भूमि आवंटित की गई। नई इकाइयों से प्रदेश में 16 हजार 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। कुल 332 इकाइयों द्वारा 3330 करोड़ रूपए का नया निवेश आ रहा है।
मालवा और महाकौशल के बाद अन्य अंचलों पर नजर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी अंचलों में आरईसी के आयोजन के निर्देश दिए थे। आगामी माहो में प्रदेश के अन्य बड़े नगरों में भी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित करने की योजना है। इनमें सागर, रीवा और ग्वालियर शामिल हैं। इससे बुंदेलखंड, विंध्य और चम्बल क्षेत्र में स्थानीय उद्यमियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। विभिन्न क्षेत्रों में छोटी और मध्यम श्रेणियों की इकाइयों का संचालन करने वाले उद्यमी शासन द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ लेने के लिए अग्रसर होंगे। विशेष रूप से कृषि, फूड प्रोसेसिंग, खनिज, रक्षा उत्पादन, पर्यटन और वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए प्रारंभ किए गए प्रयास सफलता के नए आयाम स्थापित करेंगे।
वन-टू-वन बैठकों से कठिनाइयों का निकल रहा त्वरित समाधान
प्रदेश में हो रही रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव बहुआयामी गतिविधियों के कारण उद्योगों के विकास का आधार बन रही हैं। ये कॉन्क्लेव जहां बायर- सेलर मीट के माध्यम से महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होती हैं, वहीं वृहद औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव और प्रमुख उद्योगपतियों के बीच वन-टू-वन बैठकें मील का पत्थर का साबित होंगी। उद्योगों के लिए आवश्यक सुविधाओं को प्रदाय करने में जहाँ कोई बाधा या कठिनाई सामने आती है, वन-टू-वन बैठकें ऐसी कठिनाइयों को दूर कर त्वरित समाधान में सहायक बनती हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एमएसएमई सेक्टर की भूमिका निरंतर महत्वपूर्ण बन रही है।

