महाकालेश्वर की अब तक निकली श्रावण की दो सवारियों के दौरान कई श्रद्धालुओं के मोबाइल और पर्स चोरी होने की घटनाएं सामने आई है
Source : DB News Update
By- डीबी न्यूज अपडेट | Edited by- सुप्रिया
Ujjain Mahakal News: उज्जैन महाकाल के दरबार में सावन सोमवार के दिन भगवान महाकाल की सवारी निकलने से पहले कार्तिक मंडपम में भगवान महाकाल का विधि विधान से पूजन अर्चन होता है. उसीके पश्चात भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने मंदिर परिसरों से बाहर निकलते हैं.
महाकालेश्वर की अब तक निकली श्रावण की दो सवारियों के दौरान कई श्रद्धालुओं के मोबाइल और पर्स चोरी होने की घटनाएं सामने आई है. इसी को देखते हुए तीसरे सावन सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकलने से पहले पुलिस ने चोरी की घटना को रोकने के लिए खास इंतज़ाम किए थे. जिसमें पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम कुछ चिह्नित पाइंट पर सवारी के दौरान अन्य पुलिसकर्मी के साथ सादी वर्दी में तैनात किए गए थे.
जय महाकाल से गूंज उठा उज्जैन
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल सावन मास मे भक्तो का हाल जानने मंदिर परिसर से बहार निकलते है. श्रद्धालु बाबा की एक झलक पाने को घंटो इंतज़ार करते है.बाबा की जैसे ही पालकी श्रद्धालुओं के बीच पहुंचती है. वैसे ही उज्जैन जय श्री महाकाल की जय घोष से गूंज उठता है.
ड्रोन से होगी चप्पे-चप्पे की निगरानी
उज्जैन पुलिस अधीक्षक की मानें तो “सवारी निकलने के 15 दिन पहले तैयारी शुरू कर दी गई. शहर में चेकिंग अभियान तेज किए गए हैं. बदमाशों से बांड ओवर भरवाए जा रहे हैं, सवारी मार्ग पर तीन ड्र्रोन की तैनाती की है, जो लगातार चप्पे चप्पे पर नजर रखेंगे. मार्ग पर एक्स्ट्रा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है. सभी बिल्डिंग की छत की चेकिंग की जा रही है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होने दी जायेगी. लेयर थ्री हाई सेक्युरिटी रहेगी. सिविल ड्रेस में भी पुलिस को तैनात किया जायेगा.”
सात किलोमीटर लंबा रहेगा रूट
यहां बतादें कि श्री महाकालेश्वर भगवान की शाही सवारी श्रावण-भाद्रपद माह में निकाली जाती है. सवारी में छह मुखारविंद शामिल होंगे और इसका मार्ग लगभग सात किलोमीटर लंबा होता है. महाकाल मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि सवारी के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं. लाखों भक्तों के आने का अनुमान है. पहली बार 10 ड्रोन से सवारी पर पुष्पवर्षा की जाएगी.
छह मुखारविंद होंगे सवारी में शामिल
सवारी में रजत पालकी में श्री चंद्रमोलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट का मुखारविंद और रथ पर सप्तधान मुखारविंद शामिल रहेंगे. सवारी से पहले मंदिर में पूजन-अर्चन किया जाएगा और मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल द्वारा भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा.
सवारी निकलने की यह रहती टाइमिंग
श्री महाकालेश्वर मंदिर में पूजन के बाद शाम 4 बजे सवारी रवाना होती है. मंदिर से सवारी 4:20 बजे कोट मोहल्ला, 4:30 बजे गुदरी चौराहा, 4:45 बजे बक्षी बाजार चौराहा, 5 बजे हरसिद्धि पाल, 5:15 बजे रामघाट पर पूजन, 6 बजे बंबई वाले की धर्मशाला, 6:30 बजे गणगौर दरवाजा, 7 बजे सत्यनारायण मंदिर, 7:30 बजे कमरी मार्ग, 7:45 बजे टंकी चौराहा, 8 बजे तेलीवाड़ा, 8:30 बजे कंठाल चौराहा, 9 बजे गोपाल मंदिर, 9:30 बजे गुदरी चौराहा, 9:45 बजे कोट मोहल्ला और रात 10 बजे मंदिर परिसर पहुंचती है.
महाकालेश्वर ने अलग-अलग 6 रूपों में देते हैं दर्शन
राजसी सवारी में भगवान श्री महाकालेश्वर ने छह विभिन्न स्वरूपों में अपनें भक्तों को दर्शन देते हैं. भगवान श्रीमहाकाल की राजसी सवारी में रजत पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नन्दी रथ पर श्री उमा-महेश और डोल रथ पर श्री होल्कर स्टेट के मुखारविंद एवं षष्ठम् सवारी में श्री सप्तधान मुखारविंद के रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं.
भगवान श्रीमहाकालेश्वर की सवारी परम्परागत मार्गों से होती है, इस अवसरर पर सवारी रामघाट पहुंचती है. रामघाट पर भगवान श्री महाकाल का क्षिप्रा के जल से जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की जाती है.. पूजन-अर्चन पुजारियों के द्वारा सम्पन्न कराई जाती है. इस अवसर जनप्रतिनिधि के अलावा धार्मिक, सामाजिक और व्यवसायिक गतिविधियों से जुड़े लोग महाकाल का स्वागत सत्कार करते हैं. इसके लिए लंबे समय से तैयारी भी की जाती है, जिससे सवारी निकलने समय किसी प्रकार का विघ्न न आए और भक्तों को महाकाल का दर्शन लाभ भी मिल सके.

